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IFFI 2019: रजनीकांत को मिला अमिताभ बच्चन के हाथों से गोल्डन जुबिली सम्मान

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रजनीकांत को 50वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) में गोल्डन जुबिली अवार्ड से सम्मानित किया गया है। जहां अमिताभ बच्चन ने उन्हें ये अवार्ड पेश किया वहीं दूसरी तरफ, प्रकाश जावडेकर और बाबुल सुप्रियो भी इस सुनहरे पल का हिस्सा बने।

ये शानदार उत्सव आज से गोआ के पंजिम में शुरू हुआ। ओपनिंग सेरेमनी के होस्ट थे इंटरटेनमेंट में अव्वल होस्ट करण जौहर। इस उत्सव की शुरूआत की अमिताभ बच्चन और करण जौहर ने।

वहीं ओपनिंग सेरेमनी में रजनीकांत को गोल्डन जुबिली अवार्ड आईकॉन से सम्मानित किया गया। रजनीकांत ने भारतीय सिनेमा में काफी योगदान दिया है जिसकी वजह से उन्हें ये सम्मान दिया गया।

ओपनिंग सेरेमनी में बेंड इट लाइक बेखम स्टार जोनाथन रीस मेयर्स, IFFI इंटरनेशनल की ज्यूरी जॉन बेली, भारतीय ज्यूरी के चेयरमैन प्रियदर्शन और सिनेमा के अन्य सदस्य मौजूद रहे।

ओपनिंग सेरेमनी गोआ के श्यामा प्रसाद मुखर्जी इंडोर स्टेडियम में हुई। इस फेस्टिवल में 200 से ऊपर फिल्मों की स्क्रीनिंग की जाई। ये फिल्में, 76 देशों की प्रतिनिधि हैं।

रजनीकांत ने अपना अवार्ड लेते हुए इस अवार्ड को अपने सारे डायरेक्टर्स और क्रू को डेडिकेट किया। जानिए उनके बारे में कुछ दिलचस्प बातें

ऐसे बने आइकन

ऐसे बने आइकन

थलापति, अन्नामलाई, बाशा और पदायाप्पा जैसी फिल्मों के बाद वह सिर्फ एक्टर नहीं रहे, आइकन बन गए। उनकी फिल्मों को छह साल के बच्चों से लेकर 60 साल तक के बुजुर्गों तक सभी ने इंज्वॉय किया।

ऐसी शख्सियत

ऐसी शख्सियत

उनकी मौजूदगी, उनकी आवाज, उनका अहसास, उनकी एक तस्वीर भी फैंस की भीड़ इकट्ठा करने के लिए काफी है।

त्योहार मनाते हैं लोग

त्योहार मनाते हैं लोग

उनकी फिल्में रिलीज होती हैं, तो लोगों के लिए त्योहार जैसा माहौल हो जाता है। उनकी तस्वीरों को दूध से नहलाया जाता है। उनकी आरती उतारी जाती है। उनकी फिल्में इतनी भीड़ जुटा लेती हैं कि फिल्म रिलीज के दिन को हॉलीडे डिक्लेयर कर दिया जाता है।

भगवान

भगवान

कुछ लोग उन्हें सुपरस्टार कहते हैं और कुछ भगवान ही मानते हैं। हालांकि सीधे और सरल शब्दों में वो सिर्फ रजनीकांत हैं।

ये है असली नाम

ये है असली नाम

असली नाम शिवाजी राव गायकवाड़ है। उनकी इमेज बेशक भगवान और सुपरमैन जैसी है, लेकिन असली कहानी इस परीकथा से एकदम उलट है।

कुछ ऐसी थी जिंदगी

कुछ ऐसी थी जिंदगी

मराठी फैमिली में जन्मे रजनीकांत चार भाई-बहनों में रजनीकांत सबसे छोटे हैं। वह काफी छोटे थे, जब उनकी मां का निधन हो गया। उनके घर की हालत अच्छी नहीं थी, इसलिए उन्हें कई छोटे-मोटे काम करने पड़े।

ऐसे शुरू किया सफर

ऐसे शुरू किया सफर

उन्होंने कन्नड़ रंगमंच में भी काम शुरू किया। 1973 में वह मद्रास फिल्म इंस्टीट्यूट से जुड़े। 1975 में रजनीकांत और के। बालंचद्र से मुलाकात हुई। तब बालचंद्र ने उन्हें एक छोटा रोल ऑफर किया।

ऐसे मिली पहचान

ऐसे मिली पहचान

उन्हें पहली सफलता मिली फिल्म भैरवी से, इसमें वह मुख्य भूमिका में थे। इसके बाद वो समय भी आया जब रजनीकांत के बारे में के. बालचंद्र ने कहा- वो मुझे अपना स्कूल मानता है, लेकिन मैं कहूंगा कि इस रजनीकांत को मैंने नहीं बनाया, उसने खुद समय के साथ अपने हुनर को निखारा है।

पद्मभूषण

पद्मभूषण

2000 में उन्हें पद्मभूषण पुरस्कार से नवाजा गया. इसके बाद साल 2007 में उनकी फिल्म शिवाजी आई और साल 2010 में रोबोट, दोनों ही फिल्में ब्लॉकबस्टर हिट रहीं।

English summary
Rajnikanth has been contributing to Indian Cinema since 50 years and to IFFI recognised it with a Golden Jubilee Award.
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