सुशांत सिंह राजपूत के को स्टार संदीप नाहर का आत्महत्या से निधन, फेसबुक पर डाला सुसाइड वीडियो
सुशांत सिंह राजपूत के साथ एम एस धोनी में काम कर चुके एक्टर संदीप नाहर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उनकी मौत का कारण सुसाइड बताया जा रहा है। मुंबई पुलिस का कहना है कि केस दर्ज हो चुका है और इसकी जांच होगी। संदीप की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतज़ार किया जा रहा है।
मौत से कुछ घंटों पहले, संदीप नाहर ने एक फेसबुक पोस्ट डाला और साथ ही एक वीडियो भी डाला जिसका नाम उन्होंने सुसाइड नोट दिया। संदीप ने इस पोस्ट में अपने पारिवारिक जीवन की कलह और एक्टिंग की दुनिया की पॉलिटिक्स का ज़िक्र किया।

संदीप के पोस्ट पर लोगों के ढेरों कमेंट्स हैं जो उन्हें इतना बड़ा कदम ना उठाने की सलाह दे रहे हैं। उनके कुछ दोस्तों ने उन्हें कॉल करने की कोशिश भी की लेकिन अब संदीप इस दुनिया में नहीं है।
उनका पोस्ट किया हुआ वीडियो इतना दर्दनाक है कि हम किसी को भी इसे देखने की सलाह नहीं देंगे। संदीप, अक्षय कुमार स्टारर केसरी में बूटा सिंह के किरदार में दिखाई दिए थे। उनके सुसाइड नोट के कुछ अंश बेहद दुखद हैं।

चमक दमक की है दुनिया
"दो साल से लाइफ बिल्कुल बदल गई हहै और ये बातें मैं कभी किसी से शेयर भी नहीं कर सकता। दुनिया को लगता है कि उनका कितना अच्छा चल रहा है क्योंकि वो सब हमारे सोशल पोस्ट या स्टोरी देखते हैं जो कि सब झूठ होती है।"

पत्नी का किया ज़िक्र
अपनी पत्नी के बारे में संदीप ने लिखा, "इसके कहने पे डालते हैं कि दुनिया को अच्छा दिखाने के लिए इमेज अच्छी रहे। लेकिन सच बिल्कुल उलटा है। हमारी बिल्कुल नहीं बनती। कंचन, 100 से ज़्यादा बार सुसाइड कर लूंगी बोलती रहती है, तुम्हें फंसा दूंगी बोलती है।"

सहन से बाहर
देखो आज ये नौबत आ गई है कि ये मुझे ये स्टेप उठाना पड़ रहा है। अतीत को लेकर लड़ती है, मुझे गालियां देती हैं, मेरे परिवार की इज़्जत नहीं करती है। मेरी फैमिली के बारे में रोज़ बुरा बुरा बोलती है और मेरे लिए ये सब सुनना अब सहन से बाहर हो रहा है।

मायानगरी की अजीब दुनिया
मायानगरी बॉलीवुड में बहुत पॉलिटिक्स है। आपको बस उम्मीदें देकर आपका वक्त खा जाते हैं। और बाद में प्रोजेक्ट से रिप्लेस कर देते हैं।

पुराने दिन अच्छे थे
वो भी सब कुछ होने के बाद, अग्रीमेंट होने के बाद। यहां लोग भी बहुत प्रैक्टिकल होते हैं। कोई इमोशन नहीं होता है। बस दिखावे के लिए झूठी लाईफ में जीते हैं। वो वक्त ही अच्छा था जब कच्चे घर होते थे, लोगों में प्यार होता था, सब अपने लगते थे।

भीड़ में अकेले
आज कल तो सब अपने होकर भी पराए लगते हैं। भीड़ में अकेला जीना भी एक कला है। कलयुग का दौर है, गलत करने वाले राजा हैं, खुश हैं।

जीने का दिल ही नहीं
ईमानदारी से अच्छा बर्ताव करने से यहां लोग आपको छोटा समझते हैं और एटीट्यूड रखने वालों को सैल्यूट करते हैं। अलग मामला है। बस दिल नहीं अब जीने का।

स्वर्ग या नर्क
ये स्वर्ग या नर्क, शादी के बाद ही वो फीलिंग आती है। लेकिन दो साल से नर्क ही भोग रहा हूं। अब नहीं और सहन होता। जाने अनजाने में अगर किसी का दिल दुखाया हो तो हाथ जोड़कर माफी। खुश रहिए और दूसरों को भी रखिए।

जियो और जीने दो
जैसी लाइफ खुद जीना चाहते हो, दूसरों को भी दो। किसी को कैद में रखकर ज़िद से प्यार हासिल नहीं किया जा सकता। प्यार से प्यार हासिल किया जा सकता है।

कलह से परेशान
जो देर से शादी होने से या ना होने से, अकेले रहने से लोग नहीं मरते, ऐसा नहीं सुना है। लेकिन गलत शादी होने से काफी लोगों को मरते देखा है मैंने।
(यदि आपको या आपके जानकारी में किसी व्यक्ति को मदद की जरूरत हो, तो अपने नजदीकी मानसिक स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। हेल्पलाइन- COOJ मेंटल हेल्थ फाउंडेशन: 0832-2252525, स्नेहा - 044-24640050/ 044-24640060, परिवर्तन: +91 7676 602 602 )


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