साहेब बीवी और गैंगस्टर रिटर्न्स- शायर ने जीती जंग

By Sonika

तिग्मांशू धूलिया की फिल्म साहेब बीवी और गैंगस्टर रिटर्न्स में माही गिल, इरफान खान और जिमी शेरगिल की एक्टिंग की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है। माही गिल ने जहां एक बार फिर से खुद को एक बेहतरीन एक्ट्रेस साबित किया है वहीं जिमी शेरगिल ने भी बहुत साल बात अपनी एक्टिंग प्रतिभा से सबको चौंका दिया है। मूंछो में साहिब बने जिमी के हिस्से में इस बार एक भी सेक्स सीन्स नहीं आए वहीं इरफान खान ने गैंगस्टर और शायर बन माही और सोहा दोनों के साथ बेड शेयर किया। माही ने अपनी जानदार और वास्तविक एक्टिंग से एक बार फिर से सभी को खुश कर दिया।

साहेब बीवी और गैंगस्टर रिटर्न्स में सोहा अली खान का जहां कुछ खास किरदार नहीं है वहीं माही ने हर एक किरदार को पीछे छोड़ दिया है। माही गिल फिल्म के पहले भाग से लेकर अंत तक ऐसी एक्टिंग की है कि लोगों का ध्यान बाकी किरदारों तक जाता ही नहीं एक अपाहिज साहेब के किरदार में जिमी शेरगिल ने एक अपाहिज व्यक्ति के जज्बातों को सिर्फ कैमरे पर उतारा ही नहीं है बल्कि उन मजबूरियों और उस दर्द को जिया है। जिमी शेरगिल का डायलॉग "आपको पता है कि मर्द ज्यादा गालियां क्यों देते हैं क्योंकि वो रो नहीं सकते।" उनके किरादार की मजबूरियों को बखूबी बयां करता है। दूसरी तरफ सोहा अली खान ने फिल्म में कोशिश तो बहुत की और इरफान खान के साथ कुछ हॉट सीन्स भी किये लेकिन फिल्म में उनका किरदार एक साइड किरदार जैसा ही लगा।

माही गिल ने एक ऐसी बीवी का किरदार निभाया है जो कि राजनीती करके खुद को पावर में रखना चाहती है। यूं तो ये किरदार फिल्म में एक शराब में डूबी हुई औरत का है लेकिन अगर इस किरदार को करीब देखिये तो आपको एक तन्हा और टूटी हुई औरत दिखेगी जो कि हर मर्द में अपने लिये एक सहारा ढूंढती है। माही गिल का किरदार डायलॉग तो बहुत बड़े-बड़े और बहुत जानदार मारता है लेकिन असल में ये सारी बातें इस किरदार की तन्हाई को बयां करते हैं। शुरुआत में माही को अपने साहेब के लिए बहुत पसेसिव दिखाया गया है। वो नहीं चाहती कि उनके साहेब कोई नुकसान पहुंचे लेकिन जब साहेब किसी और औरत यानी सोहा के करीब जाने लगे तो माही ने एक बोल्ड रुप लेना शुरु कर दिया। माही का डायलॉग "हमें हमेशा मर्द ही क्यों मिलते हैं शायर क्यों नहीं मिलते" इस बात को बताता है कि माही अपनी जिंदगी में एक शायर यानी कि एक दिल की बातों को समझने और एहसासों को दुनियादारी से ज्यादा महत्व देने वाले इंसान की जरुरत है।

माही को शराब में डूबा हुआ इसलिए दिखाया जाता है क्योंकि वो इस दुनियादारी के झंझट से दूर रहना चाहती है। इस दुनिया ने उसे बहुत दर्द दिये हैं। रही बात फिल्म में दिखाई गयी जंग की तो ये जंग तो शायर ने ही जीती। भले ही साहेब एक मर्द बनकर हमेशा जीतते रहे लेकिन वो भूल गये कि मर्द बनने से ज्यादा जरुरी रिश्तों की समझ और एहसासों का एहमियत होती है। साहेब भले ही जिंदा रहे और मकबरा नहीं बने लेकिन उनका दिल जरुर मकबरा बन चुका है। जिसमें ना जाने कितनों रिश्तों और एहसासों को दफनाया गया है।

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