'गुलाब गैंग' की वजह से रोशन हुआ 'गुलाबी गैंग' का चेहरा

मालूम हो कि 'गुलाबी गैंग' की पूर्व कमांडर संपत पाल ने फिल्ममेकर्स पर केस किया था कि उन्होंने बिना उनसे इजाजत लिए ही फिल्म का निर्माण कर दिया क्योंकि उनकी फिल्म 'गुलाब गैंग' उनके संगठन 'गुलाबी गैंग' पर आधारित है। हालांकि कोर्ट ने पहले तो फिल्म की रिलीज पर रोक लगा दी थी लेकिन बाद में फिल्म पर से रोक को हटा लिया गया और फिल्म रिलीज हो गयी। फिल्म को समीक्षकों ने पलकों पर बिठाया है। फिल्म की चौतरफा तारीफ हो रही है।
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फिल्म को देखकर खास तौर पर बुंदेली महिलाएं बेहद खुश हैं। 'गुलाबी गैंग' की अभिन्न सदस्य दलित महिला सुशीला का कहना है "मैंने फिल्म देखी है, वह संपत के जीवन पर नहीं, बल्कि बुंदेली महिलाओं के संघर्ष पर आधारित है और इसके प्रदर्शन पर रोक लगाना अनुचित होगा।"
इसी तरह अतर्रा ग्रामीण की दलित महिला कोदिया दाई ने कहा, "मैंने फिल्म तो नहीं देखी, लेकिन सुना है कि फिल्म हम लोगों के संघर्ष पर बनी है।" वह कहती हैं कि अगर फिल्म बनी है तो सिर्फ रुपये की गरज से संपत को अदालत नहीं जाना चाहिए।
Did You Know: 2 मार्च के बाद संपत पाल गैंग की कमांडर नहीं रहीं
महोबा जिले के रहने वाली फरीदा बेगम गुलाबी गैंग की जिला कमांडर हैं। वह कहती हैं, "फिल्म मैंने देखी है, उसमें कहीं ऐसा कोई दृश्य नहीं है, जिससे संपत की छवि धूमिल हो रही हो।" बकौल फरीदा, फिल्म में हिंसा की शिकार महिला किस तरह शोहदों (छेड़खानी करने वालों) को सबक सिखाती हैं, यह दर्शाया गया है, ऐसे दृश्य से संपत की छवि कैसे धूमिल हो रही है, समझ से परे है।
कुल मिलाकर यह कहना गलत न होगा कि माधुरी दीक्षित और जूही चावला अभिनीत फिल्म 'गुलाब गैंग' रिलीज होने से बुंदेली महिलाएं खुश हैं और संपत की याचिका पर भी सवाल उठा रही हैं।
Did You Know: 2 मार्च के बाद संपत पाल गैंग की कमांडर नहीं रहीं। संपत पाल को लेकर गुंलाबी गैंग में काफी विद्रोह हो रहा है। गैंग की सदस्यों ने संपत पाल पर खुदगर्जी का आरोप लगाया है।


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