विकी कौशल - सारा अली खान की भव्य फिल्म अश्वत्थामा की शूटिंग डीटेल्स, ये होगी कहानी?
उरी द सर्जिकल स्ट्राईक के बाद आदित्य धर और विकी कौशल की जोड़ी, महाभारत काल की गाथा अश्वत्थामा की तैयारी कर रही है और फिल्म को लेकर काफी काम पूरा हो चुका है। माना जा रहा है कि फिल्म दिसंबर से फ्लोर पर जाएगी। विकी कौशल और सारा अली खान उससे पहले फिल्म के लिए अपनी तैयारी पूरी करेंगे।
खबर है कि अप्रैल से जहां विकी कौशल, घुड़सवारी की कला सीखेंगे वहीं सारा अली खान भी घुड़सवारी सीखेंगी। इसके अलावा सारा अली खान इंटेंस एक्शन सीन करती दिखेंगी। इसके लिए वो MMA और मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग ले रही हैं।

अश्वत्थामा को रॉनी स्क्रूवाला प्रोड्यूस कर रहे हैं। फिल्म में विकी कौशल अश्वत्थामा का किरदार निभाते दिखेंगे जो कि द्रोणाचार्य का पुत्र था और महाभारत की पूरी दिशा बदलने के मुख्य कारकों में से एक।
माना जा रहा है कि फिल्म में विकी कौशल एक सुपरहीरो की भूमिका में दिखाई देंगे जो 5000 साल से ज़िंदा है। जानिए कौन था अश्वत्थामा और उसकी दिलचस्प कहानी

शानदार कमाई का इंतज़ार
अश्वत्थामा की कहानी आज भी बड़ी दिलचस्प है और लोगों को हैरान कर देती है। माना जा रहा है कि आदित्य का ये प्रोजेक्ट काफी बड़े स्तर पर बन रहा है। फिल्म का बजट भी बड़ा होगा और इसे भव्य तरीके से ही बनाया जाएगा। यानि कि फिल्म आराम से 250 - 300 करोड़ की कमाई कर सकती है।

शानदार कहानी
अश्वत्थामा, महाभारत के सबसे दिलचस्प किरदारों में से एक हैं। वो द्रोणाचार्य के पुत्र हैं जिनकी मौत की खबर सुनकर द्रोणाचार्य ने महाभारत के युद्ध के बीच ही शस्त्र त्याग दिए थे। लेकिन उनके साथ छल किया गया था।

पांडवों का धोखा
दरअसल, युद्ध में अपनी स्थिति कमज़ोर देख श्रीकृष्ण ने पांडवों को कूटनीति का सहारा लेने के लिए कहा। ऐसे में युधिष्ठिर द्रोणाचार्य को ये बताने गए कि अश्वत्थामा मारा गया लेकिन नर नहीं कुंजर।

नरो वा कुंजरो वा
दरअसल, कौरवों की सेना में अश्वत्थामा का हाथी था जिसकी मृत्यु की खबर युधिष्ठिर द्रोणाचार्य को सुनाने गए लेकिन जैसे ही उन्होंने नर नहीं हाथी बोला, श्रीकृष्ण ने शंख बजाया जिसके कारण द्रोणाचार्य को कुछ सुनाई नहीं दिया।

द्रोणाचार्य का शोक
द्रोणाचार्य को लगा कि उनके बेटे अश्वत्थामा की मृत्यु हो गई और वो शोक मनाने लगे। मौके का फायदा देख, पांडवों ने द्रोणाचार्य का वध कर दिया जिनको ऐसे हारा पाना नामुमकिन था।

गुस्से में बौखलाया
अपने पिता की मौत से अश्वत्थामा बौखला गया और उसने पांडवों पर ब्रह्मास्भत्र छोड़ा जिससे अभिमन्यु की विधवा की कोख में पल रहा बच्चा खत्म हो जाता। श्रीकृष्ण ने ब्रह्मास्त्र वापस लेने का आग्रह किया जो कि अश्वत्थामा को नहीं आता।

आज भी ज़िंदा
कथाएं कहती हैं कि अश्वत्थामा आज भी ज़िंदा है और सतपुड़ा के जंगलों में घूमता है। स्थानीय लोगों की मानें तो किसी ने उसे देख लिया तो वो इंसान पागल हो जाता है।

सबसे बड़ा रहस्य
कहा जाता है कि मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में असीरगढ़ के किले में एक शिव मंदिर है जहां रोज़ सबसे पहली पूजा अश्वत्थामा करता है। इस मंदिर की शिवलिंग पर रोज़ ताज़े फूल चढ़े रहते हैं लेकिन इन्हें कौन चढ़ाता है किसी को नहीं पता।

एक और कहानी
कहा जाता है कि मध्य प्रदेश में ही जबलपुर के गौरी घाट के किनारे भी अश्वत्थामा भटकते रहते हैं। कहा जाता है कि किले के पास बने तालाब में नहाकर वो रोज़ पूजा करते हैं।

कभी नहीं सूखता तालाब
दिलचस्प ये है कि ये तालाब, भीषण गरमी में भी कभी नहीं सूखता और इसमें साल भर पानी बना रहता है।


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