नष्ट हो रही हैं ऋत्विक घटक की फिल्में
देश के महान फिल्मकार ऋत्विक घटक की फिल्में नष्ट हो रही हैं. पिछले दिनों एक अंग्रेजी पत्रिका में छपे एक लेख के जरिए पारथा चैटर्जी ने इस विडंबना की ओर ध्यान दिलाया है.
उल्लेखनीय है कि अपने जीवन काल में असफलताओं का सामना करने वाले घटक का नाम आज दुनिया के महानतम फिल्मकारों में लिया जाता है. उन्होंने सुवर्ण रेखा, अजांत्रिक, जुक्ति, तर्क और गल्प तथा मेघे ढाका तारा जैसी फिल्में बनाईं, जिन्हें बिना शक दुनिया की बेहतरीन फिल्मों में शामिल किया जा सकता है.
चैटर्जी ने अपने लेख में ऋत्विक घटक मेमोरियल ट्रस्ट की बदहाल हालत की तरफ ध्यान दिलाया है. उनका कहना है कि कार्यालय में घटक के चलचित्र लापरवाही से पड़े हैं. कोलकाता की बारिश के कारण इनके खराब होने का अंदेशा है.
उन्होंने इस विडंबना की ओर भी ध्यान दिलाया है कि सत्यजीत रे की फिल्मों का कुछ लोगों तथा निजी संस्थाओं की बदौलत बेहतर तरीके से संरक्षण किया जा रहा है.
उल्लेखनीय है कि रे खुद घटक को एक श्रेष्ठ फिल्मकार मानते थे. खास तौर पर उनकी मौलिकता भरी शैली के वे काफी प्रशंसक थे और उनको दुनिया के महान फिल्मकारों की श्रेणी में रखते थे.


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