राजकुमार राव ने पैन इंडिया फिल्मों का हिस्सा बनने पर दी प्रतिक्रिया, कहा, मैं झुंड का हिस्सा नहीं बनना चाहता
जबसे आरआरआर, केजीएफ और पुष्पा जैसी साउथ फिल्मों ने हिंदी मार्केट में भी कमाई के मामले में झंडे गाड़े हैं, तबसे हिट फिल्मों के फॉमूले को लेकर चर्चा जारी है। ऐसे में लोग साउथ और हिंदी फिल्मों की लगातार तुलना भी कर रहे हैं। कुछ का मानना है कि हिंदी में आरआरआर या केजीएफ जितनी बड़ी स्केल और विजन की फिल्में नहीं बनती हैं, जिस वजह से वो बॉक्स ऑफिस पर काम नहीं कर रही।
बहरहाल, हाल ही में एक इवेंट के दौरान अभिनेता राजकुमार राव ने इस बारे में अपनी प्रतिक्रिया दी है। एक हिट फिल्म बनाने के फॉर्मूले के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, "हिट फिल्म का फॉर्मूला कोई नहीं जानता, आपको कोशिश करते रहना है और फिर इसे नियति पर छोड़ देना है। मैंने वास्तव में इस बारे में नहीं सोचा है कि दक्षिण की फिल्में अच्छा प्रदर्शन क्यों कर रही हैं, शायद इसलिए क्योंकि वे अच्छी फिल्में हैं, उन फिल्मों के पीछे कड़ी मेहनत दिखती है।"

अभिनेता ने आगे कहा, "मेरा मानना है कि सिनेमा अलग अलग चरणों से गुजरता है, एक समय हम स्विट्जरलैंड में गाने की शूटिंग कर रहे थे, फिर हमने छोटे शहरों की कहानियां सुनाना शुरू किया, और अब लार्जर देन लाइफ फिल्मों का समय है, जो साउथ में बन रही हैं।"
पैन इंडिया फिल्मों पर अपनी राय रखते हुए राजकुमार ने कहा, "लेकिन, एक अभिनेता के रूप में, मैं ऐसी फिल्में करता हूं जिन पर मुझे गर्व हो.. ना कि जो ट्रेंड में हो। जब तक मेरे निर्माता पैसे नहीं गंवाते, मैं कहानियां सुनाता रह सकता हूं। मैं झुंड का हिस्सा नहीं बनना चाहता। भले ही मेरी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये ना कमाए.."
इसी इवेंट में नेपोटिज्म पर बात करते हुए राजकुमार राव कहते हैं, "नेपोटिज्म हमेशा रहेगा, लेकिन अब काफी मौके मिल रहे हैं। मेरे कुछ दोस्त हैं, जो मेरे क्लासमेट्स थे, लेकिन अब उन्हें ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की बदौलत पहचान मिल रही है। जैसे जयदीप (अहलावत) जिन्होंने पाताल लोक में इतना अच्छा किया और प्रतीक (गांधी) ने 1992 में घोटाला किया। नेपोटिज्म होगा, लेकिन आपका काम और प्रतिभा बोलेगी।


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