तुलसी विरानी के बाद शारदा पांडे की बारी
“क्योंकि....." को छोडे काफी समय गुज़र चुका है. इस बीच बालाजी तथा एकता के साथ स्मृति ईरानी की मनमुटाव की काफी बातें भी आम हो चुकी हैं. साथ ही बीच में तुलसी के किरदार को अपने से अलग करने के लिए स्मृति ने कई किरदार निभाए मगर तुलसी जैसी सफलता नहीं हासिल कर पाईं. फिलहाल घर घर की “तुलसी" इन दिनों 9x पर प्रसारित होने वाले शो “मेरे अपने" में शारदा पांडे के रूप में नज़र आ रही हैं. “तुलसी" को लोकप्रिय बना चुकी स्मृति से दर्शकों की उम्मीदें काफी बढ गई है क्योंकि उनका यह किरदार तुलसी से काफी सिमिलर लग रहा है. अब ऐसे में यह सवाल उठना तो जायज़ है कि क्या स्मृति इस किरदार को तुलसी के किरदार से भुनाने की कोशिश कर रही है ?
मगर इन सवालों का खंडन करते हुए स्मृति का कहना है “जिस किरदार की आप बात कर रहे हैं उस किरदार को उस मुकाम तक पहुंचाने के लिए मैंने अपने जीवन के सात वर्ष दिए. क्या आप चाहते हैं कि जो घर मैंने बनाया है उसे खुद अपने हाथों से तोड दूं. उस किरदार के बाद बतौर निर्माता, बतौर लेखक भी मैंने काम किया है. मैं चैनल 9x के पास जब यह किरदार लेकर गई तो उनसे कहा कि मेरे मन में एक ऐसे किरदार की छवि हैं जो बाहर जुझारूं और शक्तिशाली है मगर घर में ममतामयी है. मैं हमेशा आगे बढने में विश्वास करती हूं. पीछे मुडकर देखना मेरी फितरत नहीं है.“
स्मृति भले ही पीछे मुडकर देखने में विश्वास न करती हों मगर फिर भी बालाजी आज भी अपनी पिछली तुलसी कोनहीं भुला पाएं हैं. बालाजी के लोगों का तो यहां तक कहना है कि यदि स्मृति बालाजी में दुबारा आना चाहें तो उनका स्वागत है. पिछले दिनों हुए टेली एवार्ड्स शो में एकता कपूर और स्मृति जिस तरह खुले दिल से मिली उसे देखकर इस बात के पुख्ता सबूत मिलते हैं. मगर जब तुलसी को लोकप्रिय बना चुकी स्मृति ईरानी से इस पर बात की तो उन्होंने मानों उस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा “बालाजी को मैं छोडकर नहीं आई थी. अगर वह आंगन (बालाजी) आज भी मुझे सम्मान से आमंत्रित करे तो मैं वापस जाऊंगी.“


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