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मैं बड़ी आशिक़ मिजाज़ हूं- प्रियंका चोपड़ा

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मैं बड़ी आशिक़ मिजाज़ हूं- प्रियंका चोपड़ा

सात ख़ून माफ़ के प्रमोशन के दौरान प्रियंका चोपड़ा.

प्रियंका चोपड़ा की फ़िल्म 'सात ख़ून माफ़' शुक्रवार को रिलीज़ हो रही है.

इसमें वो एक-एक करके अपने सात पतियों का क़त्ल करने वाली महिला की भूमिका निभा रही हैं. यानी हर एक क़त्ल के बाद उन्हें फिर से एक और पुरुष से प्यार होता है और फिर वो उसका क़त्ल कर देती हैं.

क्या निजी जीवन में भी उन्हें एक से ज़्यादा पुरुषों से प्यार हो सकता है. फ़िल्म के बारे में जानकारी देने के लिए बुलाई गई एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में जब प्रियंका से ये सवाल पूछा गया तो वो बोलीं, "मैं तो असल ज़िंदगी में बड़ी आशिक़ मिजाज़ हूं. मुझे हर किसी से प्यार हो जाता है. विशाल भारद्वाज से प्यार है इसलिए उनकी फ़िल्म में काम कर रही हूं. मुझे पत्रकारों से भी प्यार है. इसलिए आपके सवालों के जवाब दे रही हूं."

फ़िल्म रस्किन बॉन्ड के उपन्यास 'सुज़ाना'स सेवन हस्बैंड्स' पर आधारित है. जिसमें एक महिला को प्यार में बार-बार धोखा मिलता है, इसलिए वो अपने पतियों का क़त्ल करती चली जाती है.

असल ज़िंदगी में उन्हें प्यार में धोखा मिले तो वो क्या करेंगी. ये पूछने पर प्रियंका का जवाब था, "मैं किसी का क़त्ल तो नहीं करूंगी. लेकिन उसकी ज़िंदगी से हमेशा के लिए चली जाउंगी. और मैं किसी की ज़िंदगी से चली जाउं तो उसके लिए ये बहुत बड़ा नुकसान होगा."

फ़िल्म में प्रियंका के साथ जॉन अब्राहम, नसीरुद्दीन शाह, अन्नु कपूर और इरफ़ान ख़ान जैसे नामी-गिरामी सितारे मुख्य भूमिका में हैं.

प्रियंका चोपड़ा अभिनीत 'सात ख़ून माफ़' के निर्देशक विशाल भारद्वाज हैं.

प्रियंका अपने सह अभिनेताओं के बारे में कहती हैं, "नसीर जी और अन्नु जी जैसे महान कलाकारों के साथ काम करना सम्मान की बात है. नसीर जी तो अभिनय का स्कूल हैं. इरफ़ान जैसे बेहद टैलेंटेड अभिनेता के साथ काम करना भी एक यादगार अनुभव रहा."

कहा जा रहा है कि फ़िल्म में प्रियंका के कई अंतरंग दृश्य हैं. इस पर प्रियंका बोलीं, "कहानी के हिसाब से कुछ दृश्य हैं जिन्हें बेहद ख़ूबसूरती से फ़िल्माया गया है. मेरी फ़िल्मों में अंतरंगता वहीं तक रहती हैं जितने में मैं सहज रहती हूं. मैं ऐसा कोई दृश्य नहीं करूंगी जिसे करने में मुझे सहजता महसूस ना हो."

प्रियंका के साथ मौजूद फ़िल्म के निर्देशक विशाल भारद्वाज ने 'सात ख़ून माफ़' के बारे में बताया, "ये एक ब्लैक कॉमेडी है. काफ़ी मज़ेदार फ़िल्म है. फ़िल्म में वैसा ही हास्य है जैसा आजकल के युवा पसंद करते हैं."

ओमकारा, मक़बूल और कमीने जैसी फ़िल्म बना चुके विशाल हमेशा जटिल विषयों पर क्यों फ़िल्में बनाते हैं. ये पूछने पर विशाल बोले, "मैं अंदर से भी एक टेढ़ा-मेढ़ा इंसान हूं. मुझे सीधी, सरल कहानियां शायद पसंद ही नहीं आतीं. इसलिए मेरी ज़्यादातर फ़िल्में जटिल किस्म की होती हैं."

आजकल फ़िल्मों का सीक्वेल बनाने का चलन बढ़ता जा रहा है. क्या 'सात ख़ून माफ़' का सीक्वेल भी बनेगा. इस सवाल के जवाब में विशाल ने कहा, "सात ख़ून माफ़ की कहानी अपने आप में मुकम्मल कहानी है. इसके सीक्वेल की कोई ज़रूरत नहीं है."

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