'लालची कौन?' करिश्मा कपूर के बच्चों के वकील ने प्रिया सचदेव को बताया- 'सिंड्रेला वाली सौतेली मां'!

Sunjay Kapur

Sunjay Kapur inheritance case: इन दिनों करिश्मा कपूर के एक्स पति संजय कपूर की मौत के बाद उनकी जायदाद को लेकर कोर्ट में मामला चल रहा है। करिश्मा कपूर के बच्चे अपने पिता के जाने के बाद उनकी प्रॉपर्टी में अपना हिस्सा मांग रहे हैं, जबकि जायदाद के अनुसार संजय कपूर का अब सबकुछ उनकी विधवा पत्नी प्रिया सचदेव कपूर के नाम हो चुका है।

कोर्ट में चल रहा मामला

दिल्ली हाई कोर्ट में शुक्रवार को बिजनेसमैन संजय कपूर की लगभग 30,000 करोड़ रुपये की संपत्ति को लेकर सुनवाई हुई। इस मामले में करिश्मा कपूर के बच्चे अपनी हिस्सेदारी पाने के लिए अदालत में पेश हुए।

वकील ने प्रिया को बताया लालची

सुनवाई के दौरान करिश्मा कपूर के बच्चों के वकील सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी ने संजय कपूर की पत्नी प्रिया सचदेव कपूर की तुलना सिंड्रेला की क्रूर सौतेली मां से कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रिया सचदेव अपने लालच के लिए करिश्मा के बच्चों की प्रॉपर्टी में हिस्सा कम करने की कोशिश कर रही हैं।

वसीयत अपने नाम करने की कोशिश

जेठमलानी ने कहा कि प्रिया पहले ही प्रॉपर्टी का 60% हिस्सा खुद रख चुकी हैं, अपने बेटे को लगभग 12% हिस्सा दे दिया और 75% ट्रस्ट पर भी उनका ही कंट्रोल है। उन्होंने बताया कि प्रिया इतनी जल्दी में थीं कि उन्होंने बेनेमी फॉर्म्स के बारे में लेटर भी लिखने शुरू कर दिए थे, जिनका इस्तेमाल कंपनियों की बेनिफिसरी को तय करने में होता है।

वकील ने यह भी कहा कि यह जल्दबाजी संजय कपूर की पहली शादी से हुए बच्चों के अधिकारों को कम करने की कोशिश थी। उन्होंने वसीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि संजय कपूर जैसे समझदार व्यक्ति ने इतनी बड़ी प्रॉपर्टी की वसीयत किसी वकील की सलाह के बिना बनाई ही नहीं होगी।

वसीयत में कई तरह की गलतियां

जेठमलानी ने बताया कि वसीयत टाइप की गई थी और इसमें कई कमियां और खामियां हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई साधारण मामला नहीं है, क्योंकि एग्जीक्यूटर को इस बारे में इनफॉर्म नहीं किया गया और कोई वकील भी इस मामले में शामिल नहीं था।

वकील ने यह भी दावा किया कि वसीयत में बदलाव तब किया गया जब संजय कपूर अपने बेटे के साथ छुट्टियां मना रहे थे। उन्होंने कहा कि जिसने बदलाव किया, वह अंतिम संस्कार के एक दिन बाद ही कंपनी का डायरेक्टर बन गया।

जेठमलानी ने चेतावनी दी कि वसीयत में फर्जीवाड़ा करना सीरियस क्राइम है और इसके लिए आजीवन जेल तक हो सकती है। आपको बता दें, यह केस अब दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहा है और अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी।

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