24 मे शादी 27 मे विधवा, फिर शाहरुख खान के साथ दी ऐसी ब्लॉकबस्टर फिल्म जिसकी धुन पर नाचे विराट-सचिन और धोनी

शाहरुख खान की वो एक्ट्रेस, जिसने अपने दुखों से उबरने के लिए फिल्मों को अपना सहारा बनाया, और इसी रास्ते ने उनकी ज़िंदगी में एक नई रोशनी ला दी। 24 साल की उम्र में शादी कर उन्होंने एक सुखद जीवन की शुरुआत की थी, लेकिन महज 3 साल में ही उनका पूरा संसार बिखर गया। पति के निधन के बाद वह इतनी टूट गईं कि जीने की तमन्ना तक छोड़ दी थी।
'चक दे इंडिया' में विद्या मालवड़े ने भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान का किरदार निभाकर दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई। शाहरुख खान के साथ उनकी यह फिल्म उनके करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। 'चक दे इंडिया' के बाद अगर किसी प्रोजेक्ट ने विद्या को सबसे ज्यादा लोकप्रियता दिलाई, तो वो वेब सीरीज़ 'मिसमैच्ड' थी। रणविजय सिंह के साथ उनके किरदार को दर्शकों ने खूब सराहा। आज भले ही वो अपनी प्रोफेशनल लाइफ में सफलता की ऊंचाइयों पर हों, लेकिन उनकी निजी जिंदगी कई उतार-चढ़ावों से भरी रही है। महज 27 साल की उम्र में ही उनकी ज़िंदगी में ऐसा वक्त आया जब उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
विद्या मालवड़े ने साल 1997 में कैप्टन अरविंद सिंह बग्गा से अपनी पहली शादी की थी। उनके पति पेशे से पायलट थे और इंडियन एयरलाइंस में काम करते थे। वहीं, उस समय विद्या एक एयरहोस्टेस के तौर पर काम कर रही थीं। दोनों की मुलाकात इसी दौरान हुई और फिर उनकी लव मैरिज हुई। लेकिन यह खुशहाल जिंदगी ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी। साल 2000 में एक भयानक हादसे ने विद्या की पूरी दुनिया को तबाह कर दिया।
जीने की उम्मीद ही खत्म हो गई थी
14 जुलाई 2000 को पटना में इंडियन एयरलाइंस की एक फ्लाइट क्रैश हो गई, जिसके पायलट विद्या मालवड़े के पति थे। इस हादसे में उनकी जान चली गई। मात्र 27 साल की उम्र में विद्या का सुहाग उजड़ गया और वो विधवा हो गईं। पति की मौत ने उन्हें अंदर से पूरी तरह तोड़ दिया था। वह न सिर्फ अपने जीवनसाथी को खोने के गम में डूबी थीं, बल्कि समाज के तानों ने भी उन्हें गहरे ज़ख्म दिए। हालात ऐसे हो गए थे कि विद्या ने जीने की इच्छा तक छोड़ दी थी। उनकी जिंदगी पर निराशा के इतने घने बादल छा गए थे कि उन्होंने खुद को खत्म करने का मन बना लिया था।
नींद की गोलियां खाकर खत्म करना चाहती थीं जिंदगी
एक इंटरव्यू में सिद्धार्थ कन्नन से बात करते हुए एक्ट्रेस विद्या मालवड़े ने खुलासा किया था कि पहले पति की मौत के बाद वो गहरे डिप्रेशन में चली गई थीं। उस दौर में उन्होंने जीने की तमाम उम्मीदें खो दी थीं और आत्महत्या का विचार उनके मन में बार-बार आता था। एक दिन उन्होंने मेडिकल स्टोर से नींद की गोलियां खरीदीं और अपनी जिंदगी खत्म करने का फैसला कर लिया। लेकिन जैसे ही उन्होंने अपने माता-पिता का चेहरा याद किया, उनका मन बदल गया और उन्होंने खुद को रोक लिया।
मां-बाप के लिए बदला जीने का फैसला
विद्या ने बताया था, "जब मैंने अपने पापा का चेहरा देखा, तो मुझे एहसास हुआ कि जिसे मैंने खोया, वो मेरी जिंदगी का बेहद अहम हिस्सा था और मैं उससे बेइंतहा प्यार करती थी। लेकिन मैं अपने मम्मी-पापा के साथ ऐसा अन्याय नहीं कर सकती थी। अगर मैं अपनी जान ले लेती, तो उन्हें उम्रभर इस गहरे दर्द के साथ जीने के लिए मजबूर कर देती। मैं उन्हें ऐसी सजा नहीं दे सकती थी।"
एक्टिंग ने बदली जिंदगी की दिशा
मां-बाप के लिए विद्या मालवड़े ने जीवन को एक बार फिर से जीने का मौका देने का फैसला किया और नई शुरुआत की। खुद को संभालने और ज़िंदगी को दोबारा पटरी पर लाने के लिए उन्होंने मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा। मॉडलिंग में कामयाबी हासिल करने के बाद उन्होंने फिल्मों की ओर रुख किया। साल 2003 में उन्होंने फिल्म इंतेहा से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की।
प्यार को फिर एक मौका दिया
फिल्मों में काम करते हुए विद्या मालवड़े की मुलाकात निर्देशक संजय दायमा से हुई। वक्त के साथ दोनों एक-दूसरे के करीब आए और उनका रिश्ता प्यार में बदल गया। फिर दोनों ने ज्यादा देर न करते हुए शादी करने का फैसला लिया और अपने रिश्ते को एक नया नाम दे दिया।


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