पूरी हुई राजेश खन्ना की ख्वाहिश, मुंबई में ही लीं अपनी आखिरी सांसे

"....त्रिवेदी तो क्या इंदिरा जी भी मुझे बुलाएं तो मैं दिल्ली नहीं जाउंगा, अरे बंबई शहर का जवाब नहीं पंजाब सिंध गुजरात मराठा द्राविड़ उत्कल बंगा सब लोग यहीं तो हैं मैने तो फैसला कर लिया है बाबू मुशाय जीना तो बंबई में मरना तो बंबई में।" राजेश खन्ना की यादगार फिल्म 'आनंद' का यह डायलॉग राजेश खन्ना के दिल की ख्वाहिश को व्यक्त करता है। बॉलीवुड का यह सुपरस्टार मुंबई में ही अपनी आखिरी सासें लेना चाहता था और ऊपर वाले ने उनकी इस ख्वाहिश को पूरा कर ही दिया।

राजेश खन्ना का जन्म 29 दिसम्बर 1942 को हुआ था उन्हें चुन्नी लाल खन्ना औऱ लीलावती खन्ना ने गोद लिया था। राजेश खन्ना के असली माता पिता कौन थे इसकी जानकारी किसी को नहीं थी। मुंबई के गिरगांव में अपनी जिंदगी का शुरुआती सफर तय करने वाले काका ने अपनी पूरी जिंदगी मुंबई में ही गुजारी। और अपने जीवन का आखिरी सफर भी मुंबई में ही तय किया।

मुंबई ने इस सुपस्टार को बहुत कुछ दिया इतना प्यार और सम्मान जिसकी कल्पना भी शायद उन्होने नहीं की होगी बदले में राजेश खन्ना ने भी मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री को अपने जीवन के 25 साल दिए और साथ ही साथ कई ना भूल सकने वाले किरदार दिए हैं। आनंद फिल्म उनके दिल के बेहद करीब थी क्योंकि इस फिल्म का किरदार आनंद राजेश खन्ना की जिंदगी से बेहद मेल खाता है। पल पल मौत के करीब बढ़ने के बावजूद इस किरदार में जिंदगी के हर एक पल में खुशी और आनंद ढूंढ लेने का जो जज्बा था वही ज्जबा काका ने अपनी पूरी जिंदगी में रखा।

जुलाई 18 को जिंदगी की पहेली सुलझाते सुलझाते राजेश खन्ना की खुद की जिंदगी उलझनों में ही खत्म हो गई। लीवर की खराबी के चलते राजेश खन्ना ने मुंबई में ही कार्टर रोड पर स्थित अपने बंगले आशीर्वाद में अपनी पत्नी डिंपल कपाड़िया और बेटी रिंकी खन्ना का हाथ पकड़े अपने जीवन के सफर को खत्म किया।

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