खत्म होने के नहीं आ रहे हैं Samay Raina के बुरे दिन, अब इस जोक की वजह से कोर्ट में लगाने पड़ रहे हैं चक्कर

Samay Raina Controversy: मशहूर कॉमेडियन और 'इंडियाज गॉट टैलेंट' के होस्ट समय रैना एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनकी कॉमेडी नहीं बल्कि कोर्ट है। जी हां, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को समय रैना और चार अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को दिव्यांग लोगों का मजाक उड़ाने के मामले में तलब किया।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने पांचों इन्फ्लुएंसर्स को निर्देश दिया कि वे दो हफ्तों के अंदर कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करें। कोर्ट ने साफ कहा है कि यह आखिरी मौका होगा और इसके बाद समय सीमा नहीं बढ़ाई जाएगी।
किन पांच लोगों के खिलाफ चल रहा मामला
जिन लोगों को पेश होने के लिए कहा गया है, उनमें समय रैना के अलावा कॉमेडियन विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोशल मीडिया क्रिएटर सोनाली ठक्कर और निशांत जगदीश तंवर शामिल हैं। कोर्ट ने इन सभी से कहा है कि अगली सुनवाई में वे व्यक्तिगत रूप से हाजिर हों। हालांकि, सोनाली ठक्कर को उनकी खराब सेहत को देखते हुए वर्चुअली पेश होने की परमिशन दी गई है।
कैसे शुरू हुआ मामला
मामला एक याचिका से शुरू हुआ, जो Cure SMA Foundation की ओर से दायर की गई थी। इसमें आरोप लगाया गया कि इन इन्फ्लुएंसर्स ने एक वीडियो या शो के जरिए स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) जैसी गंभीर बीमारी और दूसरे विकलांगताओं को लेकर मजाक उड़ाया। यह बीमारी एक रेयर जेनेटिक डिसऑर्डर है, जिससे पीड़ित बच्चों और बड़ों की जिंदगी बेहद कठिन हो जाती है। याचिका में मांग की गई थी कि ऐसे कंटेंट को तुरंत हटाया जाए और सोशल मीडिया पर दिव्यांग व्यक्तियों का मजाक ना उड़ाया जा सके, इसके लिए गाइडलाइन्स तय की जाए।
5 मई को सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई पुलिस कमिश्नर को ऑर्डर दिया था कि वह इन पांचों इन्फ्लुएंसर्स को नोटिस जारी करें और कोर्ट में पेश होने को कहें। कोर्ट ने यह भी साफ किया था कि अगर वे पेश नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक व्यक्ति की आजादी का ये मतलब नहीं होता कि वो दूसरों की गरिमा और अधिकारों का उल्लंघन करे। कोर्ट ने यह भी माना कि सोशल मीडिया पर कंट्रोल और गाइडलाइन लागू करना एक बड़ी चैलेंज है, लेकिन अब वक्त आ गया है कि इस दिशा में कड़े कदम उठाए जाएं।
अब सभी आरोपियों को दो हफ्तों के अंदर अपना पक्ष लिखित रूप में कोर्ट के सामने रखना होगा। अगली सुनवाई में इनकी मौजूदगी जरूरी होगी, वरना कोर्ट सख्त रुख अपना सकता है।


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