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    बेटे के जन्म पर भी खुश नहीं थी समीरा रेड्डी, 105 किलो वज़न से डिप्रेशन में गईं, शेयर की कहानी

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    समीरा रेड्डी उन चंद हीरोइनों में से हैं जिन्होंने सोशल मीडिया पर हीरोइनों के हमेशा ग्लैमर और तड़क भड़क वाली चमकीली दुनिया में जीने वावली छवि बदली है। समीरा ने लोगों को अपने सोशल मीडिया के ज़रिए, हीरोइनों की असली दिक्कतें, परेशानियों और निजी जीवन की उथल पुथल से भी अवगत करवाया है।

    यही कारण है कि इस समय समीरा रेड्डी के ढेरों फॉलोअर्स हैं जो उनके बिंदास एटीट्यूड के कारण उन्हें फॉलो करते हैं। लेकिन यही समीरा रेड्डी एक वक्त में डिप्रेशन की शिकार थीं और ये वक्त तब का वक्त है जब वो पहली बार मां बनने वाली थीं।

    समीरा रेड्डी ने मदर्स डे के मौके पर humans of bombay से एक बातचीत में बताया कि किस तरह उन्होंने अपनी पहली प्रेगनेंसी और उसके बाद का समय केवल अपने डिप्रेशन से जूझते हुए निकाल दिया। यहां तक कि वो अपने बेटे के जन्म की खुशी तक अच्छे नहीं मना पाई थीं।

    पढ़िए समीरा रेड्डी का ये बेहद प्रभावशाली पोस्ट -

    सपनों की दुनिया में थीं समीरा

    सपनों की दुनिया में थीं समीरा

    जब मैं हंस के साथ प्रेगनेंट थी, मेरा बेटा, मैंने सोचा कि मैं वो पेज 3 वाली मां होंगी जो अखबारों और मैगज़ीन में पोज़ करती है। कैमरों के लिए एक परफेक्ट बेबी बंप के साथ। मां बनने को लेकर मेरी जो सोच थी वो हमेशा ग्लैमरस रही थी और इसी दुनिया के इर्द गिर्द घूमती थी। सच्चाई से बिल्कुल दूर।

    डिप्रेशन में गिरती गई

    डिप्रेशन में गिरती गई

    9 महीने बाद, मेरा वज़न 105 किलो था। जैसे ही मैंने अपने इतने प्यारे से बेटे को अपनी गोद में लिया तो भी मुझे किसी बहुत ज़्यादा खुशी का एहसास नहीं हुआ। मुझे पता भी नहीं था कि मैं प्रेगनेंसी के बाद होने वाले डिप्रेशन की ओर बढ़ चुकी थी।

    हमेशा थी बस बॉडी की चिंता

    हमेशा थी बस बॉडी की चिंता

    मेरे पति अक्षय ने सब कुछ किया। डायपर बदलने से लेकर बच्चे को खाना खिलाने तक। और मैं बैठे बैठ बस यही सोचती रहती थी कि बाकी हीरोइनें कैसे एक ही महीने में वापस अपने रूटीन में और फिट बॉडी में लौट आती हैं।

    सब साथ थे फिर भी अकेली

    सब साथ थे फिर भी अकेली

    मेरी सास ने कहा - तुम्हारा बेटा बिल्कुल स्वस्थ है। तुम्हारे पास हमेशा साथ खड़े रहने वाला पति है। तुम इतनी परेशान और दुखी क्यों हो? मेरे पास कोई जवाब नहीं था। जब मैं अस्पताल से डिस्चार्ज हुई तो खूब रोई। मैं इसलिए भी रोई क्योंकि इतने समय तक मैंने अपने बेटे हंस पर कोई ध्यान नहीं दिया।

    और भी बीमारियां

    और भी बीमारियां

    ये सब कुछ एक साल तक चला। मैं अकसर टूट जाती थी और रोने लगती थी। मैं फिल्म इंडस्ट्री से पूरी तरह से कट चुकी थी। अभी भी मेरा वज़न 105 किलो ही था। और मुझे Alopecia Areata नाम की बीमारी ने जकड़ लिया। इस बीमारी में मेरे सर से जगह जगह से बाल खाली होने लगे।

    बचपन से थीं समस्याएं

    बचपन से थीं समस्याएं

    तब मुझे समझ आया कि मेरी समस्या बहुत ही ज़्यादा गहरी है। मैंने होमियोपैथी का सहारा लिया। हमने शुरू से सारी दिक्कतों पर बात की। कैसे मैं हमेशा से एक मोटी लड़की थी। दो बेहद टैलेंट वाली बहनों के साथ बड़े होने का प्रेशर। और एक ऐसी इंडस्ट्री में होने का प्रेशर जो आपको हर मिनट आंकती है। सारी समस्याओं पर बात करते करते मुझे एकदम से लगा कि मैं एक नई इंसान बन चुकी हूं।

    यम्मी मम्मी या सेक्सी सैम?

    यम्मी मम्मी या सेक्सी सैम?

    तो दो साल तक हर जगह से गायब रहने के बाद मैंने सोशल मीडिया पर वापसी की। तब भी मुझसे पूछा जाता था - कि क्या अब आप एक yummy mummy बनेंगी या फिर वापस से पुरानी वाली sexy sam. लेकिन मैंने तय कर लिया था कि अब केवल फॉलोअर हासिल करने के चक्कर में मैं झूठी ज़िंदगी बिल्कुल नहीं जी पाऊंगी।

    सब कुछ करने की ठानी

    सब कुछ करने की ठानी

    तो मैंने अपनी समस्याओं पर बात करना शुरू किया। शुरूआत में मुझे काफी ट्रोल किया गया। मेरे लुक्स पर सवाल उठाए गए कि कैसे मैं परफेक्ट नहीं दिखती अब। लेकिन मुझे फर्क नहीं पड़ा। जब 2018 में मैं नायरा के साथ प्रेगनेंट हुई तो मैंने तय किया कि इस बार ये काम मैं अपने तरीके से करूंगी।

    महिलाओं के लिए प्रेरणा

    महिलाओं के लिए प्रेरणा

    मैं 40 साल की हो चुकी थी, डरी हुई थी, एक बार फिर से बढ़ चुकी थी लेकिन मैंने तय कर लिया था कि पिछली बार मैंने जो भी अनुभव मिस किया है वो मैं इस बार पूरा करूंगी। मैंने लगातार मू़ड बदलने के बारे में भी बात की। जब मैं 8 महीने की प्रेगनेंट ती तो मैंने अंडरवाटर बिकीनी शूट किया। तब महिलाओं ने मुझे कहा - आप हमें प्रेरणा देती हैं। और सोचिए क्या हुआ। मैंने लगभग 90 प्रतिशत पुरुष फॉलोअर्स के साथ यहां पर शुरूआत की थी लेकिन आज उनमें 70 प्रतिशत महिलाएं हैं। और ये मेरे लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं है।

    जो है मस्त है

    जो है मस्त है

    मैं अपने बच्चों से भी कहती हूं - जो भी बनना है बनो लेकिन बस अपने साथ हमेशा सच्चे रहो। खुद से झूठ मत बोलो। तो मैं भी यही कर रही हूं। मुझे याद है, एक समय ऐसा था कि मेरे underarms के नीचे थोड़ा सा भी ज़्यादा मांस लटक आए तो लोग भौंहें चढ़ा लेते थे, मैं भी परेशान हो जाती थी। लेकिन अब क्या फर्क पड़ता है। मैं 42 साल की हूं, थोड़ी गोल मटोल हूं लेकिन मस्त हूं।

    English summary
    Sameera Reddy in an interview opened about her postpartum depression when she was 105 kg and wasn't much happy even after son Hans' birth.
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