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सत्तर के दशक का मुंबई

By Ankur Sharma
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सत्तर के दशक का मुंबई

जानी मानी लेखिका शोभा डे हाल ही में एकता कपूर की अगली फ़िल्म 'वन्स अपॉन ए टाइम इन मुंबई' के साथ बतौर सामाजिक मीडिया सलाहकार जुड़ गई हैं.

सत्तर के दशक में अंडरवर्ल्ड और बॉलीवुड के रिश्तों को बयान करती इस फ़िल्म में वो अपने अनुभव का लाभ उठाते हुए सुझाव पेश करेंगी.

इस फिल्म के निर्देशक मिलन लुथरिया हैं और इसे एकता कपूर की प्रोडक्शन कंपनी बालाजी बना रही है. फ़िल्म कुख्यात अपराधी हाजी मस्तान और अंडरव‌र्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम के जीवन पर आधारित है.

फ़िल्म के लिए बालाजी को एक ऐसे शख्स की तलाश थी जो यह सुनिश्चित कर सके कि फ़िल्म की विषय-वस्तु दर्शकों को अपनी ओर खींच सके. शोभा डे के बारे में ऐसा माना जाता है कि उनमें गहरी अंतदृष्टि है और सत्तर के दशक में तत्कालीन मुंबई शहर के माहौल को उन्होंने काफ़ी नज़दीक से समझा है. उन्होंने बाद में मुंबई शहर में इस दशक में हुए दिलचस्प और रोमांचक किस्सों के ऊपर काफ़ी लिखा भी है. शोभा इसे सेंसेश्नल सेवेंटीज़ का नाम देती हैं.

एकता कपूर के साथ अपने इस नए गठजोड़ के बारे में बीबीसी से बात करते हुए शोभा ने बताया, "एकता कपूर और मैं काफ़ी पहले से एक दूसरे के साथ काम करना चाहते थे लेकिन वो हो नहीं सका. ये फ़िल्म मुझे काफ़ी दिलचस्प लगी. सत्तर का दशक मुंबई के लिए काफ़ी ख़ास रहा है और मैं उसका एक हिस्सा रही हूं. एकता अपनी फ़िल्म के लिए एक ऐसी स्वतंत्र आवाज़ चाहतीं थीं जो उनकी फ़िल्म के लिए मददगार साबित हो सके. और मुझे उनका ये ऑफर दिलचस्प लगा. मैं इस फ़िल्म के बारे में अपने ब्लॉग और ट्विटर पर बात करूंगी."

शोभा आगे कहती हैं कि फिल्म का विषय काफ़ी दमदार है. वो कहती हैं, " इसमें अंडरवर्ल्ड को पनपते हुए दिखाया गया है और किस तरीके से गैंगवार शुरु हुईं. सत्तर-अस्सी के दशक में एक पत्रकार होने के नाते मेरा इस बारे में अपना नज़रिया है."

सत्तर के दशक के बॉलीवुड को याद करते हुए शोभा कहती हैं, "ये दशक कई मायनों में ख़ास था. जब बॉलीवुड में कुछ ऐसे दिग्गजों का राज था जिनके बाद कोई वैसा स्टारडम नहीं हासिल कर पाया. राजेश खन्ना उन दिनों अपने चरम पर थे और मुझे लगता है कि आज भी कोई उनके आसपास नहीं आ सका है. मैं उन दिनों स्टारडस्ट पत्रिका की सम्पादक थी और हम उनके बारे में लिखते थे राजेश खन्ना- द फिनोमिना. मैं दावे के साथ कह सकती हूं कि जितनी लोकप्रियता शाहरुख ख़ान, अमिताभ बच्चन और सलमान ख़ान की है उससे कहीं ज्यादा राजेश खन्ना की थी. वहीं शर्मिला टैगोर, मुमताज़ वगैरह ने भी अपनी अमिट छाप छोड़ी. ये वही दशक था जब अमिताभ बच्चन की शानदार लोकप्रियता की शुरुआत का दौर था. मुझे लगता है कि एकता ने बड़ी खूबसूरती से उस दौर को पेश करने की कोशिश की है."

फ़िल्म 'वन्स अपॉन ए टाइम इन मुंबई' में अजय देवगन, कंगना राणावत के साथ-साथ इमरान हाशमी और प्राची देसाई की मुख्य भूमिका है.

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