बैंडिट क्वीन चाहती हैं भंवरी देवी पर बने फिल्म

उनका कहना है कि भले ही फिल्म एक साथ लाखों-करोड़ों लोगों के बीच एक साथ पहचान बनाती है, मगर इसका असर कुछ समय का ही होता है। उधर नाटक लाइव एक्टिंग का वो अंश है, जो नाटक देखने वाले गिनती के लोगों पर होता और स्थाई होता है। नाटक से मिली सीख को वह अपने जीवन में ढालता है। फिल्म बनने में तो कई साल तक लग जाते हैं और फिल्म रिलीज होने पर कलाकार खुद का किरदार पूरी तरह याद नहीं रख पाते। दर्शकों की प्रतिक्रिया भी फिल्म पूरी होने पर मिलती है, मगर स्टेज पर नाटक की प्रतिक्रिया हाथ के हाथ मिल जाती है।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि फूलन देवी द्वारा अत्याचार के खिलाफ बंदूक उठाए जाने का फैसला सही था या गलत, यह उसके साथ हुए गलत पर प्रतिक्रिया है। फूलन देवी के साथ जो हुआ अगर किसी के साथ भी हो तो शायद वह बगावत ही करेगा, मगर फिर भी बंदूक उठाना गलत है। समाज में फैले भ्रष्टाचार पर उन्होंने कहा कि इस समस्या से वह खूद जूझ रही हैं।
एक जमीन के मामले में कलेक्टर ने उससे भी रिश्वत मांगी है और काफी समय से रिश्वत नहीं देने के कारण उसका काम लटका हुआ है। भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जानी जरूरी है। भ्रष्टाचार कम होगा तो जनसंख्या कम होगी और समाज की समस्याएं कम होंगी। इस मौके पर उनके साथ नाटक के सहायक निर्देशक दौलत वैद, ध्वनि निर्देशक, बिप्लव बाराकोटी, रास कला मंच के प्रधान रवि मोहन, सचिव मनीष जोशी, हिसार निदेशक मनोज बंसल, मेकवे इंडिया के निदेशक दीपक शर्मा, प्रदीप सर्राफ, हैप्पी मूमेंट के निदेशक रमेश बंसल और मीडिया सोल्यूशन के रमेश शर्मा आदि मौजूद थे।
नाटक स्त्री पत्र का सार
उन्होंने बताया कि जगमीरा ग्रुप के बैनर तले उन्होंने रविंद्र नाथ टैगोर के द्वारा लिखी लघु कथा पर आधारित यह नाटक तैयार किया है। हिसार में मंचन के साथ ही इसके 20 शो हो जाएंगे। यह नाटक दिखाता है कि किस प्रकार औरतों को अपने ससुराल में इज्जत नहीं मिलती और ससुराल द्वारा ठुकरा दिये जाने पर उसका परिवार भी उसे नहीं समझता।
इस नाटक में औरत की लाचारी को दर्शाया गया है। छोटे पर्दे पर काम करने के बारे में सीमा ने कहा कि उनके पास बहुत से ऑफर आते हैं टीवी पर काम करने के लिए, मगर अभी वह अपना समय फिल्मों और थियेटर को देना चाहती हैं।


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