शाहरूख खान ने दिए थे नोट्स, ज़मानत के बाद आंखो में आंसू थे - वकील मुकुल रोहतगी ने यूं जीती आर्यन की ज़मानत
शाहरूख खान के बेटे आर्यन खान को ड्रग्स केस में ज़मानत मिल चुकी है और इस केस में शाहरूख खान का साथ दिया एक बड़ी लीगल टीम ने। इस टीम में शामिल थे सीनियर एडवोकेट सतीश मानेशिंदे और उनकी पूरी लीगल टीम, सीनियर एडवोकेट अमित देसाई जिन्होंने सलमान खान को हिट एंड रन केस से निजात दिलवाई थी, सीनियर एडवोकेट रायन करांजीवाला और उनकी लीगल टीम।
इस केस को आर्यन खान की ओर से लीड किया था भारत के पूर्व अटर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने। ज़मानत के बाद एक चैनल को दिए इंटरव्यू में मुकुल रोहतगी ने बताया कि शाहरूख खान ने निजी तौर पर इस केस पर उनके साथ नोट्स शेयर किए थे।

मुकुल रोहतगी ने ये भी बताया कि आर्यन की ज़मानत मंज़ूर होने के बाद शाहरूख खान की आंखों में आंसू थे। उन्होंने बताया कि इस पूरे केस के दौरान शाहरूख खान कितने परेशान थे और ठीक से अपने खाने - पीने का भी ध्यान नहीं रख रहे थे। गौरतलब है कि आर्यन की ज़मानत मंज़ूर होने के बाद, शाहरूख खान पहली बार अमित देसाई और सतीश मानेशिंदे की पूरी लीगल टीम के साथ कैमरों के लिए पोज़ करते और मुस्कुराते दिखे थे।
गौरतलब है कि मुकुल रोहतगी ने ही केस की सुनवाई पूरी होने के बाद मीडिया को ये खबर दी थी कि आर्यन खान के साथ अरबाज़ मर्चेंट और मुनमुन धमीचा की ज़मानत मंज़ूर कर ली गई है लेकिन सभी शनिवार तक जेल के बाहर आ पाएंगे। अगर दलीलों की बात करें तो मुकुल रोहतगी के कुछ मज़बूत पॉइंट्स ने इस केस को आर्यन के लिए बिल्कुल आसान बना दिया।

मुकुल रोहतगी की मज़बूत दलीलें
मुकुल रोहतगी ने आर्यन खान की ओर से जब दलील पेश की तो उन्होंने कोर्ट के सामने साज़िश और शक के बीच का अंतर साफ किया। मुकुल रोहतगी ने आर्यन खान की ओर से कहा - मैं नहीं जानता था कि बाकियों के पास क्या है और वो क्या लेकर आए हैं। मान लीजिए कि अगर मैं जानता भी हूँ तो भी मेरे ऊपर सामूहिक रूप से कॉमर्शियल मात्रा में ड्रग्स रखने का आरोप लगाया जा सकता है। इसलिए मेरे ऊपर 27A सेक्शन के तहत कोई भी आरोप लगाना बेबुनियाद है।

केवल एक ही आरोप तय है
मुकुल रोहतगी ने आगे जज के सामने आर्यन की ओर से दलील पेश करते हुए कहा - मैं अगर बाकी के 5 - 8 लोगों के साथ साज़िश कर रहा हूं, उनके पास से जब ड्रग्स बरामद हो जाए और उन सबके पास से बरामद हुए ड्रग्स की मात्रा को एक साथ जोड़ा जाए तब कहीं जाकर वो कॉमर्शियल मात्रा बनती है। यहां साज़िश का सवाल ही नहीं उठता क्योंकि यहां पर लोगों ने एक दूसरे के साथ प्लान शेयर किया ही नहीं। कई तरह के विचार एक जगह इकट्ठे ही नहीं हुए। ना ही कोई चर्चा हुई कि हम मिलेंगे और ना ही ये तय किया गया कि हम अपने साथ ड्रग्स लाएंगे और फूंकेंगे, ये होता तो फिर इसे साज़िश या प्लान करार दिया जा सकता था।

साफ दिया उदाहरण
अपनी बात को साबित करने के लिए मुकुल रोहतगी ने साफ साफ़ उदाहरण भी दिया। उन्होंने आर्यन की ओर से कहा - अगर एक होटल में अलग अलग कमरों में लोग हैं और वो अपने अपने कमरों में फूंक रहे हैं तो क्या होटल के सारे लोग इस साज़िश में शामिल हैं?

संदेह और साज़िश में अंतर
मुकुल रोहतगी ने आर्यन की ओर से दलील पेश करते हुए जज के सामने कहा - मैं इनमें से किसी को नहीं जानता था। मैं केवल अरबाज़ को जानता था। मैं जानता हूं कि ये साबित करना मुश्किल है कि वहां पर मौजूद लोगों ने इस प्लान पर पहले से चर्चा नहीं की है। लेकिन इस केस में तथ्यों को नहीं नकारा जा सकता है। यहां पर सभी आरोपियों के विचारों की सहमति होना ज़रूरी है। जानबूझकर कोई 6 ग्राम ड्रग्स क्यों रखेगा। NCB का आरोप है कि ये केवल संदेह या संयोग नहीं है बल्कि ये साज़िश है। लेकिन साज़िश का अनुमान लगाने से या फिर संदेह करने से दूर दूर तक संबंध नहीं होता है।

NCB से सीधा सवाल
मुकुल रोहतगी ने कोर्ट के सामने आर्यन का पक्ष रखते हुए पहला सीधा सवाल यही पूछा कि उनका क्लाईंट 20 दिन से किस जुर्म के आरोप में जेल में बंद है?मुकुल रोहतगी की सबसे पहली दलील यही थी कि जब आर्यन के पास से ना ही कोई ड्रग्स बरामद हुआ और ना ही उन्होंने ड्रग्स का सेवन किया तो उन्हें किस आधार पर 8 अक्टूबर से अब तक जेल में रखा गया है?


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