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    लोग डरना भी चाहते हैं: विक्रम भट्ट

    By Neha Nautiyal
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    लोग डरना भी चाहते हैं: विक्रम भट्ट

    शाश्वती सान्याल

    बीबीसी संवाददाता

    राज़ और 1920 जैसी सफल हॉरर फ़िल्मों के बाद अब निर्देशक विक्रम भट्ट तैयार हैं एक और हॉरर फ़िल्म शापित के साथ. फ़िल्म में बतौर हीरो में नज़र आएंगे गायक उदित नारायण के बेटे और टीवी एंकर आदित्य नारायण.

    आदित्य के साथ ‘शापित’ से बॉलीवुड में श्वेता अग्रवाल भी क़दम रख रही हैं. इनके अलावा राहुल देव भी एक अहम किरदार में नज़र आएंगे.

    फ़िल्म की कहानी आदित्य के किरदार अमन और श्वेता के किरदार काया के बारे में है.

    दोनों कॉलेज से एक दूसरे को चाहते हैं लेकिन जब अमन काया के सामने शादी का प्रस्ताव रखता है तब उन्हें पता चलता है कि काया के परिवार को शाप है कि उस परिवार की कोई भी लड़की शादी नहीं कर सकती और अगर वो ऐसा सोचेगी भी तो उसकी मृत्यु हो जाएगी.

    फ़िल्म की कहानी इसी बारे में है कैसे वो लड़का अपने प्यार को हासिल करने के लिए बुरी आत्मा को ढ़ूंढ के ख़त्म करने की कोशिश करता है.

    विक्रम भट्ट से ये पूछने पर कि वो केवल हॉरर फ़िल्में ही क्यों बना रहे हैं, उनका कहना था, “मैं कुछ समय तक लोगों को डराना चाहता हूं क्योंकि सभी हंसा रहे हैं या रोमांस बना रहे हैं. लेकिन लोग डरना भी चाहते हैं.”

    ऐक्टिंग का निर्णय

    आदित्य नारायण के लिए कैमरा और फ़िल्में कोई नई बात नहीं हैं. बतौर बाल कलाकार उन्होंने ‘परदेस’ और ‘जब प्यार किसी से होता है’ में काम किया और कुछ गाने भी गाए.

    इसके अलावा उन्होंने ज़ी टीवी का शो सारेगामापा का संचालन भी किया.

    वो कहते हैं कि वो हमेशा ऐक्टिंग करना चाहते थे. आदित्य कहते हैं, “क्योंकि मेरे पिता गायक हैं और मैं भी एक म्यूज़िक शो एंकर कर रहा था, शायद इसलिए लोगों की ये सोच थी कि मैं संगीत में करियर बनाऊंगा. मगर मेरे टेलीविज़न शो के बाद शायद इंडस्ट्री के लोगों ने मुझे बतौर ऐक्टर देखना शुरु किया और मुझे पहले सीज़न के बाद से ही ऐक्टिंग के ऑफ़र आने शुरु हो गए थे.”

    आदित्य ख़ुद को सिर्फ़ एक गायक नहीं बल्कि म्यूज़ियन मानते हैं.

    वो कहते हैं, “ये सिर्फ़ मेरा करियर या शौक नहीं है बल्कि मेरी जीवनशैली है.” शापित में ऐक्टिंग करने के साथ ही आदित्य नारायण ने चार गाने गाए हैं, टाइटिल गाना लिखा और कंपोज़ भी किया है.

    विक्रम भट्ट कहते हैं कि वो पहले से ही आदित्य नारायण के साथ काम करने के बारे में सोच रहे थे.

    वो कहते हैं,“मैंने आदित्य को 1920 की शूटिंग के दौरान ही साइन किया था. उनके टीवी शो की वजह से आदित्य महिलाओं में बहुत लोकप्रिय हैं. साथ ही उनकी ‘क्यूट-बॉय-नेक्स्ट-डोर’ की इमेज भी है, इसलिए मुझे वो सही लगे.”

    हालांकि आदित्य को बचपन से ही कैमरा के सामने काम करने की आदत है लेकिन फिर भी फ़िल्म की शूटिंग के पहले दिन वो बहुत नर्वस हो गए थे.

    आदित्य कहते हैं, “सेट पर पहुंचने तक मुझमें कोई झिझक नहीं थी लेकिन सेट पर पहुंचने के बाद मैं अचानक थोड़ा सा डगमगा गया. मैंने जाकर अपने बाल दिए. शायद मुझे तब अंदर कहीं पता चला होगा कि ये बहुत बड़ा क़दम है.”

    आदित्य नारायण के पिता उदित नारायण एक बेहद सफल गायक हैं. लेकिन वो कहते हैं कि मेरे पिता ने मुझसे कहा था कि अपने फ़ैसले ख़ुद लो क्योंकि उन्होंने भी अपने फ़ैसले ख़ुद ही लिए थे.

    आदित्य कहते हैं, “वो मेरे फ़ैसलों पर सवाल नहीं उठाते बल्कि मेरे फ़ैसलों का समर्थन करते हैं. वो हमेशा मुझे बढ़ावा देते हैं.”

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