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राजकपूर-दिलीप जैसे रिफ्यूजियों ने बढ़ायी भारत की आन-बान-शान

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आपने शरणार्थियों के बारे में सुना तो जरुर होगा जिन्हें हम अप्रवासी भी कहते हैं। भारत सदैव ही शरणार्थियों का गढ रहा है चाहे बात आजादी से पहले की करें या आजादी के बाद की यहां बड़ी संख्या में अप्रवासियों का आवागमन होता ही रहा है।

फिर चाहे कारण रोजगार की तलाश हो शरण पाना हो या एक बेहतर जिन्दगी की कामना हो. आज हम आपको ऐसे ही कुछ खास शरणार्थियों के बारे में बताएंगे जिनका सम्मान न केवल भारत करता है बल्कि दूसरे देशों में भी उनका नाम काफी इज्जत से लिया जाता है। यह वो शरणार्थी हैं जिन्होंने भारत को विश्व में प्रसिद्धि दिलाई ऑर अपनी योग्यता से देश को सदैव गौरवान्वित किया है।

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शुरूआत बॉलीवुड से ही करते हैं, इसलिए रिफ्यूजी लिस्ट में सबसे पहला नाम लेते हैं बॉलीवुड के पहले शो मैन राजकपूर का। जिनके बारे में हर कोई जानता है कि वो कितने महान कलाकार थे। भारतीय सिनेमा को केवल भारतीय पटल पर ही नहीं बल्कि विदेशी पटल पर एक नई पहचान दी। रोम के लोग तो राज कपूर के दीवाने थे। कहा जाता है कि रोम में सबसे ज्यादा राज कपूर की फिल्में देखी जाती थीं।

लोगों को राजकपूर के अंदर चार्ली-चैपलिन नजर आता था, इसमें किसी को शक नहीं कि राजकपूर ने हिंदी सिनेमा को अपने बूते एक नई गति और एक नई सोच का पैमाना दिया। राजकपूर ने ही पहली बार पर्दे पर टीन एज को लांच किया और उन्होंने ही मोहब्बत की एक नई तस्वीर फिल्मी कैनवस पर अंकित की। राजकपूर जैसे और भी रिफ्यूजी हैं जिन्होंने भारत का सिर विश्वपटल पर ऊंचा किया है।

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राज कपूर

राज कपूर

राज कपूर का नाम कौन नहीं जानता हिन्दी सिनेमा के बादशाह। भारत के चार्ली चैपलेन राजकपूर साहब जिन्हें शो मैन कहा जाता है, जिन्होंने भारतीय सिनेमा को बुलंदियों पर पहुंचाया। न जाने कितनी बेहतरीन फिल्में दर्शकों के नाम की, न केवल एक अदाकार के रुप में बल्कि एक निर्देशक के रुप में भी इन्होंने हिन्दी सिनेमा को नयी ऑर कामयाब राह सुझाई। महज़ 24 साल की उम्र में आर.के स्टूडियों की स्थापना की ऐसे लेजेंट राज कपूर एक शरणार्थी थे। जिनका जन्म हुआ 14 दिसंबर 1924 को पेशावर में हुआ जो कि विभाजन के बाद अब पाकिस्तान में है. इनके माता पिता हिंदु ऑर पठान थे। आइएमजीसी ग्लोबल इंटरटेनमेंट ने खैबर पख्तूनख्वा सरकार के समर्थन से राज जी के पेशावर स्थित खानदानी घर को एक प्रसिद्ध संग्राहलय के रुप में तब्दील कर दिया है।

दिलीप कुमार

दिलीप कुमार

दूसरा नाम है दिलीप कुमार का। सबसे ज्यादा अवार्ड पाने वाले (जो कि गिनीज वर्ड रिकोर्ड में भी शामिल है) भारतीय अभिनेता दिलीप जी का जन्म 11 दिसंबर 1922 को पेशावर में हुआ। भारत में जब शरणार्थी के रुप में दिलीप जी आए तब इनका नाम यूसुफ खान था जिसे बाद में बदल दिया गया. दिलीप जी पृरे विश्व में ट्रेजडी किंग के रुप में विख्यात हुए। मुगल ए आज़म जैसी कई एवरग्रीन फिल्में देने वाले दिलीप कुमार भारत की शान हैं। इन्हें पाकिस्तान सरकार की तरफ से भी कई नामचीन पुरस्कार मिले उनमें से एक था 1997 में मिला निशान ए इम्तिआज़. 1955 1956 ऑर 1957 में लगातार इन्हें फिल्म फेयर के सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के रुप में नवाज़ा गया। सरकार की योजना है कि दिलीप जी के पेशावर वाले घर को विरासत स्थल के के रुप में तब्दील किया जाये।

सुचित्रा सेन

सुचित्रा सेन

यह तीसरी ऐसी हस्ती हैं जो भारत में अप्रवासी होते हुए भी भारत के लिए गर्व का कारण बनीं। यह वो पहली भारतीय अभिनेत्री हैं जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, मास्को फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का सम्मान मिला।

इनका जन्म 6 अप्रैल 1931 को सेन भंगा वारी गांव बेलकुछी उपज़िला कारण बनीं. मशहूर बंगाली फिल्म अभिनेत्री सुचित्रा जी बंगाली सिनेमा का बहुमूल्य रत्न हैं. सिराजगोंज ज़िला ग्रेटर पबना जिसे कि अब बंग्लादेश के पबना ज़िले के रुप में जाना जाता है वहां हुआ. 1946 में इनका वैवाहिक जीवन आंरभ हुआ ऑर भारत पाकिस्तान विभाजन के बाद 1951 में पारिवारिक तौर पर पर सुचित्रा भारत में आईं. उसके बाद इन्होंने बंगाली फिल्मों में काम करना शुरु किया तो फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. बंगाली फिल्म देवदास(1955) के लिए इन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला. इनकी मृत्यु के बाद पनबा ज़िला के लोगों ने इनके घर को संग्राहलय बनाने की मांग की. मौजुदा समय में इनका घर बंग्लादेश जमात ए इस्लाम के इमाम गज्जली ट्रस्ट के पास है।

पी सी सरकार

पी सी सरकार

मशहूर जादुगर प्रोतुल चंद्र सरकार का नाम तो आपने जरुर सुना होगा। तो आपको बता देते हैं यह करिश्मा ए बादशाह भी भारत में शरणार्थी के रुप में बंग्लादेश से भारता आए. इनका जन्म 23 फरवरी 1913 को बंग्लादेश के मायमेनसिंह के तंन्गैल शहर में हुआ।

यह 7 पुश्तों से जादुई कला में रत परिवार में जन्म लेने वाले भाग्यशाली बने। इनकी कुशलता ने इन्हें विश्वभर में प्रसिद्धि दिलाई। इन्होंने भारत में न केवल जादुई कला को जन्म दिया बल्कि कईयों को अपना शागिर्द बना कर जादु सिखाया भी। इनका जब निधन हुआ तब इन्दिरा गांधी ने शोक वचनों में कहा कि भारतीय जादू का गौरवशाली अध्याय समाप्त हो गया।

मृणाल सेन

मृणाल सेन

भारतीय सिनेमा की मशहुर हस्ती मृणाल सेन जिन्होंने भारतीय मध्यम वर्ग की समस्या ऑर जीवन शॅली को अपनी फिल्मों के द्वारा पेश किया। इनकी फिल्मों का कथानक समाजिक मुद्‌दों पर आश्रित रहा। इनकी इसी विशेषता ने इन्हें भारत के श्रेष्ठ फिल्मकारों में शामिल किया। इनका जन्म 14 मई 1923 को बंग्लादेश के फरीदपुर में हुआ। भौतिकी का अध्ययन करने कलकत्ता आए मृणाल सेन का मन फिल्म जगत की ओर मुड़ा ऑर अपनी लगन से इन्होंने बेहतरीन फिल्में भारत को दीं।

इनकी फिल्म खारिज़ को 1938 में कान अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में विशेष जूरी पुरस्कार मिला। ऑर बर्लिन अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह 19 में इनकी फिल्म अकालेर संधाने को सिल्वर बियर पुरस्कार मिला।

बिमल राय

बिमल राय

द साइलेंट मास्टर विमल राय वो प्रसिद्ध फिल्मकार हुए जिन्होंने दो बीघा जम़ीन, परिणीता, बंदनी, सुजाता, मधुमति जैसी बेहतरीन फिल्मों का निर्माण किया राय का जन्म 12 जुलाई 1909 को सुआपुर में हुआ जो कि अब बंग्लादेश है।

पिता की मृत्यु के बाद जब उन्हें ऑर उनकी मां को संपत्ति से बेघर कर दिया गया तब अपनी मां ऑर भाई के साथ वे कलकत्ता आए। उन्होंने कई पुरस्कार जीते. दो बीघा जम़ीन के लिए उन्हें कान अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।

महाशय धर्मपाल गुलाटी

महाशय धर्मपाल गुलाटी

प्रसिद्ध उद्यमी जिन्हें एमडीएच मसाले के प्रचार में देखा जाता है। मसाले के व्यापार के बादशाह महाशय धर्मपाल गुलाटी का जन्म पूर्वोत्तर पंजाब जो कि अब पाकिस्तान का हिस्सा है वहां हुआ। स्कूल जाने के दिनों में ही या कहें कि कम उम्र में ही इन्होंने काम करना शुरु किया। 1919 में इनके पित महासेन दी ह्ड्‌डी नाम की दुकान में मसाले बेचने का काम करते थे. 7 सितम्बर 1947 को गुलाटी परिवार समेत अमृतसर के शरणार्थी कैम्प में आए और 3 साल की उम्र में काम के लिए दिल्ली आए। इन्होंने अजमल खान रोड दिल्ली में मसाले की दुकान शुरु की ऑर धीरे -धीरे मसालों के बड़े ऑर प्रसिद्ध विक्रेता बन गए. आज कौन नहीं जानता असली मसाले सच सच एमडीएच को। आज इनका व्यापार 500 करोड़ का है।

English summary
Here are some Refugee like Raj Kapoor, Dilip Kumar are Indian Proud, They are great actor and Nice Indians. Have a look.
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