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प्रिय सैफ अली खान..आप जो कह रहे हैं सही है..पर अब काफी देर हो गई है

Written By: Shweta
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पिछले काफी समय से नेपोटिज्म को लेकर बहस छिड़ी हुई है। कंगना रनौत जब करण जौहर के शो कॉफी विद करण में आईं तो उन्हें नेपोटिज्म को बढ़ावा देने वाला कहा था। शो में अंत तक सबकुछ ठीक था लेकिन बाद में इस एक चिंगारी से ऐसी आग लगी जो अभी तक खत्म नहीं हुई है। इस बार आईफा 2017 में मंच पर खुलेआम करण जौहर , सैफ अली खान और वरुण धवन ने कंगना का मजाक उड़ाया।

हर किसी ने तीनों के इस एक्ट की निंदा की। इस बात को भी एक सप्ताह से अधिक हो गए। करण जौहर, वरुण धवन ने इसे लेकर माफी भी मांगी तो अब सैफ अली खान ने नेपोटिज्म पर ओपन लेटर लिखा है। हालांकि कहना गलत नहीं होगा कि सैफ अली खान ने इसे लिखने में काफी देरी कर दी है। 

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सैफ अली खान बॉलीवुड के बुद्धिजीवी एक्टर में माने जाते हैं। अगर वो इस किसी के विचारों का मंच पर मजाक उड़ाने से पहले स्टेज ये समझदारी दिखाई होती और भी बेहतर होता। चलिए ये भी छोड़िए अगर आपने इस चुटकुले के बाद उसी समय बस इतना कह दिया होता कि मजाक से हटकर हम कंगना की काफी इज्जत करते हैं तो और भी बेहतर होता। 

कंगना रनौत एक दो नहीं तीन बार नेशनल अवार्ड जीत चुकी हैं, जी हां वही नेशनल अवार्ज जो आपने खुद माना था कि आपको जानबुझकर दिया गया और आप शर्मिंदा भी थे।फिर एक नेशनल अवार्ड विनर को इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर बेइज्जती कर रहे थे वो भी उस अवार्ड शो में जो टैलेंट को अधिक महत्व देता है।  

हो सकता है कि तीनों ही स्टार्स अलग मूड में हो और उन्हें लगा हो कि बात इतनी नहीं बढ़ेगी लेकिन करण जौहर और वरुण धवन से ज्यादा आश्चर्य हर किसी को सैफ अली खान को देखकर हुआ था क्योंकि वो कभी भी इस तरह की चीजों को बढ़ावा नहीं देते। कंगना के साथ कॉफी विद करण के उस एपिसोड में भी खुद सैफ ही आए थे। 

बहरहाल आगे की स्लाइड्स पर पढ़िए अपने ओपन लेटर में सैफ अली खान ने क्या लिखा है। 

नेपोटिज्म पर सैफ का खुला खत

नेपोटिज्म पर सैफ का खुला खत

पिछले काफी दिनों से नेपोटिज्म पर हो रहे विवाद को लेकर सैफ अली खान ने एक ओपन लेटर लिखा है और कहा है कि उन्होंने आईफा 2017 में स्टेज पर नेपोटिज्म रॉक्स कहने के पीछे मंशा कंगना का मजाक उड़ाना नहीं था। डीएनए में प्रकाशित ओपन लेटर में सैफ अली खान ने लिखा है कि "पिछले काफी दिनों से काफी कुछ हो रहा है और आईफा में किए गए स्किट पर बहुत कुछ लिखा और बोला गया है। सबसे पहले ये जानते हैं कि आखिर हो क्या रहा है, "नेपोटिज्म रॉक्स" स्टेज पर सिर्फ एक मजाक था। इसमें मैं विश्वास नहीं करता हूं ।"

नेपोटिज्म पर सैफ का खुला खत

नेपोटिज्म पर सैफ का खुला खत

"ये वरूण धवन, करण जौहर और मेरे ऊपर उड़ाया गया मजाक था। ये कोई बड़ी बात नहीं थी लेकिन एक समय मुझे ऐसा लगा कि शायद मैंने कंगना का मजाक उड़ाया। मैंने कंगना को कॉल करके पर्सनली माफी मांगी। अब ये बात यहीं खत्म हो जानी चाहिए।सबको अब Chill pill करना चाहिए और मामले को खत्म करना चाहिए।हालांकि आज के इस समय में माफी ट्विटर और बाकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मांगी जाती है।वो ज्यादातर अपने फैन्स और दुनिया से माफी मांगने के लिए होता है क्योंकि आप सपोर्ट नहीं खोना चाहते। हम एक दूसरे को जन्मदिन पर मुबारकबाद या किसी बात को लेकर हमदर्दी भी ट्विटर पर जताते हैं। ये भी एक कारण है कि मैं सोशल मीडिया पर नहीं रहना चाहता- मुझे ये झूठा लगता है।"

नेपोटिज्म पर सैफ का खुला खत

नेपोटिज्म पर सैफ का खुला खत

जहां तक बात स्टेज पर कुछ मूर्खतापूर्ण हरकत की है तो मैं बिल्कुल जानता हूं कि ये पहली और आखरी बार नहीं है जब कुछ कॉमेडी करने के चक्कर में मैं कुछ वेबकूफी भरी हरकत कर बैठा। मैंने इसके लिए कंगना से माफी भी मांगी है और मुझे कंगना के अलावा किसी और को इस बात को लेकर समझाने की जरूरत नहीं है। बात खत्म हो चुकी है। कंगना रनौत के ऊपर आईफा 2017 में जोक्स बनाए गए और मुझे इस पर मीडिया का रिएक्शन समझ नहीं आ रहा। कई लोग इसपर सेंसिबल थे तो तीन रिर्पोटर ऐसे थे जिन्होंने eugenics , genetics जैसे बड़े बड़े शब्दों का इस्तेमाल किया।"

Saif Ali Khan Drags Taimur Ali while talking about NEPOTISM; Here's How | FilmiBeat
नेपोटिज्म पर सैफ का खुला खत

नेपोटिज्म पर सैफ का खुला खत

"अगर नेपोटिज्म की बात की जाए तो इसका अर्थ है फैमिली की तरफदारी करना और पक्षपाती होना। Eugenics का अर्थ होता है अच्छे परिवार में जन्म से होता है और फिल्म के संदर्भ में होता है, जीन (हम जिस डीएनए के साथ जन्म लिए हैं ना कि जो ब्लू ट्राउजर पहनते हैं)। चलिए मानते हैं कि धर्मेंद्र के बेटे या अमिताभ बच्चन के बेटे या फिर शर्मिला टैगोर के बेटे इस लाइन में आए क्योंकि लोग की दिलचस्पी होती है कि उनके बच्चे कैसे होंगे और उनके अंदर पिता का जीन (टैलेंट के अर्थ में) है या नहीं। दूसरा उदाहरण है रेस के घोड़ों को देख लीजिए। हम एक डर्बी विनर को लेते हैं और उन्हें एक अच्छे पार्टनर से मिलवाते हैं ताकि एक और नेशनल विनर घोड़ा मिल सके। जेनेटिक्स और स्टार किड्स के बीच भी यही संबंध होता है।अब शायद आप समझ गए होंगे? Elle की लड़की को मैं कहना चाहूंगा कि मुझे माफ करो लेकिन तुम्हारे eugenics शब्द नेपोटिज्म में गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया। शायद तुम्हें किताब पढ़ने की जरूरत है और तुम्हारी शब्द संग्रह मजबूत होंगे।"

नेपोटिज्म पर सैफ का खुला खत

नेपोटिज्म पर सैफ का खुला खत

"मुझे लगता है कि मीडिया नेपोटिज्म का असली प्रचारक प्रसारक हैं। वो कैसे तैमूर, शाहिद की बेटी मीशा या शाहरुख खान के बेटे अबराम को देख लीजिए। वो उनकी तस्वीरें लेते हैं और अधिक हाइप देते हैं। बच्चे के पास इसके अलावा कोई चारा नहीं रह जाता है। काफी कम उम्र से उन्हें सेलिब्रिटी स्टेट्स को संभालना पड़ता है जबकि वो इसके लायक नहीं है। वो इसके पहले कि बोलना और चलना शुरू करें इसे समझना पड़ता है"

नेपोटिज्म पर सैफ का खुला खत

नेपोटिज्म पर सैफ का खुला खत

"तो नेपोटिज्म है क्या? मेरे हिसाब से नेपोटिज्म का अर्थ है जब आप अपने परिवार के किसी सदस्य को जॉब देते हैं जबकि उसके लिए कोई और ज्यादा परफेक्ट है। लेकिन क्या फिल्मों में ये होता है? क्या लोग जब बोलते हैं कि इंडस्ट्री में नेपोटिज्म है तो उनका ये मतलब होता है? शायद कंगना का मतलब (ऐसा मुझे लग रहा है) था कि धर्मा प्रोडक्शन या यशराज फिल्म्स कंगना जैसे स्टार्स से दूर रहते हैं, जिन्होंने इंडस्ट्री में काफी मेहनत से ये मुकाम पाया है। लेकिन मुझे लगता है कि मेरा इससे कोई लेना देना नहीं है।

नेपोटिज्म पर सैफ का ओपन लेटर

नेपोटिज्म पर सैफ का ओपन लेटर

वंशवाद राजनीति में एक अनकहा सत्य है। व्यवसाय में भी ये होता है लेकिन इसके बारे में कोई बात नहीं करता। वंशवाद तब होगा जब डोनाल्ड ट्रंप अपनी बेटी तो व्हाइट हाउस में कोई पद दे दें जबकि उनकी बेटी से अधिक पढ़ा लिखा उस पद के लिए मौजूद हो। "स्टार्स को आसानी से निशाने पर लिया जाता है। जब आप कहते हो कि स्टार किड्स होने फायदे हैं, तो हां हैं बिल्कुल हैं, ये फायदा प्रेस की तरफ से उन्हें मिला है क्योंकि लोग उन्हें देखने में दिलचस्पी लेते हैं। तैमूर, सारा या इब्राहिम को लोग देखना चाहते हैं। ये सप्लाई और डिमांड की तरह है। लोग चाहते हैं और मीडिया उनकी चाह को पूरा करती है। हम सभी इस सर्किल का हिस्सा है।

नेपोटिज्म पर सैफ का ओपन लेटर

नेपोटिज्म पर सैफ का ओपन लेटर

यहां कुछ सिस्टम हैं अभिजात वर्ग, सर्वोत्तम, जो कि यह उद्योग है।सर्वश्रेष्ठ द्वारा नियोजित इसके अलावा यह योग्यता द्वारा शासित है और यह लोकतंत्र द्वारा चलता है मतलब लोगों की शक्ति।नेपोटिज्म फिल्म इंडस्ट्री में नहीं चल सकता क्योंकि यहां लोकतंत्र है। फिल्म इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा सच्चाई के साथ काम होता है। हां शायद मुझे मौका अपनी मां की वजह से मिला लेकिन लेकिन यें नेपोटिज्म से अधिक अनुवांशिक है। किसी बाहर वाले शख्स के मुकाबले ये अनुवांशिक इनवेस्टमेंट है जो प्रोड्यूसर बना रहे हैं। हो सकता है मुझे लोगों से मिलने में कम समस्या होती है। लेकिन अक्षय कुमार भी इंडस्ट्री के बाहर के हैं। जब लोग उन्हें देखते थे तो मेरी जगह उन्हें मौका मिला क्योंकि वो बिजनसमैन है और टैलेंट पहचान सकते हैं, जब हीरो अंदर आता है वो समझ जाते हैं। वो मुझे एक विशेषाधिकार प्राप्त राजकुमार के रूप में कल्पना करना चाहते हैं इसलिए कभी कभी मैं अपने पैर पीछे खींच लेता हूं।

नेपोटिज्म पर सैफ का ओपन लेटर

नेपोटिज्म पर सैफ का ओपन लेटर

"किसी भी स्टार किड के लिए कई ऐसे स्टार हैं जो फिल्म बैकग्राउंड से नहीं है। आप शाहरुख खान, श्रीदेवी, माधुरी दीक्षित-नेने, जैकी श्रॉफ..ये लिस्ट बहुत लंबी है। सबको पता है कि बॉलीवु़ड ऐसी जगह है जहां स्पॉटब्वॉय भी सुपरस्टार बन सकता है। मैं उस बेवकूफ जिसने ये उदाहरण दिया कि अर्जुन कपूर वंशवाद की वजह से हैं, मैं उसे कहना चाहूंगा कि अर्जुन ने जो भी फिल्म किया उसे लोगों ने पसंद किया है।इसे एक आदर्श के रूप लेना चाहिए ना कि नेपोटिज्म की वजह से उसे कम करके आंकना चाहिए। और यही कारण है कि वो यहां है ना कि अपने पापा और चाचा की वजह से।

नेपोटिज्म पर सैफ का खुला खत

नेपोटिज्म पर सैफ का खुला खत

ये दर्शक होते हैं जो फिल्म हिट कराते हैं ना कि परिवार के सदस्य। अंत में एक बात और बोलना चाहूंगा कि जॉनी डेप ने एक बार केट मॉस से कहा था जिसे मैं भूल गया था लेकिन अब कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने कहा था Never complain and never explain (कभी शिकायत मत करो और कभी स्पष्टीकरण मत दो) मुझे लगता है ये काफी अच्छी सलाह थी।

English summary
Saif Ali Khan writes an open letter on nepotism,
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