मेरी जिंदगी और जेड गुडीः शिल्पा

By Staff

Shilpa Shetty
शिल्पा जेड गुडी से नहीं मिल सकी और शायद अब कभी नहीं मिल पाएगी। शिल्पा का मानना है कि जेड गुडी एक अप्रत्याशित ढंग से उसकी जिंदगी में दाखिल हुई उसके सोचने के तरीके के पूरी तरह से बदलकर रख दिया। शिल्पा ने अपने ब्लाग में इस व्यथा का जिक्र बड़े ही मार्मिक शब्दों में किया है। दैट्स हिन्दी के पाठकों के लिए प्रस्तुत है शिल्पा के ब्लाग की वह पोस्ट जो जेड को समर्पित है...

मार्च 17, 2009 - 12:00 बजे
लंदन में मुझे कुछ काम था और जेड से मिलना मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता, इसी के चलते मैंने अपने सफर को पहले से ही प्लान कर रखा था। मुझे हमेशा से यह महसूस होता रहा है कि उसका और मेरा भाग्य एक अजीब तरह से जुड़ा हुआ था। ... मुझे यकीन सा हो चला है कि ब्रिटेन में मेरी ख्याति का निर्माण करने वाली और उसकी उत्प्रेरक जेड ही थी। यह भयावह था जब उसे शो के बाद जाना पड़ा और उन हालात पर को काबू में रखने के लिए मैं चीख पड़ी थी, लेकिन व्यर्थ ही था। जिंदगी हमें फिर बिग बॉस के माध्यम से एक साथ लेकर आई, जहां दो साल बाद हम मिले और एक-दूसरे से बातें कीं... और हम दोस्ती की राह पर आगे चल पड़े... अगर मैं बिग ब्रदर वाली जेड को याद करूं तो इस बार मैंने बिल्कुल नई जेड को अपने सामने पाया था। मैंने उसकी आत्मशक्ति को सराहा और उस तरीके को जिससे वह अपनी बीमारी का सामना कर रही थी, उसकी शादी से कुछ ही दिनों पहले मैंने उससे बात भी की, वह बहुत खुश लग रही थी, अफसोस मैं उसकी खुशी में शामिल नहीं हो सकी। मैंने सोचा था कि जब मैं लौटूंगी तो उससे फिर मिलूंगी, मगर उसी वक्त मैंने उसकी बिगड़ती सेहत के बारे में सुना और उससे मुलाकात की उम्मीद में दौड़ पड़ी। मुझे लगने लगा कि पिछली बार जब मैंने उससे बातें की थीं तो शायद वह मेरी-उसकी आखिरी बातचीत थी....

इस अनुभव के बाद मुझे एहसास हुआ कि जिंदगी शिकायतों के लिए बहुत छोटी है। वो तमाम तर्क जिनकी आप विशाल तस्वीर बनाए बैठे थे कितने तुच्छ हैं... मैं एक तरह से खुश हूं कि मैं उसे अंतिम समय मे नहीं देख सकी, नहीं तो मैं एक ऐसे अवसाद में डूब जाती जिसका कोई अंत नहीं होता। मैं हमेशा उसकी मुस्कान याद रखना चाहती हूं, द फेस्टी स्ट्रांग गार्जियस जेड, ए ट्रू ट्रूपर! जितने भी वक्त तक वह जान पाती कि मैं वहां मौजूद हूं, मेरे लिए वह बहुत ही असहायता से भरा अनुभव होता। हालांकि मुझे नहीं लगता कि उसे पता लग पाता, वह अचेत होगी, तेज दवाओं के नशे में, 'क्योंकि उसका दर्द बरदाश्त की सीमा पार कर चुका है...'- उसके पब्लीसिस्ट मैक्स क्लिफर्ड ने मुझे बताया। सुनकर मुझे और तकलीफ हुई, क्योंकि अगर मैं यहां दो दिन पहले पहुंचती तो शायद उससे मिल पाती... बहरहाल मौजूदा हालात में मैं समझ सकती हूं कि उसके परिवार पर क्या गुजर रही होगी और उनकी प्राइवेसी का मैं सम्मान करती हूं और उम्मीद करती हूं कि उसके परिवार के लोग इस तकलीफ का सामना कर सकेंगे। इस घटना ने मुझे मेरे करीबी लोगों और प्रियजनों के थोड़ा और करीब ला दिया और उनकी अहमियत मेरी निगाह में और बढ़ गई, क्योंकि जीवन इतना अप्रत्याशित है.... जिंदगी एक नृत्य की तरह है... इन नृत्य के हर पल का आपको आनंद उठा लेना चाहिए... क्योंकि किसी को नहीं पता कि संगीत कब थम जाएगा... यू आर इन माई प्रेयर्स जेड... यू आर डेस्टिनीज चाइल्ड!

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