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    सात ख़ून माफ़- दमदार संगीत

    By Bbc
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    पवन झा, संगीत समीक्षक

    बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

    प्रियंका चोपड़ा अभिनीत इस फ़िल्म के निर्देशक और संगीतकार विशाल भारद्वाज हैं.

    संगीतकार विशाल और गीतकार गुलज़ार की जोड़ी इस दौर के फ़िल्म संगीत में एक ख़ास स्थान रखती है. और इस जोड़ी की हर नई फ़िल्म के संगीत का इंतज़ार सुननेवालों को हमेशा रहता है.

    ये टीम भी फ़िल्म दर फ़िल्म सुनने वालों की अपेक्षा पर खरी उतरी है. खासकर जब फ़िल्म खुद विशाल निर्देशित हो, तो उसके बारे में उम्मीदें बढ़ जाती हैं.

    उनकी नई फ़िल्म 'सात ख़ून माफ़' रस्किन बाँड की कहानी "सुज़ाना'स सेवन हसबैंड्स" पर आधारित है. फ़िल्म का संगीत इन दिनों काफ़ी लोकप्रिय हो रहा है.

    एलबम में कुल नौ ट्रैक्स हैं जो फ़िल्म की नायिका प्रियंका चोपड़ा और अलग अलग उम्र और बैकग्राउंड के किरदारों से उनके रिश्तों की दास्तां के रंग समेटे हुए हैं.

    गीतकार गुलज़ार ने एक बार फिर बेहतरीन गाने लिखे हैं.

    'डार्लिंग' एलबम को एक ज़बरदस्त शुरुआत देता है. 150 साल पुराने रशियन फ़ोक 'कलिंका' को आधार बना कर विशाल ने एक मस्ती भरा, थिरकाने वाला पार्टी गीत रचा है, जो पहली बार में ही सुनने वाले को सम्मोहित करने की क्षमता रखता है.

    गीत की सबसे ख़ास बात रेखा भारद्वाज और उषा उत्थुप की गायकी है जो गीत की मस्ती को अपने अंदाज़ से नया रंग देती हैं. गुलज़ार के शब्द ("पब्लिक में सनसनी एक बार करने दो") गीत के मज़ेदार माहौल को बरक़रार रखते हैं साथ ही ("बैकैफ़ है बहारां.. बुलबुलों को अभी इंतज़ार करने दो") अपने काव्यात्मक मूल्य भी बनाए रखते हैं.

    'बेकरां' एलबम का अगला गीत है जिसमें विशाल का संगीत और गुलज़ार के शब्द, एक अलग ही वातावरण गढ़ते हैं. गीत फ़िल्म में इरफ़ान खान पर फ़िल्माया गया है जो एक शायर का किरदार निभा रहे हैं और उनके किरदार के मुताबिक ही गीत शायराना मिजाज़ का बन पड़ा है.

    विशाल भारद्वाज की पत्नी रेखा भारद्वाज की आवाज़ फ़िल्म के गानों की सबसे ख़ास बात है.

    शायरी के साथ विशाल की आवाज़ गीत को ज़रूरी रोमांटिक माहौल बखूबी देती है खासकर 'लिल्लाह' से. आज के शोर शराबे से भरे संगीत के दौर में 'बेकरां' जैसे रोमांटिक गीत को सुनना बहुत सुकून देता है.

    एक और बिलकुल अलग रंग का गीत है केके का गाया 'ओह मामा', जो रॉक स्टार बने जॉन अब्राहम पर फ़िल्माया गया है और किरदार के मुताबिक ही रॉक फ़्लेवर लिये हुए है.

    विशाल ने अपनें संगीत में रॉक म्यूज़िक का बेहतरीन इस्तेमाल अनुराग कश्यप की अप्रदर्शित फ़िल्म 'पाँच' के संगीत में किया था और 'ओह मामा' पर 'पाँच' के 'सर झुका ख़ुदा हूं मैं' का प्रभाव पूरी तरह से देखा जा सकता है.

    'आवारा' फ़िल्म का थीम साँग कहा जा सकता है. गुलज़ार के शब्द प्रियंका के किरदार को और उसकी एक के बाद एक शादियों को 'आवारा सूखे पत्ते' से सांकेतिक रूप से जोड़ते हैं.

    विशाल ने इस गीत में नये गायक मास्टर सलीम को मौका दिया है जो गीत को निभा तो गए हैं मगर कहीं ना कहीं राहत फ़तेह अली या दलेर मेहंदी की कमी का अहसास दिलाते हैं. ये दोनों गायक शायद इस किस्म के गीत को और ऊंचाई प्रदान कर सकते थे।

    'डार्लिंग' गाने में उषा उत्थुप की आवाज़ असर पैदा करती है.

    'दिल दिल है' एक और रॉक फ़्लेवर का गीत है सूरज जगन की आवाज़ में. ये फ़िल्म के अन्य गीतों के स्तर तक नहीं पहुंच पाया है.

    'डार्लिंग' गीत एलबम में एक और अवतार में है 'दूसरी डार्लिंग' के नाम से. विशाल ने मुखड़े और अंतरे के ताल में अंतर कर गीत को अलग असर दिया है.

    'तेरे लिए' सुरेश वाडेकर की आवाज़ में मासूम उदासी लिए एक ख़ूबसूरत गीत है. विशाल का धीमा मधुर संगीत, सुरेश वाडेकर की मखमली आवाज़ और गुलज़ार के शब्द एक मधुर रचना बुनने में कामयाब रहे हैं जिसकी कमी आजकल के संगीत में बहुत महसूस की जाती है.

    एलबम की अंतिम रचना येशू रहस्यवादी चोला ओढ़े प्रार्थना है जिसे रेखा भारद्वाज की गायकी से असर मिला है. विशाल का संगीत और रेखा के स्वर इसे अन्य फ़िल्मी प्रार्थनाओं से काफ़ी अलग रंग देते हैं. पहली बार में गीत इतना असर नहीं छोड़ता है कुछ बार सुनने के बाद इसमें दिलचस्पी बढ़ती है.

    'सात ख़ून माफ़' के संगीत को पवन झा देते हैं पांच में से चार नंबर.

    कुल मिला कर 'सात ख़ून माफ़' का संगीत सुनने वालों की अपेक्षा पर खरा उतरता नज़र आया है. विशाल ने सभी गीत फ़िल्म की थीम के मुताबिक रचे हैं और गुलज़ार के शब्द भी उतनी ही ख़ूबसूरती से गीत के मूड को उभारने में सहायक रहे हैं.

    रेखा भारद्वाज की गायकी इस एलबम की सबसे ख़ास बात कही जा सकती है. साथ ही उषा उत्थुप के सहयोगी स्वर असर बढ़ाने में कारगर साबित हुए हैं.

    एलबम में जहां एक ओर डार्लिंग और -'ऒह मामा' जैसे लोकप्रिय होने वाले गीत हैं वहीं 'बेकरां' और 'तेरे लिए' जैसी मधुर काव्य रचनाएं भी हैं. शब्दों, गायकी और संगीत तीनों ही स्तर पर एलबम खरा उतरा है।

    'सात ख़ून माफ़' के संगीत को नम्बरों के लिहाज से पाँच में से चार नंबर.

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