AI डीपफेक पर प्रीति जिंटा की बड़ी जीत: बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले से ठगों में मचा हड़कंप

बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रीति जिंटा को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उन्हें उन लोगों या कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की इजाजत दे दी है, जो AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के जरिए उनके 'डीपफेक' तैयार कर रहे हैं। यह फैसला उनके 'पर्सनैलिटी राइट्स' (व्यक्तित्व अधिकारों) को डिजिटल चोरी और बिना अनुमति के कमर्शियल इस्तेमाल से बचाने के लिए लिया गया है। सिंथेटिक मीडिया के बढ़ते खतरों के खिलाफ बॉलीवुड सितारों की इस जंग में यह एक बेहद अहम कदम है।

दरअसल, पिछले कुछ समय से सेलिब्रिटीज की पहचान का गलत इस्तेमाल कर फर्जी विज्ञापनों के मामले तेजी से बढ़े हैं। ठग अक्सर मशहूर हस्तियों की आवाज और चेहरे की नकल करने के लिए जेनरेटिव AI का सहारा लेते हैं। प्रीति जिंटा चाहती हैं कि ऐसे सभी प्लेटफॉर्म उनके नाम पर चल रहे भ्रामक कंटेंट को तुरंत हटाएं और हर्जाना भरें। इस तरह के अदालती आदेशों से सितारों को डिजिटल युग में अपने पर्सनल ब्रांड पर फिर से कंट्रोल पाने में मदद मिलती है।

Preity Zinta Wins Legal Battle Against AI Deepfakes Bombay High Court Order Explained 2026

बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला और AI डीपफेक का असर

17 जून को आए इस फैसले ने अज्ञात डिजिटल अपराधियों के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार कर दिया है। भारत में इस तरह की कानूनी कार्रवाई को 'जॉन डो' (John Doe) ऑर्डर कहा जाता है। इसके जरिए एक्ट्रेस अब उन तमाम वेबसाइटों और सोशल मीडिया अकाउंट्स को ब्लॉक करवा सकेंगी, जो उनकी पहचान और आवाज का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। अब इन प्लेटफॉर्म्स को वो सभी डीपफेक वीडियो हटाने होंगे जो प्रीति की यूनिक आइडेंटिटी को नुकसान पहुंचा रहे हैं। पूरी फिल्म इंडस्ट्री के लिए यह फैसला एक बड़ी मिसाल है।

बॉलीवुड में पर्सनैलिटी राइट्स और पुराने मामले

प्रीति जिंटा से पहले अनिल कपूर और अमिताभ बच्चन भी दिल्ली हाई कोर्ट से इसी तरह के आदेश हासिल कर चुके हैं। उन्होंने अपने सिग्नेचर स्टाइल और डायलॉग्स को फर्जी विज्ञापनों में इस्तेमाल होने से बचाने के लिए सफलतापूर्वक कानूनी लड़ाई लड़ी थी। अब प्रीति के केस ने इस कानूनी जंग को मुंबई के अधिकार क्षेत्र तक पहुंचा दिया है। यह मामला AI और डिजिटल पहचान को लेकर नए नियमों की सख्त जरूरत को भी रेखांकित करता है। फैंस को भी सलाह दी जाती है कि वे सेलिब्रिटीज वाले संदिग्ध विज्ञापनों को लेकर सावधान रहें।

अब उम्मीद की जा रही है कि बड़े टेक प्लेटफॉर्म्स कंटेंट मॉडरेशन को लेकर सख्ती दिखाएंगे और ऐसे वीडियो को प्लेटफॉर्म से हटाएंगे। अगली सुनवाई में कोर्ट डिजिटल हर्जाने के दायरे पर फोकस कर सकता है। यह कानूनी लड़ाई भारतीय कानून में डिजिटल पहचान को देखने के नजरिए में एक बड़ा बदलाव है। यह सुनिश्चित करता है कि टेक्नोलॉजी की तरक्की किसी व्यक्ति की प्राइवेसी के अधिकार का उल्लंघन न करे। इन कानूनी उपायों के लागू होने के बाद, अब इंटरनेट पर ज्यादा वेरिफाइड कंटेंट देखने को मिलेगा।

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