सलमान रश्दी को 'बेस्ट ऑफ बुकर'

इस पुरस्कार के लिए लोगों ने इंटरनेट पर मत डाला था.
सलमान रश्दी की पुस्तक ' द मिडनाइट्स चिल्ड्रेन ' को 1981 में बुकर पुरस्कार मिला था और ' बेस्ट ऑफ द बुकर ' के लिए सलमान रश्दी की यह पुस्तक सबसे आगे मानी जा रही थी.
रश्दी की 1988 में लिखी गई ' द सैटेनिक वर्सेस ' विवादास्पद रही थी और मुसलमानों ने इसका ख़ासा विरोध किया था और उनके ख़िलाफ फ़तवा भी जारी किया गया था. इस पुस्तक को 1993 में बुकर की 25 वीं सालगिरह पर विशेष पुरस्कार के लिए चुना गया था.
बेस्ट ऑफ द बुकर के लिए चुने जाने के बाद एक बयान जारी कर रश्दी ने कहा, '' ये बहुत बढ़िया ख़बर है. मैं बहुत प्रसन्न हूं. मैं उन सभी लोगों का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं जिन्होंने मिडनाइट चिल्ड्रेन के लिए मत दिया. ''
रश्दी इस समय अपनी नई किताब के प्रमोशन के लिए अमरीका के दौरे पर हैं और ट्रॉफी लेने लंदन नहीं आ सकेंगे.
इस पुरस्कार के पैनल प्रमुख विक्टोरिया ग्लेडिनिंग ने कहा,'' पढ़ने वालों ने खूब वोट डाले हैं और हमें विश्वास है कि उन्होंने सही फ़ैसला किया है. ''
हालांकि इस पुरस्कार की आलोचना भी हो रही है क्योंकि इसके लिए सिर्फ छह उम्मीदवारों के नाम पर ही विचार किया गया था.
इसके कारण कई पढ़ने वाले अपने पसंदीदा लेखकों के लिए वोट ही नहीं कर पाए.
जिन छह लेखकों के लिए वोट डालने थे उनमें जेएम कोएत्ज़ी, नादीन गोरडीमर, पीटर कैरी, पैट बार्कर और जेएम फारेल भी थे.
दुनिया भर के 8000 से अधिक लोगों ने इंटरनेट पर हुए सर्वेक्षण में वोट डाला जिसमें 36 प्रतिशत लोगों ने मिडनाइट चिल्ड्रेन को अपना मत दिया.
वोट करने वालों में कम से कम आधे लोग 35 साल से कम उम्र के थे.
सलमान रश्दी की मिडनाइट चिल्ड्रेन सलीम सिनाई नामक एक व्यकि की कहानी है जो आधी रात के वक्त भारत की आज़ादी के समय पैदा होता है और उसका जीवन देश की घटनाओं के तहत बदलता है.


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