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    कोरोना का खौफ और सिद्धांत चतुर्वेदी की दर्दनाक कविता- कोई आखिरी सांसें ले रहा है, गुजरती एम्बुलेंस Video

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    कोरोना वायरस की दूसरी लहर से देश फिर से महामारी का सामना बड़ी संख्या में कर रहा है। कोरोना के हालात फिर से ऐसे हो गए हैं कि इसे गंभीर लेते हुए कई शहरों में मिनी लॅाकडाउन लगा दिया गया है। लोगों को घर से बिना किसी जरूरी काम के नहीं निकले की कड़ी हिदायत दी गई है।

    इसके साथ अस्पताल में सुविधाओं की कमी से जु़ड़ी भी कई तरह की खबरें सामने आ रही हैं। फिल्मों की शूटिंग भी इससे विराम लग गया है। कुछ लोग शूटिंग कर भी रहे हैं तो कोरोना से जुड़ी सावधानी और कम लोगों के साथ। ऐसे में देश के इस कठिन हालात पर बॅालीवुड एक्टर सिद्धांत चतुर्वेदी ने कोरोना वायरस पर एक बेहद इमोशनल कविता लिखी है, जिसका वीडियो अपलोड किया है, जो कि काफी तेजी से वायरल हो रहा है ।

    सभी इस कविता की जमकर तारीफ भी कर रहे हैं। देश में कोरोना वायरस के बढ़ते हुए हालात पर सिद्धांत ने ये कविता लिखी है। जिसका टाइटल है गुजरती एम्बुलेंस। सिद्धांत चतुर्वेदी की इस कविता पर फरहान अख्तर और कृति सेनन ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।

    गुजरती हैं एम्बुलेंस की आवाजें,

    गुजरती हैं एम्बुलेंस की आवाजें,

    सिद्धांत खुद अपनी कविता इस वीडियो में बोलते हुए नजर आते हैं। वो कहते हैं खिड़की पर बैठते ही फिर वही गुजरती हैं एम्बुलेंस की आवाजें, हर सेकंड जैसे कोई अपना आखिरी सांसें ले रहा हो

    दिल थोड़ा सहम जाता है

    दिल थोड़ा सहम जाता है

    दिल थोड़ा सहम जाता है, भला वो गुजरता हुआ इंसान अपना भी न हो, पिछले साल की तरह इस साल शायद वो हौंसला कायम भी न हो

    जश्न मनाने की कोई वजन नहीं

    जश्न मनाने की कोई वजन नहीं

    क्योंकि जीत के पहले जो हमने जश्न मनाया था, इस बार जश्न मनाने की कोई वजह भी न हो, सोचता हूं..क्या करें...बैठे-बैठे चलो घर पे अलमारी सजाते हैं

    घटती सांसों से दूर कहीं

    घटती सांसों से दूर कहीं

    या फिर कहीं बढ़िया सी जगह छुट्टी मनाते हैं..इन घटती सांसों से दूर कहीं और हम अपनी सुकून की सांस चुराते हैं

    फिर वही गुजरती हैं एम्बुलेंस की आवाजें

    फिर वही गुजरती हैं एम्बुलेंस की आवाजें

    रोजाना बढ़ते बिस्तर की मांगों से बेफिक्र होके हम अपनी चादर फैलाते हैं,ऑनलाइन कपड़े मंगाएं, टिकट कटाएं, सूटकेस निकालों पर खिड़की पे बैठते ही फिर वही गुजरती हैं एम्बुलेंस की आवाजें

    एम्बुलेंस का रास्ता मेरे घर के नीचे से होकर जाता

    एम्बुलेंस का रास्ता मेरे घर के नीचे से होकर जाता

    ऐसा लगता है जैसे कोई अपना...दिल थोड़ा सहम तो जाता है क्योंकि उस एम्बुलेंस का रास्ता मेरे घर के नीचे से होकर जाता है

    English summary
    Siddhant chaturvedi pens down emotional poem on India corona virus situation,here read in details
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