सैफ संभालेंगे पिता की रियासत पर नहीं बनेंगे 'नवाब'

अपने पिता के बाद सैफ नवाब के तौर पर सारी जिम्मेदारियां संभालने को तैयार हैं, लेकिन वह उन्हें नवाब का की उपाधी नहीं लेना चाहते। उनका कहना है कि 'मैं नवाब का टाइटल नहीं लूंगा। मैं यह याद रखना चाहता हूं कि मेरे पिता पटौदी के आखिरी नवाब थे।'मुझे यह जिम्मेदारी पापा के निधन के 40 दिन पूरे होने के बाद पटौदी में एक आयोजन के दौरान दी जाएगी।
पटौदी के लोग 'छोटे नवाब' को 'नवाब' बनते देखने के लिए बेकरार हैं। हम आपको बता दें कि आजादी के पहले से चले आ रहे सभी राजाओं और नवाबों के अधिकार 1971 में ही खत्म कर दिए गए थे। इस तरह सैफ के पिता मंसूर अली खां पटौदी 1952 से 1971 तक आखिरी नवाब रहे। लेकिन पटौदी के लोग सैफ को अपना दसवां नवाब बनाना चाहते हैं।
पिता के बाद नए नवाब के तौर पर मिलने वाली सारी जिम्मेदारियों के बारे में सैफ का कहना है कि 'नवाब बनकर गद्दी संभालने का मतलब अपने पिता की रियासत को संभालना है। मैं कोशिश करूंगा कि पापा की तरह मैं गांव वालों की भलाई के लिए काम करूं और अब तक पापा के द्वारा चलाए जा रहे आई हॉस्पिटल और दूसरे चैरिटेबल इंस्टिट्यूशंस को मैं संभाल सकूं।


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