सुरैया ही नहीं ज़ीनत के भी दीवाने थे देव साहब
जिस तरह देव आनंद को बतौर हीरो सदाबहार कहा जाता है उसी तरह उनकी और सुरैया की प्रेम कहानी भी सिने जगत तथा सिने प्रेमियों के लिए सदाबहार बनी हुई है. सुरैया के संग उनकी मोहब्बत की दास्तान आज भी दिलचस्प किस्सा है. मगर हाल ही में छपे अपनी आत्मकथा "रोमांसिंग विद लाइफ " में देव साहब ने एक ऐसे शख्स का नाम बयां किया है जिससे उन्होंने सुरैया की तरह बेइंतेहा मोहब्बत की थी. वह नाम था 'ज़ीनत अमान'का.
अपनी किताब में उन्होंने ज़ीनत के साथ अपने एक तरफा मोहब्बत का ज़िक्र करते हुए बताया है "मुझे एक दिन यह एहसास हुआ कि मुझे ज़ीनत से मोहब्बत हो गई है. अपने एहसास को ज़ीनत तक पहुंचाने के लिए उसे मैं अपने साथ घूमनें ले जाना चाहता था. मैंने उसे फोन किया मेरे पूछने से पहले ही उसने मुझसे पूछ लिया कि क्या मैं आज रात की पार्टी में आ रहा हूं. मैंने हां कहकर सोचा कि आज ही मैं अपने दिल की बात ज़ीनत को बता दूंगा. पार्टी में पहुंचने के बाद मैं ज़ीनत को देखने के लिए बेकरार हो गया. तभी मुझे ज़ीनत दिखाई दी उसने मुझे दूर से "हैलो " कहा और भीड. में गायब हो गई. मैं काफी देर तक उसे ढूंढता रहा तभी अचानक मुझे वह फिर दिखाई दी. मैं उसके करीब गया जैसे ही मैं उससे अपने दिल की बात कहना चाहा एक शराबी ने पीछे से आकर ज़ीनत की कमर में हाथ डालकर उसे अपनी तरफ खिंच लिया. वह शराबी और कोई नहीं शोमैन राज कपूर थे. इस स्थिति में मुझे सामने देखकर ज़ीनत थोडी़ शरमा गई और पीछे हट गई. राज साहब अब भी खडे़ थे और उससे किसी वादे की बात कर रहे थे. यह सब नज़ारा देखकर न जाने मुझे क्या हुआ. मैंने जो ज़ीनत के प्यार की मूर्ति अपनी आंखों में बसाई थी वह धूमिल हो गई. मैं वहां से किसी से कुछ कहे बिना निकल गया और अपने आप से एक वादा किया कि आज के बाद ज़ीनत में अपनी मोहब्बत को कभी नहीं ढूंढूंगा"
हमें यकीन है देव साहब की इस किताब को ज़ीनत ने ज़रूर पढा होगा. उनका क्या सोचना है इस बारे में उसे जानने के लिए हो सकता है हमें उनकी किताब के आने का इंतज़ार करना पडे़.


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