शब्दों में गूंजा बाबू मोशाय कहता आनंद, राजेश खन्ना पर बायोग्राफी लॉन्च
बाबू मोशाय...ज़िंदगी और मौत ऊपर वाले के हाथ में हैं...उसे ना तो आप बदल सकते हैं ना मैं...हम सब तो रंगमंच की कठपुतली हैं जिनकी डोर ऊपर वाले की उंगलियों में बंधी है....
राजेश खन्ना का ये डायलॉग पढ़ते ही अगर आप के कानों में उनकी आवाज़ गूंज गई तो आपके लिए एक तोहफा है। राजेश खन्ना इस इंडस्ट्री के ऐसे कलाकार थे जो सही मायनों में सुपरस्टार थे। और ऐसे सुपरस्टार के बारे में जानना हर किसी की खुशकिस्मती होगी। दिल्ली के इंडिया हैबिटैट सेंटर में दिवंगत अभिनेता राजेश खन्ना के जीवन पर आधारित लेखक यासिर उस्मान की किताब 'कुछ तो लोग कहेंगे' का अनावरण सलमान खुर्शीद ने किया।
राजेश खन्ना यानि इंडस्ट्री का वो सितारा जिसके बारे में बोलना, बात करना शुरू किया जाए तो अफसाने खत्म नहीं होते हैं। राजेश खन्ना की जब भी चर्चा होती है तो कहा जाता है कि उनका स्टारडम सिर्फ 3 साल (1969-1972) तक रहा। लेकिन, यह बात पूरी तरह गलत है। साथ ही, यह कहना भी पूरी तरह सही नहीं होगा कि उनके पतन की वजह उनकी करिश्माई कामयाबी ही थी।
VOTE: BEST OF BOLLYWOOD 2014
राजेश खन्ना के बारे में ऐसे सभी पूर्वाग्रहों से अलग, इस किताब 'राजेश खन्ना- कुछ तो लोग कहेंगे' में लेखक यासिर उस्मान गहन शोध और राजेश खन्ना के करीबी लोगों के साक्षात्कार के जरिए एक नई कहानी सामने लाते हैं। कहानी, जो जुड़ी है राजेश खन्ना की निजी जि़ंदगी के कुछ दबे हुए पन्नों से। यह किताब कहने को तो एक बायॉग्रफी है जो पूरी तरह तथ्यात्मक है, लेकिन कहानी कहने का अंदाज नया है।
Time Machine: नए दौर में गुज़रा जमाना याद दिलाएंगी ये फिल्में


Click it and Unblock the Notifications
