'स्लमडॉग' बच्चों को ऑस्कर की आस

ये दोनों बच्चे अपनी पहली फ़िल्म को ऑस्कर पुरस्कार मिलने के प्रति आश्वस्त हैं और उत्साहित भी.
मुंबई में तेरह साल के अज़हरुद्दीन बीबीसी को बताना शुरु करते हैं कि वो ख़ास समारोह के लिए कपड़े चुनने की तैयारी करने की सोच रहे हैं, तभी रुबीना उन्हें बीच में ही टोकते हुए कहती हैं, "सोच नहीं रहे, तैयारी कर रहे हैं"
ऑस्कर की आस 'ऑस्कर तो हम जीतेंगे ही, अल्लाह करे हमारी फ़िल्म को पूरे ऑस्कर मिल जाएँ" रुबीना अली, स्लमडॉग मिलेनियर की बाल कलाकार
रुबीना को किसी बड़े फ़िल्मी सितारे की तरह, लगता है इस बात कि फ़िक्र है कि वो समारोह के लिए कैसे कपड़े चुने. क्योंकि जब उससे तैयारी के बारे में पूछा जाता है तो उसका जवाब होता है, "मैं कपड़े की तैयारियां करुंगी."
फ़िलहाल रुबीना को मालूम नहीं कि वो कब विमान में सवार होकर अमरीका के लिए रवाना होंगीं लेकिन हां, वो इस बात से बेहद ख़ुश हैं कि उन्हें वीज़ा मिल गया है.
बदल गई ज़िंदगी
मुंबई के झोपड़पट्टी में रहने वाले इन बच्चों कि ज़िंदगी ब्रितानवी निर्देशक डैनी बॉयल की फ़िल्म स्लमडॉग मिलेनियर के बाद पूरी तरह बदल गई है.
अज़हरुद्दीन की दुनिया बदली हुई है
विश्व भर में ख्याति के अलावा अब वो स्कूल जाने लगे हैं. स्लमडॉग मिलेनियर के निर्देशक डैनी बॉयल और निर्माताओं ने अज़हरुद्दीन और रुबीना कि शिक्षा की पूरी ज़िम्मेदारी ले ली है.
फ़िल्म को ऑस्कर समारोह में पुरस्कार मिलते हैं या नहीं, इसके कई लोग सट्टा लगा रहे हैं लेकिन आत्मविश्वास से लबरेज अज़हरुद्दीन कहते हैं, "हां हमलोग तो जीत जायेंगे...ऑस्कर जीत जाएँगे."
ठीक ऐसा ही आत्मविश्वास छोटी-सी रुबीना के पास भी है लेकिन साथ ही है एक दुआ भी.
रुबीना ने बीबीसी को बताया, "ऑस्कर तो हम जीतेंगे ही, अल्लाह करे हमारी फ़िल्म को पूरे ऑस्कर मिल जाएँ."
चमक-धमक भरी फिल्मी दुनिया रुबीना और अज़हर के परिवेश से एकदम अलग है लेकिन फ़िलहाल ये दोनों बच्चे इस चकाचौंध का पूरा आनंद ले रहे हैं.


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