जिस्म के बाजार में जिस से एक रात के लेती थी 3000 उसी से हो गया प्यार, दलदल से निकलकर बनी फिल्मों की ठकुराइन

फिल्मों में दमदार कहानियों को अपनी कलम से उतारने वाली शगुफ्ता रफीक को आज कौन नहीं जानता। वो लम्हे, आवारापन, राज, मर्डर 2, जन्नत 2 और आशिकी 2 जैसी शानदार फिल्मों के पीछे उन्हीं की कलम का जादू है। हम सब इन फिल्मों के एक्टर्स, डायरेक्टर्स और सिंगर्स को तो जानते हैं, लेकिन इस दमदार राइटर की दर्द भरी कहानी के बारे में बहुत कम लोगों को पता है।
सड़कों से लेकर बॉलीवुड तक का सफर
शगुफ्ता की जिंदगी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं है। उन्हें आज तक अपनी असली माँ के बारे में कुछ नहीं पता। उनका पालन-पोषण मशहूर एक्ट्रेस अनवरी बेगम ने किया। कुछ लोग कहते हैं कि वह अनवरी की नातिन हैं, तो कुछ कहते हैं कि वह उन्हें सड़क पर मिली थीं।
बार डांसर से राइटर तक का सफर
गरीबी की वजह से शगुफ्ता को सिर्फ 17 साल की उम्र में जिस्म के बाजार में धकेल दिया गया। उन्होंने प्राइवेट पार्टियों में नाचना शुरू कर दिया। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि इन पार्टियों का माहौल वेश्यालय जैसा होता था, जहाँ शरीफ दिखने वाले लोग भी दूसरी औरतों के साथ आते थे। इसके बाद वह दुबई चली गईं और वहाँ एक बार में डांसर के तौर पर काम करने लगीं। उन्हें एक रात के 3000 रुपये मिलते थे।
महेश भट्ट ने दिया मौका
साल 2002 में शगुफ्ता की मुलाकात महेश भट्ट से हुई। महेश भट्ट ने उनकी काबिलियत को पहचाना और उन्हें अपनी पहली फिल्म 'कलयुग' (2005) के कुछ सीन लिखने का मौका दिया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और वो लम्हे (2006) से लेकर मर्डर 2, जन्नत 2 और आशिकी 2 जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्में लिखीं। इस तरह उन्होंने अपनी मेहनत और टैलेंट के दम पर अपनी किस्मत बदल दी।


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