मजेदार है रोबोट

लेकिन ताजुज्ब यही है कि शंकर का रोबोट मानव और इंसानों की तरह रोता और सोता और गाता भी है। शंकर का रोबोट केवल एक मशीन नहीं है, बल्कि उस पर फिल्म की कहानी को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी है। यह रोबोट अच्छाई (रजनीकांत) और बुराई (डैनी) के बीच फंस जाता है, लेकिन जल्द ही वह अपने सृजक से वफादारी निभाने लगता है।
रजनीकांत की फिल्म हो और एक्शन न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता और वह भी तब जब वे एक रोबोट के किरदार में हैं। यहां वे रेलवे ट्रैक पर रेल की तरह पटरी पर दौड़ सकते हैं, चलती रेल पर जमीन के समानांतर दौड़ सकते है, कभी एनाकोंडा बन सकते हैं, तो कभी हैलीकॉप्टर को निगल सकते हैं। और जरूरत पड़ने पर अपनी उंगलियों से गोलियां भी बरसा सकते हैं।
फिल्म की पटकथा बहुत ही बढ़िया ढंग से लिखी गई है और बेहद दिलचस्प है। हालांकि पूरी फिल्म ही दर्शकों को एक मजेदार दुनिया की सैर कराती है, लेकिन आखिर का आधा घंटा तो चौंका देनेवाला और स्तब्धकारी है। आप किसी भी हिंदी फिल्म में ऐसे क्लाइमैक्स की अपेक्षा नहीं कर सकते और रही बात मनोरंजन की तो यह तय है कि मनोरंजन की इस फिल्म में कोई कमी नहीं है।
फिल्म की सिनेमाटोग्राफी भी बेहद आकर्षक है। ऑस्ट्रिया, माचु पिचु, अमेरिका और ब्राजील के दृश्य मन मोह लेते हैं।फिल्म 'रोबोट" शुरू से आखिर तक रजनीकांत के नाम है। और यह सच है कि इस भूमिका को रजनीकांत के अलावा और कोई दूसरा अभिनेता इतनी आसानी से नहीं निभा सकता था। ऐश्वर्य राय बेहद खूबसूरत दिखीं है और सहजता से अभिनय करने में कामयाब रही हैं। डैनी डेंजोंग्पा बहुत प्रभावशाली लगे हैं। शेष अभिनेताओं ने अपनी भूमिकाओं को अच्छी तरह अंजाम दिया है।


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