भंसाली का धमाका: रणवीर सिंह - आलिया भट्ट की बैजू बावरा रीमेक की शूटिंग डीटेल्स, रणबीर - दीपिका हुए बाहर
पिछले दो सालों से संजय लीला भंसाली की एक फिल्म की चर्चा ज़ोरों पर है और ये फिल्म है बैजू बावरा रीमेक। जितनी ज़्यादा इस फिल्म की चर्चा है उतनी ही ज़्यादा इससे जुड़े चार स्टार्स की चर्चा थी - रणवीर सिंह, रणबीर कपूर, दीपिका पादुकोण और आलिया भट्ट। लेकिन अब इस फिल्म में रणवीर सिंह और आलिया भट्ट फाईनल हो चुके हैं।
रिपोर्ट्स की मानें तो रणवीर सिंह और आलिया भट्ट इस फिल्म की शूटिंग स्टार्ट टू फिनिश शेड्यूल में पूरी करेंगे। यानि कि फिल्म की पूरी शूटिंग छोटे छोटे ब्रेक से साथ लगातार की जाएगी। भंसाली, बैजू बावरा की शूटिंग की तैयारी तेज़ी से कर रहे हैं।

माना जा रहा है कि मार्च में रणवीर सिंह और आलिया भट्ट, करण जौहर की फिल्म रॉकी और रानी की प्रेम कहानी की शूटिंग पूरी कर लेंगे जिसके बाद मई - जून से बैजू बावरा रीमेक की शूटिंग शुरू कर दी जाएगी। भंसाली फिल्म में देरी नहीं करना चाहते हैं इसलिए पूरी फिल्म इसी साल खत्म कर ली जाएगी और इसे 2023 में रिलीज़ करने का प्लान भी है।

2019 में हुआ था अनाउंसमेंट
संजय लीला भंसाली बैजू बावरा रीमेक पर काम कर रहे हैं। इस फिल्म के रीमेक राइट्स उनके पास काफी पहले से हैं और जब 2019 में उन्होंने ये फिल्म अनाउंस की तो हर कोई सबसे पहले इस फिल्म की स्टारकास्ट जानना चाहता था। सबसे पहले दो नाम रणबीर और दीपिका पर ही आकर रूके थे। लेकिन रणबीर कपूर को इस फिल्म में ज़्यादा दिलचस्पी नहीं थी और उन्होंने इस फिल्म पर काफी सोच विचार किया लेकिन इसे हां नहीं कर पाए।

दीपिका की फीस पर अटकी बात
बात करें दीपिका पादुकोण की तो वो हमेशा से ही भंसाली की पहली पसंद रही हैं लेकिन इस बार बात अटक गई दीपिका पादुकोण की फीस पर आकर। जिसके बाद भंसाली ने इस फिल्म में आलिया को लेने का मन बना लिया। हालांकि हाल ही में काफी तगड़ी रिपोर्ट्स थीं कि दीपिका इस फिल्म के लिए अपनी फीस काफी कम करने को तैयार हैं क्योंकि वो एक बार फिर रणवीर के साथ काम करना चाहती हैं लेकिन तब तक भंसाली, रणवीर और आलिया में अपने परफेक्ट भारत भूषण और मीना कुमार की झलक देख चुके थे।

अजय देवगन को भी ऑफर हुई फिल्म
इसके बाद इस फिल्म का ऑफर अजय देवगन को भी गया। भंसाली चाहते थे कि अजय देवगन इस फिल्म में तानसेन की भूमिका निभाएं। लेकिन अजय देवगन को तानसेन का ये किरदार, बैजू बावरा के किरदार के आगे बेहद फीका लगा और उन्होंने अपनी बात भंसाली के सामने रख दी। अभी भी बैजू बावरा रीमेक में तानसेन और एक हीरोइन की जगह खाली है और भंसाली जल्दी इस कास्टिंग को पूरा कर देंगे।

आमिर खान भी करने वाले थे बैजू बावरा
दिलचस्प ये है कि अगर आज से 10 साल पीछे चला जाए तो ये फिल्म आमिर खान की थी और बैजू बावरा वो थे।2010 में ही कृष्णा शाह ने बैजू बावरा रीमेक बनाना शुरू किया था। फिल्म का नाम था बैजू - द जिप्सी। फिल्म के हीरो थे आमिर खान और फिल्म का म्यूज़िक देने वाले थे ए आर रहमान। लेकिन ये फिल्म कभी बनना शुरू ही नहीं हो पाई।

1952 की फिल्म बैजू बावरा
विजय भट्ट ने 1952 में बनाई थी। इस फिल्म में भारत भूषण और सुरेंद्र, बैजू बावरा और तानसेन की भूमिका में थे। वहीं मीना कुमारी फिल्म की हीरोइन थी। मीना कुमारी को इस फिलम के लिए 1964 में पहला फिल्मफेयर अवार्ड मिला था।ओरिजिनल फिल्म में 13 गाने थे और फिल्म का म्यूज़िक नौशाद ने दिया था। जिसके लिए उन्हें अपना जीवन का इकलौता फिल्मफेयर अवार्ड मिला था। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 1.25 करोड़ की कमाई की थी।

बैजू बावरा एक गुमनाम गायक
तानसेन को देश का बेस्ट गायक कहा जाता है। वो अकबर में दरबार में गाते थे और अकबर के नवरत्नों में से एक थे। तानसेन जैसे कोई नहीं गा सकता था और जो गाता था उसे मार दिया जाता था। बैजू बावरा एक ऐसे गुमनाम गायक की कहानी है जो तानसेन को हराकर अपने पिता की मौत का बदला लेना चाहता है। बैजू के बचपन में, तानसेन के आदमी उसके पिता को गाने से रोकने की पूरी कोशिश करते हैं जिसमें उसके पिता की मौत हो जाती है। मरते हुए वो बैजू से वादा लेता है कि तानसेन से बदला ज़रूर लेगा। और यहीं से बैजू बावरा और उसके संगीत की कहानी शुरू होती है।

फिल्म की कहानी
बैजू को गांव के पंडित के घर शरण मिलती है और उसे एक नािवक की बेटी गौरी से प्यार हो जाता है। बैजू अपने संगीत को जारी रखता है लेकिन गौरी के प्यार में अपने पिता को किया गया वादा भूल जाता है। कुछ समय बाद गांव में डाकू आते हैं लेकिन डाकू की सरदारनी को बैजू से प्यार हो जाता है। वो गांव को इस शर्त पर छोड़ती है कि बैजू, डाकुओं के गिरोह के साथ उनकी हवेली पर जाकर रहेगा। वहां, डाकुओं की सरदारनी बताती है कि वो एक राजकुमारी है और अपने पिता का बदला ले रही है। बदला से बैजू को पुरानी यादें ताज़ा होती हैं और वो मुग़ल महल में घुसता है जहां तानसेन गा रहे होते हैं। उन्हें गाता सुन, बैजू खो जाता है। जिस तलवार से वो तानसेन का गला काटना चाहता था वो तानपूरे पर गिरती है और तानपूरा का तार टूट जाता है। इससे तानसेन दुखी होता है और कहता है कि केवल संगीत ही उसे मार सकता था।

बैजू से कैसे बना बावरा
बैजू असली संगीत खोजने निकल पड़ता है और धीरे धीरे उसके संगीत में भी वो दर्द और प्यार छलकता है जो किसी का भी दिल जीत ले। इसके बाद सड़कों पर गाने लगता है और लोग उसे बावरा कहते हैं। बैजू और तानसेन के बीच अकबर के दरबार में एक कंपिटीशन होता है और अकबर उन्हें चैलेंज देता है कि जो एक संगमरमर को पिघला देगा वो जीत जाएगा। बैजू जीत जाता है। लेकिन अकबर से तानसेन की ज़िंदगी बख्शने की गुज़ारिश करता है।

कितनी अलग होगी भंसाली की फिल्म
अब देखना है कि भंसाली की बैजू बावरा, ओरिजिनल फिल्म से कितनी अलग होगी। ये भंसाली और रणवीर सिंह की चौथी फिल्म होगी। इससे पहले दोनों राम लीला, बाजीराव मस्तानी और पद्मावत में साथ काम कर चुके हैं। वहीं आलिया भट्ट के साथ भंसाली गंगूबाई के बाद दूसरी बार काम करेंगे। आलिया और रणवीर की एक साथ ये तीसरी फिल्म होगी।


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