नेपोटिज्म से लेकर सुशांत संग दोस्ती पर बोलीं ऋचा चड्ढा, "स्टारकिड्स से नहीं है मुझे नफरत"
यहाँ इक खिलौना है
इन्सां की हस्ती
ये बस्ती है मुर्दा-परस्तों की बस्ती
यहाँ पर तो जीवन से है मौत सस्ती
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है
इन पंक्तियों के साथ एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा ने अपने लेख की शुरुआत की। एक्ट्रेस ने अपने दोस्त सुशांत और मौजूदा माहौल के लिए लंबा ब्लॉग लिखा। जहां उन्होंने नेपोटिज्म से लेकर बॉलीवुड के तमाम मुद्दों पर अपनी बात रखी। ऋचा लिखती है, साहिर लुधयानवी के शब्द इन दिनों मेरे कानों में गूंज रहे हैं। मेरे दोस्त सुशांत के जाने के बाद लगातार नेपोटिज्म की बहस जारी है। लेकिन ये बहस कितनी भी की जाए कम ही है। लेकिन ये माहौल किसी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य के लिए कुछ ठीक नहीं।
ऐसा कहा जा रहा है कि इंडस्ट्री दो भागों में बंट गई है, इनसाइडर और आउटसाइडर। मेरा मानना है कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री और पूरा इको-सिस्टम ही अच्छे और बुरे व्यवहार पर आधारित है। मैंने भी यहां काफी समय गुजारा है। मेरे मानना है कि इंडस्ट्री एक फूड चेन की तरह है। लोग भी कम बदमाश नहीं, जब उन्हें लगता है कि वह अब खुद इस राह में चल सकते हैं तो वह अपनों का साथ छोड़ देते हैं।
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