बॉक्स ऑफिस पर भी 'शिरीन फरहाद की तो निकल पड़ी'

फरहाद की जिंदगी का हर एक पहलू असल जिंदगी से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है। अकेले जिंदगी के 45 साल बिताने के बाद किस तरह अचानक उसकी जिंदगी में शिरीन की एंट्री होती है उसे खुद ही पता नहीं चलता। फरहाद की जिंदगी में अब तक केवल एक ही औरत रही है और वो है उसकी मां। फरहाद काम तो करता है लिंगरी शॉप में लेकिन उसकी जिंदगी के 45 सालों में कोई गर्लफ्रैंड नहीं रही।
जब एक दिन शॉप पर शिरीन से उसकी मुलाकात होती है तो उसे महसूस होता है कि बस यही उसकी जिंदगी को एक नया मकसद दे सकती है। लेकिन फरहाद की मां शिरीन को बिल्कुल पसंद नहीं करती और चाहती है कि किस तरह फरहाद भी शिरीन से दूर हो जाए। फरहाद कई बार उन दो औरतों के बीच खुद को फंसा हुआ महसूस करता है जिन्हें वो दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार करता है। और ये परिस्थितियां ही फिल्म में असली फन क्रिएट करती हैं।
बोमन इरानी ने तो पहले ही अपनी एक्टिंग प्रितभा लोगों को दिखा चुके हैं। मुन्नाभाई, 3 ईडियट जैसी फिल्मों में संजय दत्त और आमिर खान के मेन किरदार के सामने अपने किरदार को यादगार बनाकर उन्होने ये साबित कर दिया था कि छोटे से छोटे किरदा को भी अगर दिल से निभाया जाए तो बड़े किरदार भी उनके सामने फीके पड़ सकते हैं। शिरीन फरहाद की तो निकल बड़ी में एक यंग लवर की भूमिका में भी अपनी जान डाल कर बोमन ने फिल्म को एक सफल एंटरटेनर बना दिया है।
फराह खान ने तो इस फिल्म से एक्टिंग की दुनिया में पहला कदम रखा है और पहली बार में ही उन्होने अपनी एक्टिंग प्रितिभा का लोहा मनवा दिया। पहली बार के हिसाब से फराह की एक्टिंग काफी बेहतरीन रही है। शाहरुख के साथ कई रोमांटिक फिल्में का निर्देशन करने के बाद फराह को रोमांस की समझ हो गई है कि कब और कहां पर किस तरह का रोमांस करना चाहिए। रोमांटिक सीन्स करते समय बोमन भले ही थोड़ा नर्वस हुए लेकिन फराह सीन्स में काफी लुत्फ उठाती नज़र आईं।
फिल्म के गाने काफी अच्छे हैं हालांकि कोई गाना पहली बार में होंठों पर नहीं चढ़ता लेकिन इसके बावजूद फिल्म के अनुसार गाने काफी बेहतर हैं। संजय लीला भंसाली की बहन बेला की ये फिल्म है और उन्होने पहली फिल्म में ही रिस्क ना लेते हुए एक ऐसा टॉपिक चुना जो गलत नहीं हो सकता। खास तौर पर जब बोमन ईरानी जैसे बेहतरीन कलाकार के कंधो पर फिल्म का पूरा दामोदार हो।


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