'रण नहीं है मीडिया के ख़िलाफ़'

दुर्गेश उपाध्याय
बीबीसी संवाददाता, मुंबई
साल 2008 में ‘सरकार राज’ ‘कॉन्ट्रैक्ट’ और ‘फूंक’ के बाद रामगोपाल वर्मा 2010 में अपनी पहली फ़िल्म 'रण' के साथ आ रहे हैं.
इस फ़िल्म के बारे में ऐसी ख़बरें हैं कि ये समाचार चैनलों पर तीखी टिप्पणी करती है.
लेकिन फ़िल्म के निर्माता और निर्देशक रामगोपाल वर्मा कहते हैं कि ‘रण’ मीडिया के सही रंग का पर्दाफ़ाश तो ज़रुर करेगी लेकिन कोई नकारात्मक चित्रण नहीं करेगी.
उन्होंने कहा कि ये फ़िल्म मीडिया की आलोचना मात्र नहीं है. वर्मा ने कहा, “मैं चौबीस घंटे के समाचार चैनलों के दवाब, समस्याएं और जटिलताओं पर रौशनी डाल रहा हूं. ”
वास्तविकता
अमिताभ बच्चन इस फ़िल्म में विजय हर्षवर्धन मलिक की भूमिका में है जो एक बड़े मीडिया घराने का मालिक है. बच्चन कहते हैं, “ ‘रण’ ये नहीं बताती कि मीडिया को क्या करना चाहिए और क्या नहीं. आख़िरकार ये एक कहानी है. ”
रामगोपाल वर्मा भी कहते हैं कि ‘रण’ एक ऐसी कहानी है जिसे वास्तविकता के क़रीब रखा गया है. फ़िल्म में दिखाए चैनलों के नाम भी भारत में मौजूद टीवी समाचार चैनलों से मिलते-जुलते हैं.
वर्मा कहते हैं, “ जब भी आप कोई ऐसी फ़िल्म बनाते हैं जो वास्तविकता के नज़दीक हो, तो आपको माहौल बनाने के लिए वास्तविकता से जुड़े नामों का इस्तेमाल करना पड़ता है. मसलन अगर राजनीति पर फ़िल्म में किसी नेता का नाम अमुक यादव हो तो वो ज़्यादा वास्तविक लगेगा. ”
फ़िल्म में मुख्य भूमिका में अमिताभ बच्चन, रितेश देशमुख और गुल पनाग हैं.
मीडिया
अमिताभ बच्चन का ख़ुद मीडिया के साथ रिश्ता खट्टा-मीठा रहा है. उन्होंने कहा कि मीडिया का काम प्रश्न पूछना है और उनका काम जवाब देना. चुटकी लेते हुए अमिताभ बच्चन ने कहा, “हम हमेशा प्रतिकूल परिस्थितियों में होंगे क्योंकि हमे हमेशा जवाब देना होता है. जो भी जवाब देता है वो रक्षात्मक तो होगा ही.”
अमिताभ बच्चन और रामगोपाल वर्मा ने कई फ़िल्मों में एक साथ काम किया है जिनमें ‘सरकार’, ‘निशब्द’, ‘रामगोपाल वर्मा की आग’, ‘सरकार राज’ प्रमुख हैं.
अमिताभ बच्चन कहते हैं कि रामगोपाल वर्मा के साथ काम करना हमेशा सुखद अनुभव होता है. बच्चन ने कहा, “वर्मा के साथ काम करना हमेशा एक चुनौती होता है, वो अपने कलाकार अपना किरदार सही ढंग से निभाने का भरपूर अवसर देते हैं.”


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