'संपूर्ण अभिनेत्री' हैं रेखा

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रेखा अपनी युवावस्था में काफी मोटी थीं लेकिन बाद में वह खूबसूरत और छरहरी काया वाली अभिनेत्री में बदल गई थीं। नई अभिनेत्रियां आज भी उनसे प्रेरणा लेती हैं।
फिल्मकार मुजफ्फर अली ने, "वह स्वप्नदृष्टा हैं.. वह अपनी ही दुनिया में रहती हैं। वह कई ऐसी चीजों की कल्पना कर लेती हैं जो एक अभिनेत्री के नाते उनके मानस को जंचती हैं। वह बहुत ईमानदार, सुशील और बेहद संवेदनशील हैं। वह हमेशा कुछ सीखने के लिए तत्पर रहती हैं। उनके साथ काम करने का बहुत अद्भुत अनुभव रहा है। वह संपूर्ण अभिनेत्री हैं।"
दक्षिण के अभिनेता जेमिनी गणेशन की बेटी रेखा ने अपनी पहली ही फिल्म 'सावन भादों' (1970) में सफलता हासिल कर ली थी। मुजफ्फर अली की फिल्म 'उमराव जान' (1981) के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था।
उन्होंने 150 से अधिक फिल्मों में काम किया है। 'दो अनजाने' (1976), 'घर' (1978), 'मुक्कदर का सिकंदर' (1978), 'खूबसूरत' (1980), 'सिलसिला' (1981), 'बसेरा' (1981), 'उत्सव' (1984), 'खून भरी मांग' (1988), 'इजाजत' (1988), 'कामसूत्र' (1996), 'जुबैदा' (2001) जैसी फिल्मों में उनके अभिनय के विविध रूप देखने को मिले।
अंतिम बार वह बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान अभिनीत फिल्म 'ओम शांति ओम' (2007) में नजर आई थीं।
प्रसिद्ध फिल्म इतिहासकार गौतम कौल का कहना है, "रेखा स्वीडन की अभिनेत्री ग्रीटा गार्बो जैसी हैं। ये दोनों ही अभिनेत्रियां समान पृष्ठभूमि से आई थीं और दोनों ने फिल्म जगत की ऊंचाईयों को छूआ।"
फिल्म अभिनेत्री राखी कहती हैं, "उनकी नाक और आंखें बहुत खूबसूरत हैं और सबसे अच्छी बात यह है कि वह हमेशा अपना मेकअप खुद करती हैं। मैं उन्हें प्यार करती हूं और उनकी प्रशंसा करती हूं। मुझे लगता है कि 'मेडम तुसाद' के 'मोम संग्रहालय' में उनकी मोम की मूर्ति जरूर होना चाहिए।"
चर्चा है कि रेखा अपनी आत्मकथा लिख रही हैं और वह 'क्रिश' श्रेणी की अगली फिल्म में भी नजर आएंगी।


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