नर्गिस को चाहते थे शो-मैन राजकपूर
बॉलीवुड में कुछ ऐसे एक्टर हुए हैं जिनकी कमी कोई पूरी नहीं कर सकता उनमें से एक हैं शोमैन राजकपूर। जब भी उनकी फिल्मों को देखा जाएगा उनकी अदाकारी और उनके डायलॉग अदायगी का अंदाज इतना अलग था कि उसकी तुलना में आज के कलाकारों को रखा जाए तो शायद कहीं से भी उनके बराबरी नहीं कर पाएंगे। इंडिया के शोमैन कही जाने वाले राजकपूर की आज 88वीं जयंती है। उनकी जयंती के दिन एक बार फिर से मेरा नाम जोकर के राजकुमार की याद आ गयी।
हाथों मे एक लंबा डंडा और उसमें अपनी पोटली लिये, टोपी पहने मेरा जूता है जापानी का गाना गाते राजकुमार आज भी सबके दिलों में अपनी एक खास रखते हैं। राजकुमार ने अपने करियर के दौरान 'आवारा', 'बरसात', 'श्री 420', 'चोरी चोरी', 'जिस देश में गंगा बहती है', 'संगम' और 'मेरा नाम जोक'र जैसी की हिट और बेहतरीन फिल्में दी हैं। उन्हें बॉलीवुड का चार्ली चैपलिन भी कहा जाता था क्योंकि अपनी फिल्मों में चार्ली चैपलिन की तरह ही उछल कूद और बेहतीरन कॉमेडी भावों के साथ लोगों को इतना हंसाया कि उनके पेट में दर्द हो गया।
हंसाने के साथ ही राजकपूर ने अपने गंभीर किरदारों में खुद को पूरी तरह ढ़ालकर लोगों को बेइंतहां रुलाया भी। राजकपूर को 1987 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया था। राम तेरी गंगा मैली हो गयी के बाद राजकपूर अपनी अगली फिल्म हिना का निर्देशन कर रहे थे लेकिन फिल्म के फ्लोर पर आने से पहले ही 2 जून 1988 को उनका निधन हो गया। जहां तक बात है राजकपूर और उनके रोमांटिंक जिंदगी की बात है तो राजकपूर का रोमांस उस समय की हिट अभिनेत्री नर्गिस के साथ था। दोनों ने साथ में करीब 16 फिल्में कीं थीं जिनमें आवारा, श्री 420, बरसात मुख्य हैं। देखिये राजकपूर और उनका फिल्मी सफर इन तस्वीरों में।


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