मरे हुए मरीज़ को बेड दिलवाने का दावा करने पर ट्रोल हुए सोनू सूद, लोगों ने दिए सुबूत, टूट गए एक्टर
सोनू सूद इस समय युद्ध स्तर पर लोगों की मदद कर रहे हैं लेकिन उनके दामन पर छींटे डालने वाले भी कम नहीं हैं। पहले कंगना रनौत ने उन्हें फ्रॉड कहा था और अब ट्विटर पर कुछ लोगों ने सोनू सूद को एक मरे हुए मरीज़ को बेड दिलवाने के दावे पर घेर लिया। दरअसल, 54 साल के इस मरीज़ को रात में 12 बजे बेड की ज़रूरत थी।
सोनू सूद ने सुबह 9 बजे ट्वीट कर लिखा - कभी कभी रात में जगना अच्छा होता है। इस मरीज़ को बेड दिलवा दिया गया है। जबकि हकीकत ये थी कि वो मरीज़ रात में 3.30 बजे ही दुनिया छोड़ चुका था।

ऐसे में लोगों ने सोनू सूद से पूछा कि क्या उनके लिए ट्वीट और रिट्वीट ही सब कुछ है। सोनू सूद ने अपनी सफाई में कहा कि मरीज़ को मदद मिल चुकी थी लेकिन उसने रात में ही दम तोड़ दिया था। लेकिन लोगों का सवाल ये था कि अगर मरीज़ दुनिया में रहा ही नहीं तो सोनू सूद उसकी मदद करने की प्रदर्शनी क्यों लगवा रहे थे?
इतनी बातें पढ़ सोनू सूद भी टूट गए और उन्होंने लिखा - मेरे पास कल 41660 मदद की गुहार आईं। हम हर किसी तक पहुंचने की कोशिश करते हैं लेकिन ये मुमकिन ही नहीं है। अगर सब तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी तो 14 साल लग जाएंगे। यानि कि साल 2035 आ जाएगा।

सोनू सूद पर लगे इल्ज़ाम
सोनू सूद पर इसके बाद लोगों ने इल्ज़ाम लगाया कि वो केवल इमेज बिल्डिंग के लिए इस आपदा को अपने लिए अवसर में बदल रहे हैं। यही कारण है कि उन्हें ज़्यादा फर्क नहीं पड़ता कि किसको सच में मदद मिल रही है या नहीं।

एक बार चेक कर लेते
एक ट्विटर यूज़र ने सोनू सूद को टैग करते हुए लिखा कि जब मरीज़ 3 ही बजे मर गया था तो आप 9 बजे कैसे ट्वीट कर रहे थे कि कभी कभी रात में जगना अच्छा होता है। कम से कम ट्वीट करने से पहले चेक ही कर लेते कि मरीज़ की हालत कैसी है?

केवल रिट्वीट का खेल
इस ट्विटर यूज़र का कहना था कि उसके पास कॉल रिकॉर्ड भी हैं और ये पूरा कॉल कन्नड़ में था। तो क्या सोनू सूद का ट्विटर भी मदद के लिए नहीं और रिट्वीट के लिए ज़्यादा इस्तेमाल होता है?

PR टीम पर उछाला कीचड़
वहीं कुछ ट्विटर यूज़र ने सोनू सूद से ये भी पूछा कि वो बेड कैसे दिलवा रहे हैं, बेड तो प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लगातार दिलवा रहा है। साथ ही सोनू सूद से ये भी पूछा गया कि क्या उनकी PR टीम ने ट्वीट करने से पहले मरीज़ का हाल जाना था?

कुछ पल के लिए टूटे सोनू सूद
इतनी निगेटिव बातें पढ़ने के बाद सोनू सूद कुछ पल के लिए टूटे ज़रूर। उन्होंने अपनी तरफ से सफाई देते हुए लिखा कि इस समय उनके पास इतने मेसेज आते हैं कि हर मेसेज का जवाब देना और मदद करने में 2035 आ जाएगा।

फिर काम पर लग गए
लेकिन इस समय जितने मदद के हाथ सोनू सूद की तरफ बढ़ रहे हैं, उनके पास थक कर बैठने का और आलोचनाओं का खंडन करने का भी समय नहीं है। इसलिए सोनू सूद एक बार फिर से जुट गए हैं उसी काम में जो वो पिछले एक साल से कर रहे हैं - लोगों की मदद।

बेटे भी देते हैं साथ
गौरतलब है कि सोनू सूद की इस संस्था में उनके बेटे और पत्नी भी साथ देते हैं। इस समय सोनू सूद पूरे देश में ऑक्सीजन से लेकर बेड सप्लाई करने की कोशिश कर रहे हैं जिससे कि ऑक्सीजन की कमी के चलते कोई अपना दम ना तोड़े।

खुद भी थे पॉज़िटिव
कुछ समय पहले, अपना वैक्सीन का डोज़ लेने के बाद सोनू सूद खुद भी कोरोना पॉज़िटिव थे और उस समय उन्हें बस इतना ही मलाल था कि वो लोगों की मदद उस तरह नहीं कर पा रहे हैं जिस तरह कर सकते हैं।

लोग बुलाते हैं मसीहा
गौरतलब है कि इस समय सोनू सूद जिस युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं, लोग उन्हें सच का सुपरहीरो मान रहे हैं और उन्हें मसीहा बुला रहे हैं। इतनी मदद तो भगवान भी नहीं कर सकता जितनी तेज़ी से सोनू सूद लोगों को मदद दिलवा रहे हैं।

मिल रही है इज़्जत
सोनूू सूद को इस समय देश में हर जगह से केवल सम्मान हासिल हो रहा है। हर किसी का मानना है कि जब इतिहास में भारत का ये काला अध्याय दर्ज होगा तब उसमें सोनू सूद की सूझ बूझ और दरियादिली पर भी एक चैप्टर ज़रूर होना चाहिए।


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