सिन्हा अमिताभ के आज से नहीं बहुत पुराने शत्रु हैं

ये कोई पहला मौका नहीं है जब शत्रुघन सिन्हा ने अमिताभ पर वार किया है, ये झगड़ा या यूं कहे कि रगड़ा आज से नहीं उस जमाने से चला आ रहा है जब ये दोनों जवान हुआ करते थे। दोनों ने साथ में यादगार और कामयाब फिल्में की है, जिसमें दोस्ताना, नसीब और शान का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है। लेकिन दोस्ताना फिल्म का मशहूर गीत 'बने चाहे दुश्मन जमाना हमारा, सलामत रहे दोस्ताना हमारा' भले ही पर्दे पर अमिताभ और शत्रुघन सिन्हा के दो जिस्म और एक जान होने की कहानी बयां करता हो लेकिन हकीकत में दोनों के दिलों में दूरियां तभी से और बहुत है। जिसकी भड़ास गाहे- बेगाहे निकल आती है।
ऐसा माना जाता है कि शॉटगन को हमेशा लगता था कि अमिताभ को जरूरत से ज्यादा तवज्जों दी जाती है जिसके हकदार वो कभी नहीं रहे यही कारण है कि अमिताभ तो टॉप पर पहुंच गये लेकिन शत्रुघन सिन्हा प्रतिभा संपन्न होने के बावजूद सफल तो रहे लेकिन वो मुकाम नहीं पा पायें जो अमिताभ को मिल गयी। खैर वक्त काफी आगे निकल चुका है, आज दोनों ही कलाकारों के बच्चे बॉलीवुड में नाम कमा रहे हें लेकिन आज भी शॉटगन कोई मौका नहीं छोड़ते हैं अमिताभ पर कटाक्ष करने का। हालांकि वो खुलकर कुछ नहीं कहते लेकिन उनके इशारे पूरी बात कह जाते हैं।
आपको याद होगा कि आईफा एवार्ड को लेकर भी शत्रुघन सिन्हा ने अमिताभ को टारगेट किया था। गौरतलब है कि शत्रुघन सिन्हा ने आईफा अवॉर्ड को लेकर कहा कि यह एक परिवार का अवॉर्ड समारोह है। शत्रुघन ने कहा कि इस समारोह की सूची में सभी किसी के बेटे हैं, किसी की बहू है, किसी की बीवी है। उनका इशारा अमिताभ की ओर था क्योंकि इस समारोह में 'गुरु" फेम अभिषेक, उनकी पत्नी ऐश्वर्या और अमिताभ -जया शामिल थे।
इस पर अमिताभ बच्चन ने भी शत्रुघन सिन्हा पर निशाना साधते हुए कहा था कि शत्रुघन जब मंत्री थे तो उन्होंने एक बार रवीना टंडन को नेशनल अवार्ड दिलवाने में मदद की थी, क्योंकि रवीना शत्रुघन सिन्हा की पत्नी पूनम की दोस्त हैं। शत्रुघन ने रवीना की माँ की सिफारिश पर मैकमोहन (फिल्म शोले के सांभा) को अवार्ड जूरी का सदस्य बनवाया था। उस समय शत्रु बीजेपी की सरकार में राज्य मंत्री थे। मैकमोहन रवीना के मामा थे और उन्हीं की वजह से रवीना को यह पुरस्कार मिला था।


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