'मैं हमेशा से संघर्षशील कलाकार रहा हूँ'

By Staff
'मैं हमेशा से संघर्षशील कलाकार रहा हूँ'

रंगमंच और टेलिवीज़न से लंबे समय तक जुड़े रहे रणवीर अपने चीनी लुक और अंदाज़ में इस फ़िल्म में सामने आए तो उनकी चर्चा शुरू हो गई. यह अलग बात है कि हमेशा लोगों को हँसाने वाले इस अभिनेता से जब आप मिलेंगे तो उनकी गंभीरता को भी आप सराहे बिना नही रहेंगे. उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश:

चांदनी चौक टू चाइना से पहले आई आपकी फ़िल्में नही चली तो कैसा लगा. इस फ़िल्म को लेकर भी लोगों की प्रतिक्रिया मिलीजुली है?

जहाँ तक चांदनी चौक टू चाइना की बात है तो यह पहली फ़िल्म है जो चीन में उसकी दुनिया भर में मशहूर ग्रेट वाल ऑफ़ चाइना पर जाकर फ़िल्माई गई है.

हॉलीवुड के फ़िल्म निर्माता वार्नर्स ब्रदर्स के साथ भी यह किसी हिन्दी फ़िल्म का पहला गठजोड़ है और मैं जानता हूँ कि लोगों को यह फ़िल्म बहुत पसंद आएगी.

लेकिन मैं हैरान हूँ कि मेरी ट्रैफ़िक सिग्नल जैसी फिल्मों में मेरा काम तो लोगों को पसंद आया पर फिल्म बॉक्स ऑफिस को प्रभावित नही कर पाती. जबकि मधुर भंडारकर की हाल में आई फ़ैशन को लोगों ने पसंद किया.

शायद लोग मुझे कॉमेडी भूमिकाओं में ही ज्यादा पसंद करते हैं. मैंने जब हाल ही में अक्षय के साथ सिंग इस किंग की तो लोगों ने शिकायत की कि मैं अपने रूतबे और छवि से बहार की भूमिकाएं क्यों कर रहा हूँ. मेरे अलग कंटेंट और सरोकारों वाली भूमिकाएँ उन्हें पसंद नही शायद.

आप एक बार फिर अक्षय के साथ हैं और कहा जा रहा है कि चांदनी चौक टू चाइना में आपने कुछ कुछ निगेटिव किस्म का चरित्र निभाया है?

नही, शुरू में वो अपने मंतव्यों के चलते थोड़ा सा ग्रे जरूर हो जाता है पर अंत तक आते आते वो वापस पॉजिटिव हो जाता है. दरअसल यह चौपिस्टिक नाम के ऐसे चीनी युवक का किरदार है जो झूठ बोलकर अक्षय को चीन ले जाता है लेकिन फिर वही दीपिका के साथ उनके लिए जीत का आधार भी बन जाता है.

इसके लिए मैंने कड़ी मेहनत की. यह भूमिका मेरे पुराने कामेडी के आधार तत्वों वाली है लेकिन इसकी संवेदनशीलता मेरी पहली फ़िल्मों से अलग है. जहाँ तक अक्षय की बात है तो उनकी मेहनत और साहस का में कायल हूँ. बिना गॉडफादर के यहाँ तक पहुंचना आसान नही.

किसी भी फ़िल्म का कोई भी पात्र या चरित्र कभी बेकार नही होता. सारे पात्र और चरित्र मिलकर ही किसी फ़िल्म का पूरा आधार बनते हैं

किसी भी फ़िल्म का कोई भी पात्र या चरित्र कभी बेकार नही होता. सारे पात्र और चरित्र मिलकर ही किसी फ़िल्म का पूरा आधार बनते हैं

चांदनी चौक टू चाइना पूरी तरह अक्षय की फ़िल्म है और आपकी पहले की फ़िल्मों में भी यदि विनय पाठक और रजत कपूर वाली फिल्मों को छोड़ दिया जाए तो वे कई सितारों वाली थीं. ऐसे में ख़ुद को साबित करने में कैसे मदद मिलती है?

किसी भी फ़िल्म का कोई भी पात्र या चरित्र कभी बेकार नही होता. सारे पात्र और चरित्र मिलकर ही किसी फ़िल्म का पूरा आधार बनते हैं.

पिछले साल जब मैंने हनीमून ट्रैवल्स जैसी जो फ़िल्म की थी उसमे दीया मिर्जा जैसी अभिनेत्री मेरे साथ थी और मिथ्या में नेहा धूपिया मेरे साथ थी. अब यह अलग बात है कि ऐसी भूमिकाओं के लिए मुझे अलग से कोई मेहनत नही करनी पड़ती.

लेकिन आपने सिंग इज किंग और फैशन में जो मेहनत की उससे आपको कोई मदद नही मिली. उनमें आपकी भूमिका कोई ख़ास कमाल नही दिखा सकी?

मैं कोई भी भूमिका किसी चमत्कार के लिए नहीं करता. मैं हमेशा सोचता हूँ कि किसी संक्षिप्त भूमिका में भी मैं नया क्या कर सकता हूँ. मैं किसी दायरे में बंधकर काम करने वाला आदमी नही हूँ. लेकिन जब कोई दोस्त आग्रह करता है तो कर भी लेता हूँ. मैंने इसे प्रोफ़ेशन की कम, संबंधों की बात ज्यादा मानता हूँ.

आपके लिए संबंध जब इतने ही जरूरी हैं तो आपने अपने पिता केडी शोरी की कोई फ़िल्म आज तक क्यों नहीं की और न ही आपने उनकी कोई मदद ली?

अनिल कपूर के पिता और भाई बड़े निर्माता रहे हैं लेकिन जब उन्होंने फ़िल्म में काम करने का मन बनाया तो उन्होंने दूसरे निर्माताओं की छोटी छोटी से भूमिकाओं वाली फिल्में की.

उनकी पहली बड़ी हिट फ़िल्म वो सात दिन निर्देशक बापू की फ़िल्म थी. मैं भी ऐसा ही चाहता था. इसलिए मैंने अपनी शुरुआत टीवी और एक छोटी सी लव स्टोरी जैसी फ़िल्म से की, रही पिता की बात, वो अब फिल्में नही बना रहे हैं, दूसरे ऐसा कोई प्रोजेक्ट सामने नही आया.

मेरे पास बाहर के ढेरों प्रस्ताव है. मैं चाहकर भी उनके साथ फ़िल्म नही कर पाया.

आपने यशराज और अब रमेश सिप्पी के साथ चांदनी चौक टू चाइना जैसे प्रोजेक्ट किए. यशराज की आजा नाच ले से तो माधुरी की वापसी भी हुई थी लेकिन सफल नही रहीं?

रणवीर लंबे समय तक वीजे रहे हैं

मेरा मानना है कि मैं हमेशा से एक संघर्षशील कलाकार रहा हूँ. मैंने उसके बाद नो स्मोकिंग, सिंग इस किंग और फैशन जैसी फिल्में की. पर इससे मेरे करियर पर कोई फर्क नही पड़ा. मुझे सिर्फ़ इस बात की खुशी है कि मैंने कुछ ऐसे लोगों के साथ काम किया जिनके साथ रहते हुआ आप सबकुछ भूल जाते हैं.

तो विनय पाठक, रजत कपूर और अरिंदम चौधरी को आप ऐसे ही लोग मानते हैं क्या?

मैंने उनके साथ अपने जीवन और करियर का एक लंबा समय गुज़ारा है. वो जानते हैं कि मैं किस हद तक जाकर काम कर सकता हूँ. मेरी एप्रोच क्या है.

लेकिन आपको नही लगता कि आपको अपना कॉमेडी वाला टैग उतारकर कुछ गंभीर सोचना चाहिए. एक जैसी भूमिकाओं से आप एकरसता के शिकार नही होते?

मैं किसी भूमिका से कभी नही ऊबता. ट्रैफ़िक सिग्नल का डोमिनिक डिसूजा और मिथ्या के डॉन के बाद यदि आप मेरे सिंग इज किंग के चरित्रों को देखें तो आप उनमे एक तरह की निगेटिविटी तलाश सकते हैं जो आपको मेरी 'भेजा फ्राई' या खोसला का घोंसला वाले पात्रों में नही मिलेगी.

मैं अपना मुकाम ख़ुद नही बता सकता. इसे बताना मेरी फिल्मों का काम है. मेरी भूमिकाओं की अपनी भाषा और प्रतीक होते हैं. उनमे कई बार आप कॉमेडी और गंभीरता ख़ुद तलाश कर लेते हैं.

लोग कई बार मुझसे सवाल करतें हैं कि मैं भेजा फ्राई और अगली और पगली जैसी फिल्में क्यों कर लेता हूँ जबकि वो कोरियन और फ्रेंच फिल्मों की नक़ल भर थी तो मैं कहता हूँ कि प्रेरित होना कोई बुरी बात नही. वो नक़ल नही उनसे प्रेरित फिल्में थी. ऐसे सवाल मुझे विचलित नही करते.

लोग तो आपके और कोंकणा सेन के बारे में ही नही बल्कि पूजा भट्ट के बारे में भी सवाल करते हैं?

मैं दुखी होता हूँ जब लोग किसी के बारे में कोई भी अनर्गल बात सिर्फ़ इसलिए कहते हैं कि वो कोई सेलेब्रेटी है. इसका जवाब मैं सबको क्यों दूँ. मैं और कोंकणा सिर्फ़ दोस्त हैं.

मेरे किसी से भी रिश्ते सिर्फ़ मेरे हैं, उन्होंने मेरे साथ केवल कुछ फिल्मों में काम भर किया है. जहाँ तक पूजा की बात है तो वे एक शादीशुदा महिला हैं और किसी का उनके बारे में कुछ भी कहना सही नही.

लोगों को ऐसी बातें करने में मज़ा आता है. पर इससे कौन दुखी हो रहा है वो इसकी चिंता नही करते.

आप आजकल रंगमंच की चिंता नही कर रहे हैं जबकि आपके थियेटर की पूरी टीम बनी हुई है?

हाँ, विनय, रजत और जोय के साथ मैंने खूब नाटक किए लेकिन अब समय नही मिलता. आज आप मेरे काम में जो आत्मविश्वास देखते हैं वो रंगमंच से आया है.

अब कौन से फिल्में आने वाली हैं?

प्लीज मत पूछिए. लोग मुझे काम देना बंद कर देंगे. मैं व्यस्त ऐक्टर नही कहलाना चाहता. अभी तो चांदनी चौक टू चाइना रिलीज हुई. उसके बाद सिर्फ़ तुम, आय एम 24 और बैंकाक ब्लूज आने वाली है.

टीवी पर आप नही दिख रहे हैं आजकल... यह माने कि अब बस टीवी बहुत हुआ?

नही. टीवी मेरा पुराना आधार है. उसने मुझे पहचान दी है. मैंने अपने करियर की शुरुआत टीवी पर बतौर वीजे और निर्देशक से की थी. विनय के साथ मैंने हाल में अपने दो शो 'रणवीर विनय और कौन' और द ग्रेट लाफ्टर कॉमेडी किए थे. मुझे जो मज़ा सहयोगी बनकर काम करने में आता है वो हीरो बनकर करने में नही आता. (हँसते हैं)

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+
X