Pics of the Day: माता - पिता की कब्र पर पहुंचे शाहरूख खान, आज भी पहनते हैं तस्वीर वाली तावीज़

शाहरूख खान जब भी दिल्ली जाते हैं, अपने माता पिता की कब्र पर फूल चढ़ाने ज़रूर जाते हैं और एक बार फिर से शाहरूख खान की ये तस्वीरें वायरल हो रही हैं। फोटोग्राफर Viral Bhayani ने भी ये तस्वीरें अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर की जहां, शाहरूख खान अपने माता पिता की कब्र पर सर झुकाते नज़र आ रहे हैं।

हालांकि, कमेंट्स में कुछ लोगों ने लिखा कि ये तस्वीरें काफी पुरानी हैं। लेकिन ये तस्वीरें इस समय तेज़ी से वायरल हो रही हैं और फैन्स इन्हें देखकर भावुक भी हो रहे हैं।

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गौरतलब है कि शाहरूख खान के पिता का निधन, 1981 में हो गया था जिसके 10 साल बाद ही उनकी मां भी चल बसीं। शाहरूख खान की डेब्यू फिल्म से कुछ समय पहले ही उनका मां का निधन हो गया था।

अपनी फिल्म रईस के प्रमोशन में शाहरूख खान ने शेयर किया कि वो अपने माता - पिता की तस्वीर वाली तावीज़ अक्सर पहनते हैं। और उन्होंने ये तावीज़ रईस में भी पहनी है। शाहरूख इसे दुआ मानते हैं।

स्वतंत्रता सेनानी थे पिता

स्वतंत्रता सेनानी थे पिता

शाहरूख खान के पिता मीर खान मोहम्मद खान, पेशावर के रहने वाले पठान थे।शाहरूख खान के पिता, स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने फ्रंटियर गांधी, खान अब्दुल ग़फ्फार खान के नेतृत्व में मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के खिलाफ चुनाव भी लड़े थे पर हार गए थे।

सबसे छोटे स्वतंत्रता सेनानी

सबसे छोटे स्वतंत्रता सेनानी

उस दौरान, शाहरूख खान के पिता केवल 16 साल के थे और सबसे छोटे स्वतंत्रा सेनानियों में उनकी गिनती होती थी। वो पेशावर से कश्मीर आ गए थे। 1947 में भारत - पाकिस्तान विभाजन से कुछ समय पहले वो पेशावर से हमेशा के लिए दिल्ली आ गए थे।

दादा जी थे अफ़ग़ानी

दादा जी थे अफ़ग़ानी

शाहरूख खान के दादा जी अफ़ग़ानी थे। उनके पिता मीर ताज मोहम्मद एक पढ़े लिखे इंसान थे जिनके पास MA LLB की डिग्री थी। उन्हें छह भाषाएं बोलने आती थीं - अंग्रेज़ी, हिंदी, पंजाबी, पश्तो, संस्कृत और पारसी। वो शाहरूख को अपने फैसले खुद लेने की आज़ादी देते थे। शाहरूख का Sense of humor उन्हें उनके पिता से मिला है।

नानी के किया था अडॉप्ट

नानी के किया था अडॉप्ट

शाहरूख खान को बचपन में उनकी नानी ने गोद ले लिया था। शाहरूख खान पांच साल तक अपनी नानी के साथ रहे थे। उस दौरान, उनकी नानी ने उनका नाम अब्दुल रहमान रखा था। शाहरूख खान पांच साल की उम्र तक नानी के साथ मैंगलोर में रहते थे।

पिता ने बुलाया शाहरूख

पिता ने बुलाया शाहरूख

इसके बाद शाहरूख खान अपने माता पिता के साथ रहने दिल्ली आ गए। उनका नाम अब्दुल रहमान कहीं भी रजिस्टर नहीं हुआ। स्कूल में दाखिले के दौरान, अब्दुल रहमान के पिता ने उनका नाम शाहरूख रखा और वो इसी नाम से जाने गए। शुरू में शाहरूख खान आर्मी जॉइन करना चाहते थे और उनकी शुरूआती तालीम आर्मी स्कूल में ही हुई।

दादाजी बड़े आदमी

दादाजी बड़े आदमी

शाहरूख खान के दादा जी जन मुहम्मद एक अफग़ानी थे। पेशावर में रहने वाले शाहरूख खान के परिवार के एक भाई मक़सूद अहमद का मानना है कि उनका परिवार हिंदक़ोवान सभ्यता से ताल्लुक रखता है।

मैंगलोर से जुड़े नाना

मैंगलोर से जुड़े नाना

वहीं शाहरूख खान के नाना इफ्तिखार मोहम्मद, मैंगलोर से ताल्लुक रखते थे। 1960 में बने मैंगलोर पोर्ट में शाहरूख खान के नाना चीफ इंजीनियर के पद पर तैनात थे।

शाहरूख खान की मां

शाहरूख खान की मां

शाहरूख खान की मां लतीफ फातिमा, उनके पिता से 10 साल छोटी थीं। फातिमा जी को दक्षिण की चारों भाषाओं पर बेहतरीन पकड़ थी।

चार बहनों में सबसे बड़ी

चार बहनों में सबसे बड़ी

शाहरूख खान की मां, आंध्र से थीं और कर्नाटक में रहीं। उनके नाना ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़े थे। उनकी मां, चार बहनों में सबसे बड़ी थीं। शाहरूख खान का जन्म 1965 में हुआ।

बीमार रहती हैं बहन शहनाज़

बीमार रहती हैं बहन शहनाज़

शाहरूख खान की बहन शहनाज़, उनके माता पिता की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाईं और तब से अकसर बीमार रहने लगीं। शाहरूख खान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी बहन MA LLB हैं और पढ़ने में बहुत तेज़ थीं। लेकिन माता - पिता को खोने के बाद वो बदल गईं।

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