200 साल पुराने पेड़ों की कटाई पर सैयामी खेर ने जताई नाराज़गी, कह डाली ये बात
Saiyami Kher: अभिनेत्री और पर्यावरण संरक्षण की समर्थक सैयामी खेर ने नासिक स्थित अपने पारिवारिक घर से लगभग 500 मीटर की दूरी पर मौजूद 200 साल पुराने पेड़ को काटे जाने पर गहरा दुख और निराशा व्यक्त की है।

सोशल मीडिया पर सैयामी ने एक भावुक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने इस बात की विडंबना पर सवाल उठाया कि बचपन में स्कूलों में हमें पर्यावरण और पेड़ों के महत्व के बारे में सिखाया जाता है, लेकिन बड़े होने पर हम उन्हीं मूल्यों को भूल जाते हैं।
उनकी यह पोस्ट लोगों के बीच तेजी से चर्चा का विषय बन गई और कई लोगों ने शहरों और कस्बों में लगातार घटते हरित क्षेत्र को लेकर अपनी चिंता जाहिर की।
अपने पोस्ट में सैयामी ने लिखा: "याद है, जब हम बच्चे थे और हमारे शिक्षक हमें पेड़ों के महत्व पर निबंध लिखवाते थे। हम पर्यावरण दिवस मनाते थे। लगता है ये सब बड़ों के सिलेबस का हिस्सा नहीं था।
तो चलिए एक काम करते हैं। जो बड़े लोग सोचते हैं कि 200 साल पुराने पेड़ों को काटना अच्छा विचार है, क्यों न उनके दफ्तर ठीक उसी जगह बना दिए जाएं जहां इन पेड़ों को काटा गया है। न छाया होगी, न एयर कंडीशनर। सिर्फ एक मेज़ और 50 डिग्री की तपती दोपहर।
ये पेड़ 200 गर्मियां झेल गए। लेकिन हमें नहीं झेल पाए।"
इस घटना पर आगे बात करते हुए सैयामी खेर ने कहा, "मेरे घर जाने वाले रास्ते पर तीन बहुत बड़े और पुराने पेड़ थे। गर्मी के दिनों में न जाने कितने लोगों ने उनकी छाया में राहत पाई होगी और बारिश शुरू होने पर उनके नीचे खड़े होकर बचाव किया होगा। लेकिन अब वे नहीं रहे। विकास के नाम पर उन्हें काट दिया गया। मुझे सबसे ज़्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि ऐसे फैसले अब सामान्य होते जा रहे हैं। हम जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, पानी की कमी और खराब होती हवा की गुणवत्ता पर लगातार चर्चा करते हैं, लेकिन उन्हीं प्राकृतिक तंत्रों को नष्ट करते रहते हैं जो हमें इन समस्याओं से बचाते हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "मुझे सबसे ज़्यादा निराशा इस बात से होती है कि हमने मान लिया है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ नहीं चल सकते। आखिर 200 साल पुराने पेड़ को बचाना प्राथमिकता की बजाय परेशानी क्यों माना जाता है? दो सदियों से खड़ा एक पेड़ सिर्फ लकड़ी और पत्तों का ढेर नहीं होता। वह इतिहास, जैव विविधता और ऐसी पारिस्थितिक संपदा को अपने भीतर समेटे होता है, जिसकी भरपाई कहीं और एक छोटा पौधा लगाकर नहीं की जा सकती।"
सैयामी ने आगे कहा, "हर गर्मी में हम बढ़ती गर्मी की शिकायत करते हैं, लेकिन फिर भी प्राकृतिक छाया और हरियाली को खत्म करते रहते हैं। हम पर्यावरण दिवस मनाते हैं, पौधारोपण अभियान चलाते हैं और बच्चों को प्रकृति का महत्व सिखाते हैं, लेकिन जब असली फैसले लेने का समय आता है, तो ये सारी सीख कहीं खो जाती है। सबसे दुखद बात यह है कि आने वाली पीढ़ियों को उन फैसलों का परिणाम भुगतना पड़ेगा, जो उन्होंने कभी लिए ही नहीं।"
अंत में सैयामी ने कहा, "मैं विकास के खिलाफ नहीं हूं। मैं समझती हूं कि शहरों का विकास जरूरी है और बुनियादी ढांचा भी महत्वपूर्ण है। लेकिन संवेदनशीलता के बिना विकास, प्रगति नहीं कहलाता। हमें बेहतर योजना, बेहतर जवाबदेही और सबसे बढ़कर प्रकृति के प्रति सच्चा सम्मान चाहिए। एक बार 200 साल पुराना पेड़ कट गया, तो फिर कोई भी पछतावा उसे वापस नहीं ला सकता। मुझे उम्मीद है कि यह घटना इस बात पर एक बड़ी चर्चा की शुरुआत बनेगी कि हम अपनी प्राकृतिक विरासत को कितना महत्व देते हैं, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।"
प्रकृति, आउटडोर खेलों और पर्यावरण जागरूकता के प्रति अपने प्रेम के लिए जानी जाने वाली सैयामी खेर अक्सर अपने मंच का उपयोग टिकाऊ जीवनशैली और जिम्मेदार पर्यावरणीय व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए करती हैं। उनकी यह नई पोस्ट एक बार फिर शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पुराने पेड़ों को बचाने की आवश्यकता पर चर्चा को तेज़ कर रही है।


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