कोरोना के बीच 'मजदूरों के मसीहा' बने सोनू सूद-लिखेंगे किताब, मजदूरों के दर्द और अपने संघर्ष की कहानी
कोरोना महामारी के कहर के बीच एक नाम जो लगातार सुर्खियों में बना रहा, वह है सोनू सूद। प्रवासी मजदूरों के लिए मसीहा की तरह लगातार महीनों तक काम करने वाले ये अभिनेता अब एक किताब लिखने वाले हैं। जी हां, सोनू सूद अपने अनुभवों को एक किताब का रूप देंगे। उन्होंने कहा कि वह किताब में अपने संघर्षों के दिनों के साथ-साथ लॉकडाउन के अनुभव को लिखेंगे। किताब अक्टूबर में प्रकाशित होगी।
पिछले तीन महीनों में सोनू सूद हजारों मजदूरों को घर पहुंचा चुके हैं, जबकि उनका मुहिम अभी भी जारी है। एक्टर ने मुंबई में फंसे प्रवासी मजदूरों के लिए बसों और ट्रेन का इंतजाम किया और हजारों लोगों को कर्नाटक, झारखंड, उत्तर प्रदेश के शहरों में भेजने में मदद दी। अब वह इन अनुभवों को एक किताब में समेटना चाहते हैं।

आईएएनएस से बात करते हुए सोनू सूद ने कहा,'पिछले करीब साढ़े तीन महीने एक तरीके से मेरे लिए जीवन के बदलने वाले अनुभव रहे। प्रवासियों के साथ 16 से 18 घंटे रहना और उनके दर्द को बांटना। मैं जब उनको उनके घर के लिए अलविदा कहने जाता था, तब मेरा दिल खुशियों से भर जाता था। उनके चेहरे पर मुस्कान, उनकी आखों में खुशी के आसूं, मेरे लाइफ के सबसे स्पेशल अनुभव रहे।'


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