लड़कियों को बैड गर्ल बनने की सलाह दे रहीं शर्लिन
शर्लिन का कहना है कि अगर लड़कियों को सिर उठाकर जीना है तो बैड गर्ल बनना ही होगा। हम पूछना चाहते हैं कि हमारे देश में देव युग से लेकर कलयुग तक तमाम महिलाएं हुईं, जिन्हें पूजा जाता है, जिनकी वीरता की गाथाएं हम इतिहास की किताबों में पढ़ते हैं। क्या वो सिर उठाकर नहीं जीती थीं। इनकी इस बात को गलत सिद्ध करने के लिये वीरांगनाओं का यहां पर नाम गिनाना भी उनका अपमान होगा। इस बे सिर पैर के बयान से तो यही लगता है कि शर्लिन महज चीप पब्लिसिटी के लिये ऐसी बातें करती हैं।
अजब है शर्लिन के लिये बैड गर्ल की परिभाषा
शर्लिन चोपड़ा की पिछले दो-तीन साल की गतिविधियों पर नजर डालें तो वाकई में आप भी उन्हें बैड गर्ल ही कहेंगे। न्यूड तस्वीरों की झड़ी लगा देने वाली शर्लिन अपनी नग्न तस्वीरें ट्विटर-फेसबुक पर लगाने से भी नहीं कतराती हैं। किसी भी बात को यौन संबंधों और यौन क्रियाओं से जोड़कर उलटे सीधे बयान देना भी उनकी फितरत में आता है।
आम लोगों की नजर में बैड गर्ल की परिभाषा यह है कि जो लड़की शादी से पहले यौन संबंध स्थापित करे, अलग-अलग लड़कों के साथ डेटिंग पर जाये, और यह सब वो केवल मजे लेने के लिये और जिंदगी का लुत्फ उठाने के लिये करे, वो बैड गर्ल कहलाती है।
हम शर्लिन के अभिनय पर उंगली नहीं उठा रहे हैं, लेकिन एल्बम 'बैड गर्ल' के प्रोमोशन के लिये यह कहना कि लड़कियों को बैडगर्ल बनना ही होगा, बेहद गलत है। एक तरफ जहां देश की तमाम हस्तियां पश्चिमी सभ्यता से युवाओं को दूर रखने की बात कर रही हैं, वहां पर बैड गर्ल बनने की सलाह पूरी तरह समाज के विपरीत साबित होती है।


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