पदयात्रा के दौरान प्रेमानंद महाराज के साथ चलती हैं सुरक्षा की ये सुविधाएं, इन 5 बातों का रखा जाता है खास ख्याल

वृंदावन के केली कुंज आश्रम में रहने वाले प्रेमानंद महाराज के आगे आज हजारों लाखों लोग नतमस्तक हैं। बड़े- बूढ़ों की तो बात छोड़िए आज युवा पीढ़ी भी प्रेमानंद महाराज की प्रवचनों को सुनने के लिए दूर देश से आ रही है। आम ही नहीं नामी सितारे जैसे- विराट अनुष्का, शिल्पा शेट्टी, राज कुंद्रा, हेमा मालिनी, रवि किशन समेत तमाम नामी अभिनेता और राजनेता तक प्रेमानंद महाराज की एक झलक देखने के लिए वृंदावन दौड़े चले आते हैं।
लाखों की संख्या में लोग मानते हैं प्रेमानंद महाराज को
जब से लोगों को यह मालूम हुआ है कि प्रेमानंद महाराज की तबीयत खराब है तब से हजारों लाखों की संख्या में लोग प्रेमानंद महाराज का हाल चाल लेने के लिए वृंदावन जमा हो गए हैं। बता दें कि प्रेमानंद महाराज की दोनों किडनियां खराब हैं जिसके चलते आए दिनों उनका डायलिसिस चलता है, लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट की मानें तो बीते दिन उनका सिटी स्कैन हुआ था जिसमें उनके पेट में सूजन बताई जा रही है। हालांकि प्रेमानंद महाराज की स्वास्थ्य स्थिति को अभी गुप्त रखा गया है।
पदयात्रा में चलती हैं ये सुरक्षा सुविधाएं
आपको बता दें कि प्रेमानंद महाराज की स्थिति चाहें कैसी भी क्यों ना हो, लेकिन फिर भी वह अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए पदयात्रा में आते हैं। रोजाना आधी रात को प्रेमानंद महाराज श्रीहित केली कुंज आश्रम से लेकर राधा टीला तक पैदल यात्रा करते हैं और उनके साथ उनके अनुयायी और भक्तों का सैलाब देखने को मिलता है।
बता दें कि प्रेमानंद महाराज यात्रा में ऐसे ही नहीं जाते हैं। पदयात्रा के दौरान भी कई चीजों का खास ध्यान रखा जाता है। पहला तो प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा का ध्यान रखा जाता है। जैसी ही प्रेमानंद महाराज की यात्रा शुरू होती है स्थानीय पुलिस पहले से ही तैनात हो जाती है। इसके अलावा कई सेवक, अनुयायी काम करते नजर आते हैं।
दो अनुयायी बैटरी वाला पंखा लेकर चलते हैं जिससे प्रेमानंद महाराज को पसीना आए तो वह तुरंत ही सूख जाए। क्योंकि अधिक पसीना बहने की वजह से उन्हें प्यास लग सकती है, और किडनियां खराब होने की वजह से वह 1 गिलास पानी भी नहीं पी सकते हैं। इसके अलावा दो सेवक आगे चलते हैं जो हाथ से पंखा डुलाते नजर आते हैं। बताया जाता है कि एक फर्स्ट ऐड की किट भी रखी जाती है। प्रेमानंद महाराज अपने साथ प्रसादी भी लेकर चलते हैं। रास्ते भर सेवक भक्तों को प्रसाद बांदते नजर आते हैं। इनके अलावा एक सेवक ऐसा भी है जो यात्रा पूरी होने पर तुरंत ही झाड़ू लगाता हुआ चलता है जिससे किसी और को परेशानी ना हो। इनके अलावा भक्तों की सुविधाओं के लिए डिफेंडर जैसी सुरक्षित गाड़ियों का भी इंतजाम किया जाता है। बता दें कि इसके अलावा भी कई ऐसी चीजें हैं जो पदयात्रा के दौरान की जाती हैं और इन सबको ध्यान रखते हुए 2 किलो मीटर की यात्रा को सफल बनाया जाता है।


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