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    'लकी हूँ कि कमल हासन की बेटी हूँ'

    By Staff
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    सिनेमा के प्रति लगाव जैसे उन्हें विरासत में मिला है. कमल हासन और सारिका की बेटी श्रुति हासन अब फ़िल्म लक के साथ अभिनय की दुनिया में किस्मत आज़मा रही हैं.

    श्रुति गायिका भी हैं और अपने पिता की नई फ़िल्म में संगीत भी दे रही हैं.

    बहुमुखी प्रतिभा वाली श्रुति हासन से बीबीसी संवाददाता वंदना ने बातचीत की:

    आपके घर में एक माहौल रहा है सिनेमा का. क्या यही वजह रही कि आपने एक्टिंग को करियर के तौर पर चुना. श्रुति एक्टर क्यों बनना चाहती है?

    मैने बहुत पहले फ़ैसला किया था कि मैं लोगों का मनोरंजन करुँगी. लोगों के सामने परफ़ॉर्म करना एक तरह का पैशन है मेरे लिए. अभिनय करना एक तरह से इसी दिशा में अगला क़दम रहा मेरे लिए.

    आपके पिता कमल हासन,वे लिविंग लेजेंड हैं. वे कितने जुड़े रहे आपके करियर से, उसे दिशा देने में.

    वे मेरा हमेशा बहुत समर्थन करते हैं. अगर मुझे किसी भी चीज़ की ज़रूरत हो तो बापूजी पहले वहाँ होते हैं. जहाँ तक करियर की बात है तो ये उन्होंने मेरे हाथों में छोड़ दिया है. वे दूसरे के करियर को दिशा देने में विश्वास नहीं रखते. उन्हें लगता है कि ये मेरी ज़िंदगी है और मुझे चीज़ों का चयन ख़ुद करना होगा.

    आप संगीत निर्देशन का काम भी करती हैं. आप कमल हासन जी की तमिल फ़िल्म में संगीत दे रही हैं जो हिंदी फिल्म ए वेनस्डे की रिमेक है. उनके साथ काम करना कितना चुनौतीपूर्ण रहा.

    इस तमिल फ़िल्म के निर्देशक और मेरे पिताजी दोनों को लगा कि फ़िल्म का आइडिया बहुत ही अलग है. इसलिए इसका संगीत भी अलग होना चाहिए जिसके लिए वैसा संगीत निर्देशक चाहिए. पापा को लगा कि मेरे ही घर में एक संगीत निर्देशक है तो वे मेरे पास आए. लेकिन उन्होंने कहा कि पहले तुम मुझे कुछ संगीत बनाकर दिखाओ जिस पर मैं विचार करूंगा. पापा और निर्देशक दोनों को संगीत पसंद आया. इस तरह मुझे ये काम मिल गया. मैं बहुत ही लकी हूँ कि मुझे ऐसे पिता मिले हैं.

    आप गायक भी हैं. लोगों ने एक झलक फ़िल्म लक में देखी जिसमें आपने गाना गाया. गायन के बारे में कुछ बताइए. किस तरह से शुरु हुआ ये सिलसिला.

    मैं बहुत सालों से गा रही हूँ. जब मैं 14 या 15 साल की थी तब मैने हिंदुस्तानी संगीत सीखना शुरु किया और तब से संगीत में बहुत रुचि ली है.

    अब आप एक्टर हैं, बहुत अच्छा गाती भी हैं, आपका रॉक बैंड भी है...दोनों में तालमेल बिठाते हुए कैसे चलेंगी.

    उतना मुश्किल नहीं है एक्टिंग और गायन में तालमेल बिठाना, दोनों काम कर सकती हूँ. मैं खुशकिस्मत हूँ कि मुझे दोनों काम करने का मौका मिला है. अगर आप वक़्त के पाबंद रहें तो सब काम हो सकते हैं.

    लक आपकी पहली बड़ी फ़िल्म है. ऑफ़र तो आपके पास बहुत आए होंगे. लक में काम करने की ख़ास वजह ?

    पहली वजह ये रही कि मेरा किरदार फ़िल्म में अच्छा है. कहानी बहुत अलग है. हालांकि सब लोग ऐसा कहते हैं कि लेकिन ये वाकई अलग है. एक और वजह रही निर्देशक सोहम शाह. वे शुरू से ही एकदम स्पष्ट थे कि फ़िल्म को कैसा बनाना है, क्या करना है. काम में इतनी स्पष्टता मुझे बहुत ही पसंद आई.

    इमरान खान के साथ आप काम रही हैं जो आपके बचपन के दोस्त हैं. जब कैमरा रोल हो जाता है, तब ये सब कितना मायने रखता है कि सामने वाला एक्टर आपका दोस्त है या आप उसे जानते हैं.

    बिल्कुल भी मायने नहीं रखता. जब कैमरा रोल होता है तो सामने वाला कलाकार आपके पिता भी हो सकते हैं, आपके दोस्त भी और हो सकता है कि आपका सबसे बड़ा दुश्मन हो. लेकिन जब शूटिंग शुरु हो जाती है तो वो सिर्फ़ एक किरदार बन जाता है.

    कमल हासन जी ने आपकी फ़िल्म लक देखी है?

    नहीं अभी तक मैने ये फ़िल्म उन्हें नहीं दिखाई है.

    श्रुति अभी शुरुआत है, कुछ रोडमैप है या कुछ दिमाग में है कि इस तरह के रोल करना पसंद करूंगी. क्योंकि एक छवि है कि हिंदी फ़िल्मों में हीरोइन को उतनी अहमियत नहीं मिलती.

    ये सब स्क्रिप्ट पर निर्भर करता है. मैने छवि के बारे में नहीं सोचा है. मैं छवि के इस झंझट में नहीं फँसना चाहती क्योंकि उससे निकलना बहुत ही मुश्किल है. अगर स्क्रिप्ट में लिखे किरदार को पढ़कर मुझे उत्सुकता हो, मुझे लगे कि इस लड़की की ज़िंदगी मैं जीना चाहती हूँ तो मैं वो फ़िल्म करूँगी. फिर वो कॉमेडी हो, रोमांस हो या फिर एक्शन हो.

    अच्छे अभिनय की आपकी परिभाषा क्या होगी?

    मैने ये सवाल बापूजी से भी पूछा था कि क्या अभिनय सीखा सकते हैं किसी को. अभिनय की परिभाषा क्या है. उन्होंने कहा कि ऐसी कोई चीज़ ही नहीं है. आप जितना महसूस कर सकें, किरदार से जुड़ सकें, उससे एक हो सकें, किरदार निभा सकें वही अभिनय है. मुझे भी लगता है कि ये महसूस करने की चीज़ है- बस अपना 100 फ़ीसदी देकर उस किरदार की भावनाओं को महसूस करना है.

    कहते हैं कि पहली बार कोई भी काम करो तो खास होता है. कैसा रहा पहली फ़िल्म लक का अनुभव, पहला शॉट, पहली बार प्रोमो में खुद को देखना टीवी पर.

    बहुत ही ज़बरदस्त अनुभव रहा. शुरुआत में तो मुझे लगा ही नहीं कि मैं पिक्चर कर रही हूँ, ऐसे ही हो गया. जैसे आपने कहा मेरा पहला शॉट, जब फ़िल्म खत्म हुई तो पहला प्रोमो...ये सब सीढ़ी है मंज़िल की ओर बढ़ने के लिए. बतौर नई अभिनेत्री बहुत उत्साह था हर दम.

    कोई ऐसी चीज़, कोई व्यक्ति जिसे आप अपने लिए लकी मानती हों.

    मेरा परिवार और मेरे दोस्त मेरे लिए बहुत लकी हैं.

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