कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत, देर रात किया आखिरी पोस्ट, लगाई न्याय की गुहार
राजस्थान की जानी मानी कथावाचक प्रेम बाईसा की बुधवार को संदिग्ध स्थिति में मौत हो गई। उनके पिता शाम लगभग 5:30 बजे के आसपास उन्हें निजी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। डॉक्टर्स ने उनकी जांच की लेकिन उन्हें देखते ही तुरंत उन्हें मृत घोषित कर दिया था। अस्पताल के संचालक डॉ. प्रवीण जैन ने बताया कि जब बॉडी अस्पताल पहुंची तब वह मृत थी। बता दें कि इस बात की जानकारी तुरंत ही शास्त्री नगर पुलिस थाने को दी गई।

पुलिस को जैसे ही इसकी सूचना मिली उन्हेंने बॉडी को एमडीएम अस्पताल ले जाने को कहा, लेकिन साध्वी के साथ आए लोगों उनके शव को आश्रम लेकर चले गए। जब अस्पताल ने एम्बुलेंस की व्यवस्था की तब उन्होंने शव को पर्सनल कार में ले जाने की विनती की। पुलिस यह सब देखते ही सीधे आश्रम पहुंची और साध्वी प्रेम बाईसा का कमरा सीज करवा दिया। आश्रम पहुंचते ही पुलिस ने शव को एमडीएम अस्पताल भेजा। पुलिस इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।
एसीपी छवी ने क्या कहा
एसीपी छवी शर्मा ने बताया कि पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। वहीं डॉक्टर्स के अनुसार साध्वी के पिता ने जानकारी दी थी कि उन्हें बुखार था। जिस वजह से आश्रम से ही नर्सिंग स्टाफ को बुलाकर इंजेक्शन लगवाया गया था। लेकिन कुछ देर बार ही उनके शरीर में जान ही नहीं बची।
मौत का समय और सोशल मीडिया पर पोस्ट में अंतर
दरअसल साध्वी प्रेम बाईसा के सोशल मीडिया एकाउंट पर एक पोस्ट किया गया है जिसमें वह न्याय की मांग करती नजर आईं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं। सनातन धर्म में जन्म लिया है और अंतिम सांस भी सनातन धर्म में ही ले रही हू्ं। उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने कई महात्माओं को लिखित पत्र लिखा अग्नि परीक्षा के लिए निवेदन भी लिया, लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। वहीं इस पोस्ट के आखिरी में वह लिखती हैं- अलविदा, लेकिन ईश्वर और पूज्य संत महात्माओं पर पूर्ण भरोसा है मेरे जीते जी नहीं तो जाने के बाद न्याय मिलेगा।
सूत्रों की मानें तो साध्वी की मौत लगभग 5:30 बजे के आसपास हो गई थी, लेकिन इंस्टाग्राम पोस्ट रात के करीब 9:28 के आसपास किया गया है। दोनों के समय में अंतर होने की वजह से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।


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