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    "सिर्फ इस फिल्म को छोड़कर अमिताभ बच्चन ने कोई ढंग की फिल्म नहीं की है"

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    रामगोपाल वर्मा कभी भी कुछ भी कह देते हैं ये तो हम आपको कई बार बता चुके हैं लेकिन फिर भी उनकी कुछ फिल्में होती हैं जो अचानक काफी अच्छी निकल जाती हैं। सरकार 3 के पोस्टर देखकर भी कुछ ऐसा ही लग रहा था और इसलिए सरकार 3 के ट्रेलर का लोग बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे।

    लेकिन फिल्म की कंट्रोवर्सी से पहले, फिल्म के ट्रेलर लॉन्च में ही रामगोपाल वर्मा ने कुछ कंट्रोवर्सी भरी बातें कहीं। हालांकि इनमें सबसे अजीब और विवादास्पद बयान था अमिताभ बच्चन के लिए।

    अमिताभ बच्चन ने हाल ही में बॉलीवुड में 48 साल पूरे किए हैं लेकिन रामगोपाल वर्मा को उनके 48 साल के करियर में सरकार छोड़ कर कोई भी फिल्म पसंद नहीं आई। रामगोपाल वर्मा के शब्दों में सरकार छोड़कर बच्चन साहब की कोई फिल्म ढंग की नहीं थी।
    [#Shock: "हमें पता था कि फिल्म सुपरफ्लॉप होगी...हमने तो बस एहसान किया था"]

    रामगोपाल वर्मा यहीं नहीं रूके। उन्होंने माना कि अब तक कोई भी डायरेक्टर अमिताभ बच्चन के टैलेंट को निचोड़ ही नहीं पाया है। सबने उन्हें हमेशा हल्के में ही ले लिया है।

    अब राम गोपाल वर्मा बड़े आदमी हैं उनके जितना तो टैलेंट हम नहीं परख सकते। ना ही बच्चन साहब का 48 साल का करियर आंक सकते हैंं। पर हाल फिलहाल के कुछ शेड्स के बारे में ज़रूर बात करेंगे -

    अमिताभ बच्चन के रंग

    अमिताभ बच्चन के रंग

    दीवार का विजय जिसके पास गाड़ी, बंगला और शोहरत थी, चुपके चुपके का परिमल जो पूरी फिल्म यह समझाने में लगा देता है कि मैं मैं हूं पर मैं वो नहीं जो मैं हूं, अभिमान का उभरता गायक हो या कभी कभी का शायर, हम का ज़िम्मेदार भाई या सत्ते पे सत्ता का अल्हड़,कॉमेडी, रोमांस और एंग्री यंग मैन की छवि को 70 - 80 के दशक में अमिताभ ने खूब जिया और देखते ही देखते वो बॉलीवुड के शहंशाह बन गए।

    पिंक का धाकड़ वकील

    पिंक का धाकड़ वकील

    पिंक में अमिताभ बच्चन ने एक धाकड़ वकील का किरदार निभाया है। उसके काम का उसकी उम्र या फिर उसकी निजी ज़िम्मेदारियों से कोई लेना देना नहीं है। ये फिल्म पिछले साल की बेस्ट फिल्म बनकर उभरी।

    पीकुू

    पीकुू

    अमिताभ बच्चन एक साथ इरिटेट और प्यारे लगने वाले इंसान कैसे हो सकते हैं, इसके लिए ये फिल्म देखनी ही चाहिए।

    ऑरो का बचपन

    ऑरो का बचपन

    एक बच्चे के किरदार को संजीदगी से जी लेना, शायद अमिताभ बच्चन ही ऐसा कर सकते हैं। पा का ऑरो सबके दिल को छू गया। फिल्म में अमिताभ का बचपना ही फिल्म की खासियत थी।

    डराता - हंसाता कैलाशनाथ उर्फ भूतनाथ

    डराता - हंसाता कैलाशनाथ उर्फ भूतनाथ

    बच्चों को डराने की नाकाम कोशिश करते करते उनका बेस्ट फ्रेंड बन जाना इस फिल्म की यूएसपी थी। शरारत और संजीदगी दोनों ही पहलुओं को खुद में समेटे भूतनाथ लोगों का चहेता बन गया था

    रंगीन-बेबाक फकीर

    रंगीन-बेबाक फकीर

    एक गाना और अमिताभ अपनी हटके अदा कारण इस फिल्म में छाए रहे। हालांकि दर्शकों के बीच फिल्म नहीं चली लेकिन लंबे फकीरी कोट, मैंडेलिन और शहंशाह के लंबे जूतों में अमिताभ ने ध्यान ज़रूर खींचा।

    पाक कला में माहिर अक्खड़ बुद्धदेव गुप्ता

    पाक कला में माहिर अक्खड़ बुद्धदेव गुप्ता

    इस फिल्म के बाद अमिताभ की छोटी पोनीटेल स्टाइल स्टेटमेंट बन गया। 62 साल के एक सनकी शेफ और 32 साल की तब्बू की लव स्टोरी ने खूब वाहवाही बटोरी। फिल्म में अमिताभ का अक्खड़ अंदाज़ भी आपको ज़रूर पसंद आया होगा।

    विश्वासपात्र पर मजबूर एकलव्य

    विश्वासपात्र पर मजबूर एकलव्य

    एक जांबा़ज़ और विश्वासपात्र शाही सेवक के रूप में अमिताभ का अभिनय लाजवाब था। फिल्म को भारत की तरफ से आधिकारिक ऑस्कर एंट्री के रूप में भेजा गया। अमिताभ का कसा अभिनय और संवाद ने फिल्म में जान डाली थी।

    कजरारे पर थिरकता दिलेर डीसीपी दशरथ

    कजरारे पर थिरकता दिलेर डीसीपी दशरथ

    एक पुलिसवाला और दो चोर। चोर पुलिस की इस कहानी में अगर कुछ खास था तो वो था अमिताभ का बेधड़क अंदाज़। कजरारे पर ऐश्वर्या राय के साथ ताल मिलाकर अमिताभ ने तहलका मचा दिया था।

    धुन का पक्का सुभाष नागरे

    धुन का पक्का सुभाष नागरे

    रामगोपाल वर्मा की इस फिल्म में अमिताभ बिल्कुल जुदा अंदाज़ में दिखे। फिल्म ने काफी वाहवाही बटोरी और इसे महाराष्ट्र के राजनीतिक परिवेश से भी जोड़ कर देखा गया। अमिताभ के कॉस्ट्यूम, मेकअप, अभिनय की जमकर तारीफ हुई। फिल्म का एक सीक्वल भी बना।

    उम्र से लड़ता ईश्वरचंद्र

    उम्र से लड़ता ईश्वरचंद्र

    इस फिल्म में एक परेशान और समझदार पिता का किरदार दर्शकों की आंखे नम कर गया। ईश्वर का उनका किरदार कई मायनों में अलग था। बेटे को समझने के लिए पहले उसका हमउम्र बनना फिर पिता बनकर उसकी गल्तियां सुधारना।

    चालाक चतुर राजस्थानी

    चालाक चतुर राजस्थानी

    अमिताभ ने इस फिल्म में एक छोटे से गड़रिये का रोल अदा किया था। लेकिन ठेठ राजस्थानी बोलचाल और पहनावे में वे खूब जमे थे। मात्र 5 मिनट के रोल में भी अमिताभ खूब जमे थे।

    जुनूनी और अड़ियल देबराज साहनी

    जुनूनी और अड़ियल देबराज साहनी

    इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा को नए आयाम दिये थे। अड़ियल, ज़िद्दी और मेहनती टीचर के रोल में अमिताभ ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी खूब तालियां बटोरी। उनका जुनूनी अंदाज़ दर्शकों को खूब भाया।

    बदले की आग में जलता विजय सिंह राजपूत

    बदले की आग में जलता विजय सिंह राजपूत

    निगेटिव छवि और अमिताभ बच्चन भले ही अजीब लगे पर आंखे का ये विलेन डराता है। ग्र शेड लिए हुए अमिताभ के किरदार ने फिल्म को एक विशेष दर्शक वर्ग में स्थापित किया। बदला, गुस्सा और प्रतिशोध के लिए अमिताभ के निगेटिव रोल ने तालियां भी बटोरीं।

    English summary
    Ramgopal Verma talks about Amitabh Bachchan's wasted career.
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