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    शाहरुख के बिना करण अधूरे

    By Staff
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    शाहरुख के बिना करण अधूरे

    पूजा तिवारी

    बीबीसी संवाददाता

    बॉलीवुड के बादशाह शाहरूख खान आज अपना 44वां जन्मदिन मना रहे हैं.छोटे पर्दे से अपने कैरियर की शुरूआत करने वाले ये बादशाह आज भी लोगों के दिलों पर राज करते हैं.

    शाहरुख़ के जन्मदिन के मौके पर उन्हें बधाई देते हुए औऱ उनकी तारीफ़ करते हुए काजोल कहती हैं कि एक सुपरस्टार होने के साथ साथ वो एक बेहतरीन व्यक्ति भी हैं औऱ यही बात कहीं न कहीं स्क्रीन पर शाहरुख़ की अदाकारी में भी झलकती है औऱ लोग उन्हें इतना पसंद करते हैं.

    फ़िल्ममेकर औऱ एक्टर फ़रहान अख़्तर कहते हैं कि ‘पूरी दुनिया उन्हें प्यार करती है औऱ वो एक बेहतरीन एक्टर हैं. उनके साथ काम करने का अनुभव बहुत अच्छा रहा और मैं इंतज़ार कर रहा हूँ डॉन 2 में उनके साथ फ़िर काम करने के मौके का. वो अलग अलग तरह के रोल औऱ भाव स्क्रीन पर आसानी से औऱ बख़ूबी से दर्शाते हैं. मुझे तो उनकी सबसे अच्छी बात ये लगती है कि वो उन गिने चुने एक्टरों में से हैं जो जब स्क्रीन पर किसी से प्रेम व्यक्त करते हैं तो लगता है कि वो वाकई में अपनी हीरोईन से प्रेम करते हैं.

    फ़िल्म निर्माता औऱ निर्देशक करण जौहर ने कहा कि शाहरुख़ उनके परिवार का हिस्सा हैं औऱ उनके जीवन में शाहरुख़ की इतनी अहमियत है कि शाहरुख़ के बिना वो अधूरे हैं.

    औऱ अब कुछ बातें जो शाहरुख़ ख़ुद अपने बारे में कह चुके हैं.

    ‘बतौर एक्टर या फ़िल्म निर्माता, मैं उन्हीं फ़िल्मों के लिये हाँ कहता हूं जब मुझे लगता है कि फ़िल्म की कहानी एसी है जो लोगों को बतायी जा सकती है, थो़ड़ा एंटरटेंन करेगी, थोड़ी ख़ुशी देगी, थोड़ा नाच गाना और मज़ाक होगा औऱ जब लोग फ़िल्म देखेंगे तो उसमें कुछ घर ले जाने वाली बात होगी.’

    शाहरुख़ की फ़िटनेस का राज़ – ‘मैं खाना कम खाता हूँ, किसी बात की अति नहीं करता हूँ. मैं व्यायाम करता हुँ, मुझे इसमें बहुत विश्वास है. मुझे हॉकी, सॉकर खेलना औऱ दौड़ना भी पसंद है.

    अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए शाहरुख़ कहते हैं ‘ मैं बहुत शैतान था, मैं सारा दिन बहुत खेलता था पर मैं पढ़ाई में कभी कम नंबर नहीं लाता था. मेरे माता पिता कभी ये नहीं चाहते थे कि मैं पढ़ाई में सबसे आगे रहूं पर वो ये ज़रुर कहते थे कि मुझे पढ़ाई के लिये कभी कक्षा में शर्मिंदा नहीं होना चाहिए. तो मैं अच्छा छात्र होने के साथ साथ खेल कूद में भी कई इनाम जीतता था. मेरे अध्यापक कहते थे कि मैं अपनी मुस्कराहट से उनका दिल मोह लेता औऱ कई बार मुसीबत से बच जाता. वैसे मुझे स्कूल में अपनी शैतानीयों के लिये मार भी पड़ चुकी है औऱ एक बार तो बस सस्पेंड होते होते बचा.

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