For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS  
For Daily Alerts

    अब कैमरे के सामने हैं ऋतुपर्णो घोष

    By Staff
    |

    पीएम तिवारी

    कोलकाता से

    अब तक कैमरे के पीछे रहने वाले जाने-माने फ़िल्मकार ऋतुपर्णो घोष पहली बार कैमरे के सामने हैं.

    वे अभिनेता के तौर पर कौशिक गांगुली की बांग्ला फिल्म 'छाया छवि' में एक समलैंगिक फ़िल्म निर्माता की भूमिका रहे हैं. लेकिन घोष कहते हैं कि यह उनके असली जीवन की कहानी नहीं है.

    ऋतुपर्णो कहते हैं कि समलैंगिकता पर दिल्ली हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद यह इस विषय पर बनने वाली पहली फ़िल्म होगी. उनकी इस फ़िल्म की शूटिंग अगले महीने शुरू हो रही है.

    घोष के मुताबिक, "अभिनय के प्रति मेरी खास दिलचस्पी नहीं थी. शेखर कपूर ने बहुत पहले मुझे एक भूमिका का प्रस्ताव दिया था. लेकिन मैने इंकार कर दिया था. अब मुझे तो नियमित तौर पर कोई भूमिका मिलेगी नहीं. और जो मिलेगी भी वह इसी तरह की. लेकिन मैंने जब इस फिल्म की कहानी सुनी तो लगा कि समलैंगिकता पर ऐसी फिल्म बनाई जानी चाहिए."

    वे कहते हैं कि उनमें और इस फ़िल्म में उनके चरित्र में कोई समानता नहीं है. इसलिए इस भूमिका के लिए घोष को कई तरह के बदलावों से गुजरना पड़ा.

    उन्होंने अपना वज़न तो घटाया ही, सिगरेट पीना भी सीखा. इसके अलावा उन्होंने सब्ज़ियाँ काटना, फर्श पर पोंछा लगाना और नाचना भी सीखा है. फिल्म में वे यह सब करते नज़र आएंगे.

    ऋतुपर्णो मानते हैं कि हमारी सोच मर्द और औरत के बीच इस कदर बंटी है कि इसके अलावा हम किसी दूसरी संभावना के बारे में सोच भी नहीं सकते.

    फ़िल्म में अपनी भूमिका के बारे वे बताते हैं, "मैं समलैंगिक की भूमिका में हूँ. इसमें एक बाइसेक्सुअल पार्टनर भी है. लेकिन यह समलैंगिकों की प्रेम कहानी नहीं है."

    समलैंगिक किरदार

    इस फ़िल्म के भीतर एक और फिल्म है. अभिनेता पर डॉक्यूमेंट्री बनाते समय फिल्मकार अपनी कल्पना में उस अभिनेता का जीवन जीने लगता है.

    घोष का कहना है, "लोग भले सोचते हों कि समलैंगिक की भूमिका निभाना बहुत आसान है. लेकिन हकीकत यह है कि कोई भी यह भूमिका उस तरीके से नहीं निभा सकता था जिस तरह मैं निभा रहा हूँ".

    समलैंगिकता पर अदालती फैसले का ज़िक्र करते हुए वे कहते हैं कि यह महज संयोग है.

    इस फ़ैसले के बाद बनने वाली पहली फ़िल्म होने के नाते यह ऐतिहासिक होगी. इस फिल्म में उनके बाइसेक्सुअल पार्टनर की भूमिका के लिए कोलकाता या मुंबई में कोई अभिनेता सहमत नहीं हुआ.

    इन लोगों को डर था कि लोग कहीं उन्हें असली ज़िंदगी में भी ऐसा ही न समझ बैठें.जबकि यही लोग 'मिल्क' में शॉन पेन के समलैंगिक चरित्र की सराहना करते नहीं थकते थे. घोष कहते हैं कि अभिनय के प्रति ऐसा कोई पूर्वाग्रह नहीं होना चाहिए.

    एक सवाल के जवाब में घोष बताते हैं कि इस फिल्म में फिल्मकार ऋतुपर्णो घोष कहीं हावी नहीं हैं. और वे एक आज्ञाकारी अभिनेता की तरह अपने निर्देशक की बातों को पूरे ध्यान से सुनते हैं.

    फिल्मकार कौशिक गांगुली बताते हैं कि इस भूमिका के लिए ऋतुपर्णो का चुनाव महज़ एक संयोग था.

    वे कहते हैं, "मैंने उनको कहानी सुनाई थी. उसके बाद उन्होंने पूछा कि क्या मैंने फिल्मकार की भूमिका के लिए किसी अभिनेता के बारे में सोचा है. मैंने कहा कि नहीं. मैंने उनसे सवाल किया कि क्या वे यह भूमिका करना चाहेंगे. ऋतुदा ने थोड़ी देर सोचने के बाद हामी भर दी. इस भूमिका के लिए उनसे बेहतर कोई हो ही नहीं सकता था."

    गांगुली कहते हैं कि ऋतुदा इस भूमिका पर इतनी मेहनत कर रहे हैं कि उन्होंने इसके लिए अपनी फिल्मों को आगे बढ़ा दिया है. ऋतुदा और फिल्म में उनके चरित्र में एक ही समानता है- वह यह कि दोनों फिल्मकार हैं.

    रहें फिल्म इंडस्ट्री की हर खबर से अपडेट और पाएं मूवी रिव्यूज - Filmibeat Hindi

    Notification Settings X
    Time Settings
    Done
    Clear Notification X
    Do you want to clear all the notifications from your inbox?
    Settings X
    X
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Filmibeat sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Filmibeat website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more